अंबुबाची मेला 2025: कामाख्या मंदिर फिर से खुला, लाखों श्रद्धालुओं का आगमन शुरू
सारांश
मुख्य बातें
गुवाहाटी के नीलाचल पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के कपाट 27 जून को प्रातःकालीन नित्य पूजा के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पुनः खोल दिए गए। वार्षिक अंबुबाची मेले के दौरान मां कामाख्या के रजस्वला काल की परंपरागत मान्यता के अनुसार मंदिर तीन दिनों तक बंद रहा था। मंदिर के पुनः खुलने के साथ ही देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के गुवाहाटी पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
मंदिर बंद होने का कारण और 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 22 जून की रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान के साथ मंदिर के कपाट बंद किए गए थे। इस अवधि में मां कामाख्या को वार्षिक रजस्वला अवस्था में माना जाता है, जो स्त्री शक्ति और सृजन का प्रतीक है। इस दौरान गर्भगृह में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहा और नियमित पूजा-अर्चना भी स्थगित रही।
अंबुबाची मेले का धार्मिक महत्व
अंबुबाची मेला शक्ति उपासना परंपरा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। यह पर्व धरती माता की उर्वरता और सृजन-शक्ति का उत्सव है। 51 शक्तिपीठों में से एक, कामाख्या मंदिर विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है। गौरतलब है कि प्रतिवर्ष इस मेले में लाखों साधु-संत, श्रद्धालु और आध्यात्मिक साधक भाग लेते हैं, जिससे गुवाहाटी कुछ दिनों के लिए देश की धार्मिक आस्था का केंद्र बन जाता है।
श्रद्धालुओं को मिलेगा अंगोदक और अंगवस्त्र
मंदिर के पुनः खुलने के बाद भक्तों को पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र (अंगबस्त्र) वितरित किए जाएंगे, जिन्हें अत्यंत शुभ और पूजनीय माना जाता है। यह प्रसाद श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त दूर-दूर से आते हैं।
प्रशासन की तैयारियाँ
मंदिर प्रशासन और असम सरकार ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, ठहरने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को विशेष रूप से सुदृढ़ किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक पर्यटन को लेकर राज्य सरकार की सक्रियता भी बढ़ी है।
आगे क्या
मंदिर के कपाट खुलने के बाद आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की है ताकि दर्शन सुचारु और सुव्यवस्थित रूप से हो सके।