होर्मुज खुलने की राह: ईरानी मीडिया का दावा — अमेरिका-ईरान MOU ड्राफ्ट तैयार, 30 दिन में शिपिंग बहाली संभव
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के सरकारी टेलीविज़न और मिज़ान समाचार एजेंसी ने 27 मई 2026 को दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक अनौपचारिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) का शुरुआती मसौदा तैयार कर लिया गया है। कथित तौर पर इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजरानी को 30 दिनों के भीतर युद्ध-पूर्व स्तर पर बहाल करने की बात कही गई है। हालाँकि, इस दावे की अभी तक अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ड्राफ्ट में क्या है
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित मसौदे में अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति ईरानी क्षेत्र के आसपास से कम करने और नौसैनिक घेराबंदी हटाने पर सहमति जता सकता है। बदले में ईरान यह सुनिश्चित करेगा कि होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही एक महीने के भीतर पूर्ववत हो जाए। रिपोर्टों के अनुसार इस ढाँचे में बहु-स्तरीय शांति प्रक्रिया का प्रावधान भी शामिल है।
यह भी कहा गया है कि यदि 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता संपन्न हो जाता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में औपचारिक मंजूरी दी जाएगी। हालाँकि इसमें शामिल बलों और क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों से जुड़ी शर्तों पर आगे की वार्ता अभी बाकी बताई जा रही है।
प्रमुख अनसुलझे मुद्दे
ईरानी मीडिया के इन दावों के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच कई अहम मसलों पर मतभेद बने हुए हैं। इनमें हाईली एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार, प्रतिबंधों में राहत की सीमा, और फ्रीज़ की गई ईरानी संपत्तियों की वापसी जैसे संवेदनशील विषय शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन मुद्दों पर सहमति बने बिना कोई स्थायी समझौता संभव नहीं है।
होर्मुज का वैश्विक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। हालिया संघर्ष के दौरान इस जलमार्ग पर जहाजरानी बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हो गई थीं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहे हैं।
सरकारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अल जजीरा ने ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से इन रिपोर्टों की पुष्टि की है। गौरतलब है कि यह समझौता अभी केवल ड्राफ्ट स्तर पर है और किसी भी पक्ष ने इसे अंतिम रूप देने की घोषणा नहीं की है। संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर जो प्रावधान सामने आए हैं, वे इस प्रक्रिया को एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय ढाँचे में स्थापित करने की कोशिश का संकेत देते हैं।
आगे क्या होगा
यदि यह मसौदा आगे बढ़ता है, तो 60 दिनों की समय-सीमा के भीतर अंतिम समझौते की उम्मीद जताई जा रही है। हालाँकि परमाणु और प्रतिबंध संबंधी मुद्दों पर गतिरोध बना रहा, तो यह प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है। वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग बाज़ार इस घटनाक्रम पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं।