अमित शाह ने गांधीनगर से 'भारत टैक्सी' लॉन्च की, 7 लाख सारथियों को मिलेगा सहकारी स्वामित्व
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 27 जून 2026 को गांधीनगर से गुजरात में 'भारत टैक्सी' सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के विजन को मोबिलिटी क्षेत्र में उतारने की यह पहल टैक्सी चालकों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि का नया अध्याय लिखेगी।
सेवा का दायरा और संरचना
'भारत टैक्सी' की सेवाएं गुजरात के प्रमुख शहरों — अहमदाबाद, सूरत और राजकोट — में पहले ही शुरू हो चुकी हैं। यह प्लेटफॉर्म दोपहिया, ऑटो-रिक्शा और चारपहिया वाहनों की तीनों श्रेणियों में सेवाएं देगा। सरकार का लक्ष्य है कि 31 जुलाई से पहले देश के सात प्रमुख शहरों में इसकी उपस्थिति दर्ज हो जाए।
सारथी बनेंगे मालिक — निजी ऐप से अलग मॉडल
शाह ने इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए कहा कि 'भारत टैक्सी' से जुड़े 7 लाख 'सारथी' इस सहकारी संस्था के शेयरधारक हैं, न कि केवल कर्मचारी। उन्होंने कहा कि निजी ऐप-आधारित कंपनियाँ चालकों को महज ड्राइवर मानती हैं, जबकि 'भारत टैक्सी' उन्हें 'सारथी' के रूप में सम्मान देती है और सहकारी संस्था में हिस्सेदारी प्रदान करती है। इसके अलावा सारथियों को ऋण सुविधा, बीमा सुरक्षा और कारोबार विस्तार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रतिस्पर्धियों पर आरोप
शाह ने आरोप लगाया कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों द्वारा अचानक की गई किराया कटौती का असली उद्देश्य 'भारत टैक्सी' की बाज़ार में एंट्री को रोकना है, ताकि बाद में वे मनमाने तरीके से किराया वसूल सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'भारत टैक्सी' आम लोगों की सेवा और पारदर्शी व्यवस्था के अपने संकल्प से नहीं हटेगी।
विस्तार योजना और साझेदारियाँ
अगले दो वर्षों में 'भारत टैक्सी' को देश के 500 से अधिक शहरों और कस्बों तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है। लॉन्च के अवसर पर 'भारत टैक्सी' ने गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, गुजरात स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, अहमदाबाद ट्रैफिक पुलिस, सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और पश्चिम रेलवे के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए।
आगे की राह
शाह ने जोर देकर कहा कि 'भारत टैक्सी' की सफलता सारथियों और ग्राहकों दोनों की दीर्घकालिक सोच पर निर्भर करेगी। यह पहल सहकारिता आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक नया मॉडल स्थापित कर सकती है, जो परिवहन क्षेत्र में निजी एकाधिकार को चुनौती देने की क्षमता रखती है।