भारत टैक्सी: 35 लाख यूजर्स और 6 लाख सारथियों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव
सारांश
मुख्य बातें
भारत टैक्सी ने 35 लाख से अधिक ऐप डाउनलोड्स और 6 लाख से ज्यादा सारथियों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव का दर्जा हासिल कर लिया है। 5 फरवरी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च यह प्लेटफॉर्म, पारंपरिक राइड-हेलिंग मॉडल को चुनौती देते हुए 'सहकार से समृद्धि' के विज़न को ज़मीन पर उतार रहा है।
क्या है भारत टैक्सी का मॉडल
भारत टैक्सी एक ड्राइवर-ओन्ड कोऑपरेटिव मॉडल पर काम करती है, जहाँ सारथी किसी कंपनी के कर्मचारी नहीं, बल्कि इस प्लेटफॉर्म के स्वयं हिस्सेदार हैं। यहाँ राइड की 100 प्रतिशत कमाई बिना किसी कमीशन-कटौती के सीधे ड्राइवर के खाते में जाती है।
भारत टैक्सी के चेयरमैन और अमूल के एमडी जयेन मेहता के अनुसार, 'भारत टैक्सी ने ड्राइवर-ओन्ड मॉडल को धरातल पर उतारकर यह सुनिश्चित किया है कि राइड की 100 प्रतिशत कमाई बिना किसी कटौती के सीधे ड्राइवर्स तक पहुँचे। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव के रूप में उभरकर न केवल सारथियों की गरिमा बहाल कर रही है, बल्कि 'सहकार से समृद्धि' के विज़न को वैश्विक स्तर पर एक नया बेंचमार्क दे रही है।'
सारथियों की आय पर सीधा असर
मोबिलिटी सेक्टर में भारी-भरकम कमीशन और अनिश्चित आय सारथियों की सबसे बड़ी समस्या रही है। भारत टैक्सी से जुड़ने के बाद एक औसत सारथी की मासिक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया है।
सारथी प्रवीण ठाकोर अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं, 'अन्य कंपनियों के साथ काम करना अब फायदेमंद नहीं रह गया था। लेकिन, भारत टैक्सी से जुड़ने के बाद हमें बेहतरीन रेट और रिस्पॉन्स मिल रहे हैं। इस मॉडल से जुड़कर कोई भी सारथी अच्छी कमाई कर अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकता है।'
सारथी जनक बारोट बताते हैं कि जहाँ अन्य कंपनियाँ 30 रुपए प्रति किमी तक वसूलती हैं, वहीं भारत टैक्सी पर ग्राहकों से 17-18 रुपए प्रति किमी का किफायती दर लिया जाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में संस्था के विस्तार के साथ पेंशन और बीमा जैसी योजनाओं का लाभ भी मिलेगा।
यात्रियों को मिल रहा किफायती किराया
निजी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स की 'डायनेमिक प्राइसिंग' के विपरीत, भारत टैक्सी ने किराया संरचना को स्थिर और पारदर्शी रखा है। इससे यात्रियों को औसतन 15 प्रतिशत तक कम किराया देना पड़ रहा है।
अहमदाबाद रिक्शा चालक एकता यूनियन के अध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता कहते हैं, 'ग्राहकों को यह बात बहुत आकर्षित करती है कि यह 'अपने भारत की कंपनी' है और इसमें सारथियों से कोई कमीशन नहीं लिया जाता। ऐप पर खुद दस्तावेज़ सबमिट करने के महज 12 घंटों के भीतर अप्रूवल मिल जाता है।'
विस्तार और तकनीकी मजबूती
गुजरात में 1 लाख सारथियों सहित देशभर में 6 लाख से अधिक सारथी इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। अहमदाबाद और सूरत में सफलता के बाद, वडोदरा अगला प्रमुख विस्तार केंद्र है। कंपनी आईटी पार्क, हाउसिंग सोसायटी और एयरपोर्ट जैसे क्षेत्रों में 'बिलो द लाइन' (BTL) रणनीति के ज़रिये उपयोगकर्ताओं से सीधे जुड़ रही है।
सुरक्षा के मोर्चे पर, गुजरात पुलिस के साथ सीधे SOS इंटीग्रेशन ने यात्रियों और सारथियों दोनों के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार किया है। सोमनाथ और द्वारकाधीश जैसे तीर्थ स्थलों के लिए समर्पित रूट कनेक्टिविटी ने इसे शहरी परिवहन से आगे ले जाकर श्रद्धालुओं की आस्था का भरोसेमंद साथी भी बना दिया है।
प्रशिक्षण और एकीकृत परिवहन
सेवा गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अब तक 10,000 से अधिक ड्राइवरों को डिजिटल साक्षरता और सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मेट्रो, GSRTC और एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ 'इंटीग्रेटेड ट्रांज़िट सिस्टम' ने गुजरात में सफर को एक निर्बाध अनुभव में बदल दिया है। इस सहकारी मॉडल का अगला पड़ाव और भी बड़े राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में है।