8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डिजीहाट राइड्स का 55 शहरों में विस्तार, भारत टैक्सी और नम्मा यात्री से साझेदारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डिजीहाट राइड्स का 55 शहरों में विस्तार, भारत टैक्सी और नम्मा यात्री से साझेदारी

सारांश

डिजीहाट ने भारत टैक्सी और नम्मा यात्री के साथ मिलकर अपनी राइड सेवा 55 शहरों तक पहुँचाई — यह सिर्फ विस्तार नहीं, बल्कि ओला-उबर के वर्चस्व को चुनौती देने वाला ड्राइवर-सहकारी मॉडल है, जहाँ कमाई और फैसले ड्राइवर के हाथ में हैं।

मुख्य बातें

डिजीहाट ने 22 मई 2026 को भारत टैक्सी और नम्मा यात्री के साथ साझेदारी में 55 शहरों में मोबिलिटी सेवा विस्तार की घोषणा की।
डिजीहाट राइड्स पहले केवल दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु तक सीमित थी; अब मुंबई , चेन्नई , हैदराबाद , कोलकाता सहित टियर-2 और टियर-3 शहर भी शामिल।
मॉडल में ड्राइवर स्वामित्व और कम कमीशन पर ज़ोर; ड्राइवरों को कमाई और निर्णयों पर अधिक नियंत्रण का दावा।
निर्मित भारत के सीईओ राहुल विज ने कहा कि लक्ष्य शेयरधारकों के बजाय नागरिकों को प्राथमिकता देने वाला डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है।
राइड सेवा को मेट्रो टिकट बुकिंग , फूड डिलीवरी और ग्रॉसरी सेवाओं से जोड़कर एकीकृत प्लेटफॉर्म बनाने की योजना।

डिजीहाट ने 22 मई 2026 को घोषणा की कि सरकार समर्थित यह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब ड्राइवर-स्वामित्व वाली सहकारी संस्थाओं भारत टैक्सी और नम्मा यात्री के साथ साझेदारी के ज़रिए अपनी मोबिलिटी सेवाएँ भारत के 55 शहरों तक विस्तारित कर चुका है। यह विस्तार राइड-हेलिंग क्षेत्र में सहकारी और नागरिक-केंद्रित मॉडल को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।

किन शहरों में शुरू हुई सेवा

डिजीहाट राइड्स पहले केवल दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में उपलब्ध थी। अब इसे अहमदाबाद, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, कोच्चि, लखनऊ, मुंबई, सूरत, तिरुवनंतपुरम और वडोदरा सहित कई टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुँचाया गया है। यह विस्तार एक साथ बड़े महानगरों और छोटे शहरों दोनों को साधने की रणनीति को दर्शाता है।

पारंपरिक राइड-हेलिंग से कितना अलग है यह मॉडल

प्लेटफॉर्म का दावा है कि उसका मॉडल ओला और उबर जैसी पारंपरिक सेवाओं से मूलभूत रूप से भिन्न है। इसमें ड्राइवर स्वामित्व और कम कमीशन पर विशेष ज़ोर दिया गया है। कंपनी के अनुसार, प्रत्येक ड्राइवर अपनी कमाई और परिचालन संबंधी निर्णयों पर अधिक नियंत्रण रखता है, जबकि उपयोगकर्ताओं को पारदर्शी मूल्य निर्धारण और सामुदायिक जवाबदेही का लाभ मिलता है।

गौरतलब है कि भारत में गिग-वर्कर अधिकारों को लेकर बहस लंबे समय से चल रही है और ड्राइवर-सहकारी मॉडल को इसके एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखा जाता है।

निर्मित भारत के सीईओ ने क्या कहा

निर्मित भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल विज ने कहा, "हम कोई और राइड-शेयरिंग ऐप नहीं बना रहे हैं। हम यह साबित कर रहे हैं कि भारत ऐसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना सकता है जो सबसे पहले नागरिकों की सेवा करे, न कि शेयरधारकों की। डिजीहाट पर हर ड्राइवर अपनी कमाई खुद रखता है। हर उपयोगकर्ता को वास्तविक विकल्प मिलता है। यही समावेशी डिजिटल भागीदारी की असली तस्वीर है।"

कंपनी ने यह भी बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न और 'ईज़ ऑफ लिविंग' के लक्ष्य के अनुरूप है।

एकीकृत प्लेटफॉर्म की ओर कदम

डिजीहाट ने कहा कि राइड सेवा को उसके मौजूदा प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिसमें मेट्रो टिकट बुकिंग, फूड डिलीवरी, शॉपिंग और ग्रॉसरी सेवाएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना है। प्लेटफॉर्म खुद को भारतीय उत्पादकों, कारीगरों, किसान समूहों और उद्यमों की डिजिटल भागीदारी को मज़बूत करने वाली सरकार समर्थित पहल के रूप में प्रस्तुत करता है।

आगे क्या

कंपनी के अनुसार, शेष शहरों में चरणबद्ध विस्तार जारी रहेगा। यह देखना होगा कि सहकारी मॉडल बड़े पैमाने पर परिचालन में किस हद तक टिकाऊ साबित होता है, विशेषकर तब जब स्थापित राइड-हेलिंग कंपनियाँ भी अपने ड्राइवर-प्रतिधारण मॉडल में बदलाव कर रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है — सहकारी मॉडल छोटे पैमाने पर सफल रहे हैं, पर बड़े नेटवर्क में ड्राइवर-स्वामित्व और परिचालन दक्षता के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 'कम कमीशन' का दावा कितना टिकाऊ है, यह तब पता चलेगा जब प्लेटफॉर्म को लाभप्रदता का दबाव झेलना पड़ेगा। सरकार-समर्थन का उल्लेख एक बड़ा लाभ है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह समर्थन वित्तीय है, नीतिगत है, या केवल वैचारिक — और यही अंतर मॉडल की दीर्घकालिक व्यवहार्यता तय करेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजीहाट राइड्स क्या है और यह कैसे काम करती है?
डिजीहाट राइड्स एक सरकार समर्थित राइड-हेलिंग सेवा है जो ड्राइवर-स्वामित्व वाली सहकारी संस्थाओं भारत टैक्सी और नम्मा यात्री के साथ मिलकर संचालित होती है। इसमें ड्राइवर अपनी कमाई और परिचालन निर्णयों पर अधिक नियंत्रण रखते हैं, और उपयोगकर्ताओं को पारदर्शी मूल्य निर्धारण का लाभ मिलता है।
डिजीहाट राइड्स अब किन-किन शहरों में उपलब्ध है?
22 मई 2026 की घोषणा के बाद यह सेवा अब भारत के 55 शहरों में उपलब्ध है। दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु के अलावा अहमदाबाद, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, कोच्चि, लखनऊ, मुंबई, सूरत, तिरुवनंतपुरम और वडोदरा सहित कई टियर-2 और टियर-3 शहर शामिल हैं।
डिजीहाट राइड्स ओला-उबर से कैसे अलग है?
डिजीहाट का मॉडल पारंपरिक राइड-हेलिंग से इस मायने में अलग है कि इसमें ड्राइवर सहकारी संस्था के स्वामी होते हैं और कमीशन कम रखा जाता है। कंपनी का दावा है कि यहाँ हर ड्राइवर अपनी पूरी कमाई खुद रखता है, जबकि पारंपरिक प्लेटफॉर्म पर कमीशन की दर अधिक होती है।
डिजीहाट राइड्स को किस बड़े प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा?
डिजीहाट राइड्स को कंपनी के मौजूदा एकीकृत प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिसमें मेट्रो टिकट बुकिंग, फूड डिलीवरी, शॉपिंग और ग्रॉसरी सेवाएँ पहले से शामिल हैं। इसका उद्देश्य रोज़मर्रा की सभी ज़रूरतों के लिए एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना है।
डिजीहाट का सहकारी मोबिलिटी मॉडल भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में गिग-वर्कर अधिकारों और ड्राइवरों की आय असुरक्षा को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। डिजीहाट का सहकारी मॉडल इस समस्या का एक संभावित समाधान प्रस्तुत करता है, जहाँ ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि प्लेटफॉर्म के स्वामी भी होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले