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अमृत 2.0: 15 दिन में प्रगति नहीं तो ब्लैकलिस्ट होंगे संविदाकार — आयुक्त संकेत भोंडवे का सख्त निर्देश

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अमृत 2.0: 15 दिन में प्रगति नहीं तो ब्लैकलिस्ट होंगे संविदाकार — आयुक्त संकेत भोंडवे का सख्त निर्देश

सारांश

आयुक्त संकेत भोंडवे ने अमृत 2.0 की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया — 15 दिन में प्रगति नहीं तो ब्लैकलिस्ट और LD। 122 कम प्रगति वाली परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा हुई। मध्य प्रदेश अब देश में 7वें स्थान पर।

मुख्य बातें

नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने 13 जून 2026 को अमृत 2.0 समीक्षा बैठक में रेड लिस्टेड संविदाकारों को 15 दिन की अंतिम चेतावनी दी।
प्रगति न लाने पर परफॉर्मेंस गारंटी कटौती , ब्लैकलिस्टिंग और लिक्विडेटेड डैमेज (LD) अधिरोपण की कार्रवाई होगी।
बैठक में 122 कम प्रगति वाली परियोजनाओं की कार्यगुणवत्ता और लंबित बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रीय राशि का 100 प्रतिशत उपयोग मार्च 2026 तक सुनिश्चित किया गया।
मध्य प्रदेश अमृत योजना में अब देश में 7वें स्थान पर है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने 13 जून 2026 को स्पष्ट चेतावनी दी कि अमृत 2.0 के अंतर्गत रेड लिस्टेड संविदाकार यदि 15 दिवस के भीतर परियोजनाओं में ठोस प्रगति नहीं दिखाते, तो उनकी परफॉर्मेंस गारंटी काटी जाएगी और उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, रेड लिस्ट वाली सभी परियोजनाओं के संविदाकारों पर लिक्विडेटेड डैमेज (LD) भी अधिरोपित किया जाएगा।

समीक्षा बैठक में क्या हुआ

आयुक्त भोंडवे ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा अमृत 2.0 के अंतर्गत संचालित जलप्रदाय परियोजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक में संविदाकारों और अधिकारियों को ये निर्देश दिए। बैठक में संभागीय संयुक्त संचालक, संभागीय अधीक्षण यंत्री, संभागीय कार्यपालन यंत्री, टीएल, पीडीएमसी एवं आरई उपस्थित रहे। शेष नगरीय निकायों के अधिकारी और संविदाकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

122 कम प्रगति वाली परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा

बैठक में योजनांतर्गत कम प्रगति वाली पाई गई 122 परियोजनाओं की कार्यगुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन एवं लंबित बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त भोंडवे ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन परियोजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हो सकें।

मध्य प्रदेश देश में 7वें स्थान पर

आयुक्त भोंडवे ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का 100 प्रतिशत उपयोग मार्च 2026 तक सुनिश्चित कर लिया गया। इस बेहतर वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन के फलस्वरूप मध्य प्रदेश अमृत योजना के अंतर्गत वर्तमान में देश में 7वें स्थान पर आ गया है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब कई राज्य केंद्रीय निधि के पूर्ण उपयोग में पिछड़ रहे हैं।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अमृत 2.0 की समयबद्ध पूर्णता पर विशेष जोर दे रही है। आयुक्त के सख्त निर्देशों के बाद अब रेड लिस्टेड संविदाकारों के पास 15 दिन का अंतिम अवसर है — यदि इस अवधि में प्रगति नहीं आई, तो कार्रवाई अवश्यंभावी होगी। अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे मॉनिटरिंग रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। 122 परियोजनाओं का कम प्रगति में होना यह भी दर्शाता है कि केवल धन उपलब्धता पर्याप्त नहीं — निगरानी तंत्र की कमज़ोरी एक गहरी संरचनात्मक समस्या है। मध्य प्रदेश का 7वाँ स्थान उत्साहजनक है, परंतु यह वित्तीय उपयोग का आँकड़ा है, ज़मीनी कार्यपूर्णता का नहीं। ब्लैकलिस्टिंग की धमकी तभी असरदार होगी जब अधिकारी स्वयं भी समान जवाबदेही के दायरे में हों।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमृत 2.0 में रेड लिस्टेड संविदाकारों पर क्या कार्रवाई होगी?
रेड लिस्टेड संविदाकारों को 15 दिन के भीतर परियोजनाओं में प्रगति दिखानी होगी, अन्यथा उनकी परफॉर्मेंस गारंटी काटी जाएगी और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। साथ ही सभी रेड लिस्ट परियोजनाओं के संविदाकारों पर लिक्विडेटेड डैमेज (LD) भी लगाया जाएगा।
अमृत 2.0 समीक्षा बैठक में कितनी परियोजनाओं की समीक्षा हुई?
बैठक में कम प्रगति वाली 122 परियोजनाओं की कार्यगुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन और लंबित बिंदुओं की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त संकेत भोंडवे ने इन परियोजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
मध्य प्रदेश अमृत योजना में देश में किस स्थान पर है?
वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रीय राशि का 100 प्रतिशत उपयोग मार्च 2026 तक सुनिश्चित करने के बाद मध्य प्रदेश अमृत योजना में देश में 7वें स्थान पर आ गया है।
लिक्विडेटेड डैमेज (LD) क्या होता है और इसे कब लगाया जाता है?
लिक्विडेटेड डैमेज (LD) एक वित्तीय दंड है जो संविदाकार पर तब लगाया जाता है जब वह निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा नहीं करता। अमृत 2.0 में रेड लिस्ट वाली परियोजनाओं के सभी संविदाकारों पर यह दंड अधिरोपित किया जाएगा।
अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय परियोजनाओं की निगरानी कैसे होगी?
आयुक्त संकेत भोंडवे ने निर्देश दिए हैं कि कम प्रगति वाली परियोजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग की जाए। संभागीय अधिकारी और संविदाकार नियमित समीक्षा बैठकों में — आवश्यकतानुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से — जवाबदेह रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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