आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद का कार्यकाल 6 महीने बढ़ा, 30 नवंबर 2026 तक रहेंगे पद पर
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद का कार्यकाल केंद्र सरकार ने 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। 15 मई 2026 को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह विस्तार 1 जून 2026 से प्रभावी होकर 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा। केंद्र ने यह निर्णय आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष अनुरोध पर लिया है।
विस्तार का आधिकारिक आदेश
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के अवर सचिव राजेश कुमार यादव ने राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (राजनीतिक) के प्रधान सचिव को पत्र के माध्यम से इस विस्तार की औपचारिक सूचना दी। यह विस्तार अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 16(1) के अंतर्गत दिया गया है।
साई प्रसाद मूल रूप से इसी महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले थे। राज्य सरकार ने उनकी प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, जिस पर केंद्र ने स्वीकृति दे दी।
साई प्रसाद का कार्यभार और पृष्ठभूमि
जी. साई प्रसाद ने 28 फरवरी 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उन्होंने सेवानिवृत्त हुए के. विजयानंद का स्थान लिया, जिनका कार्यकाल राज्य सरकार ने 29 नवंबर 2025 को तीन महीने बढ़ाकर 28 फरवरी 2026 तक किया था।
मुख्य सचिव नियुक्त होने से पहले साई प्रसाद मुख्य सचिव (जल संसाधन) के पद पर कार्यरत थे। वे आंध्र प्रदेश कैडर के 1991 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं।
करियर की प्रमुख झलकियाँ
एम.टेक डिग्री धारक साई प्रसाद ने जून 1992 से मई 1993 तक संयुक्त आंध्र प्रदेश में वारंगल के सहायक कलेक्टर के रूप में अपनी प्रशासनिक यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने मुख्य भूमि प्रशासन आयुक्त (सीसीएलए) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में यह कार्यकाल विस्तार की प्रक्रिया नई नहीं है — विजयानंद को भी इसी प्रकार तीन महीने का विस्तार मिला था। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कई प्रशासनिक और विकास परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनमें निरंतरता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
आगे क्या
साई प्रसाद अब 30 नवंबर 2026 तक आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव पद पर बने रहेंगे। राज्य सरकार की ओर से फिलहाल उत्तराधिकारी की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य की प्रमुख प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर काम जारी रहने की उम्मीद है।