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चंद्रबाबू नायडू का रेयर-अर्थ मिनरल क्लस्टर प्रस्ताव: आंध्र प्रदेश, ओडिशा और केरल को जोड़ने की योजना

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चंद्रबाबू नायडू का रेयर-अर्थ मिनरल क्लस्टर प्रस्ताव: आंध्र प्रदेश, ओडिशा और केरल को जोड़ने की योजना

सारांश

चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और केरल को मिलाकर रेयर-अर्थ मिनरल क्लस्टर बनाने का प्रस्ताव रखा है — टाइटेनियम, इल्मेनाइट और मोनाजाइट जैसे रणनीतिक खनिजों पर दांव लगाते हुए। राज्य में 126 खनिज स्थलों की पहचान हो चुकी है और खनन राजस्व में 18% की बढ़त दर्ज की गई है।

मुख्य बातें

चंद्रबाबू नायडू ने 30 जून 2026 को आंध्र प्रदेश, ओडिशा और केरल को मिलाकर रेयर-अर्थ मिनरल क्लस्टर बनाने का प्रस्ताव रखा।
अधिकारियों को टाइटेनियम, इल्मेनाइट और मोनाजाइट के भंडार का आकलन करने और व्यापक मिनरल मैपिंग करने का निर्देश दिया गया।
राज्यभर में 126 खनिज स्थलों की पहचान पहले ही हो चुकी है; खनन राजस्व में 18% की वृद्धि दर्ज।
चित्तूर जिले के जोन्नागिरी और चिगुरुगुंटा में सोने के भंडार की खोज के लिए अध्ययन का निर्देश।
मुफ़्त रेत नीति से सरकार को सालाना लगभग ₹1,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान; पारदर्शी क्रियान्वयन के निर्देश।
रेत खनन की निगरानी के लिए सीसीटीवी, सैटेलाइट इमेजरी और जीपीएस ट्रैकिंग लागू करने का आदेश।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार, 30 जून 2026 को अमरावती स्थित अपने सरकारी आवास पर माइंस विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान आंध्र प्रदेश, ओडिशा और केरल को मिलाकर एक संयुक्त रेयर-अर्थ मिनरल क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अधिकारियों को राज्यभर में व्यापक मिनरल मैपिंग करने और खनिज प्रोसेसिंग के जरिए वैल्यू एडिशन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

क्लस्टर प्रस्ताव की मुख्य बातें

मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश की विशाल खनिज संपदा बाजार पूंजीकरण के लिए असाधारण अवसर प्रदान करती है। उन्होंने अधिकारियों को टाइटेनियम, इल्मेनाइट और मोनाजाइट जैसे उच्च-मूल्य वाले खनिजों के भंडार का विस्तृत आकलन करने को कहा। उनके अनुसार ये रेयर-अर्थ खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, मैग्नेट और अन्य उन्नत उत्पादों के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं, साथ ही परमाणु ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी इनकी निर्णायक भूमिका है।

नायडू ने राज्य के स्वामित्व वाली आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एपीएमडीसी) को निर्देश दिया कि वह कीमती खनिज संपत्तियों के बाजार पूंजीकरण के तरीकों का पता लगाए और इसके लिए विशेषज्ञों की सहायता से विस्तृत अध्ययन कराए।

वैल्यू एडिशन और राजस्व की संभावना

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि बीच सैंड, रेयर-अर्थ खनिज, लौह अयस्क, मैंगनीज और एल्यूमिना जैसे खनिजों में वैल्यू एडिशन से राज्य को भारी राजस्व प्राप्त हो सकता है। उन्होंने बताया कि कई भारतीय राज्यों ने खनिज-आधारित आय के दम पर राजस्व अधिशेष हासिल किया है और आंध्र प्रदेश को भी इसी राह पर चलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक लाभ को अधिकतम करने और रोजगार सृजन के लिए सभी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन गतिविधियाँ आंध्र प्रदेश के भीतर ही होनी चाहिए।

अधिकारियों ने बताया कि राज्यभर में महत्वपूर्ण, थोक और अन्य कीमती खनिजों वाले 126 स्थानों की पहचान पहले ही की जा चुकी है। बेहतर कामकाज के कारण खनन राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि भी दर्ज की गई है।

सोने के खनन की संभावनाएँ

मुख्यमंत्री ने चित्तूर जिले में जोन्नागिरी और चिगुरुगुंटा में सोने के भंडार की ओर ध्यान दिलाया और अधिकारियों को भविष्य की खोज के लिए शेष खनिज ब्लॉकों का अध्ययन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सोने के खनन में राज्य की क्षमता को अभी पूरी तरह नहीं आँका गया है।

रेत खनन की निगरानी और मुफ़्त रेत नीति

नायडू ने उन्नत तकनीक के जरिए रेत खनन और आपूर्ति की व्यापक निगरानी का आदेश दिया। इसमें सीसीटीवी कैमरे, सैटेलाइट इमेजरी और रेत परिवहन वाहनों के लिए जीपीएस ट्रैकिंग शामिल है। उन्होंने स्वीकार किया कि जनता को मुफ़्त रेत उपलब्ध कराने की नीति से सरकार को सालाना लगभग ₹1,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह नीति पारदर्शी तरीके से लागू हो और इसका पूरा लाभ जनता तक पहुँचे, न कि बिचौलियों को।

बैठक में उपस्थित अधिकारी

इस समीक्षा बैठक में खनन मंत्री कोल्लू रवींद्र, मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद, प्रधान सचिव (खनन) मुकेश कुमार मीना, प्रधान सचिव (वित्त) पीयूष कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आने वाले समय में राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मूर्त रूप देने के लिए विशेषज्ञ अध्ययन और अंतर-राज्यीय समन्वय की दिशा में कदम उठाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली चुनौती अंतर-राज्यीय समन्वय है — ओडिशा और केरल की अपनी खनिज नीतियाँ और राजनीतिक प्राथमिकताएँ हैं, जो किसी साझा ढाँचे को जटिल बना सकती हैं। वैल्यू एडिशन को आंध्र प्रदेश के भीतर रखने का आग्रह सही दिशा में है, लेकिन अब तक राज्य कच्चे खनिज निर्यात पर ही निर्भर रहा है। ₹1,000 करोड़ के वार्षिक राजस्व नुकसान की स्वीकारोक्ति और पारदर्शिता पर जोर सकारात्मक संकेत है, परंतु बिना स्वतंत्र ऑडिट तंत्र के यह भी महज घोषणा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रबाबू नायडू का रेयर-अर्थ मिनरल क्लस्टर प्रस्ताव क्या है?
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और केरल को मिलाकर एक संयुक्त रेयर-अर्थ मिनरल क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य टाइटेनियम, इल्मेनाइट और मोनाजाइट जैसे रणनीतिक खनिजों का समन्वित दोहन और प्रोसेसिंग करना है।
रेयर-अर्थ खनिज क्यों महत्वपूर्ण हैं?
रेयर-अर्थ खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, मैग्नेट और उन्नत उत्पादों के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं। इसके अलावा ये परमाणु ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
आंध्र प्रदेश में अब तक कितने खनिज स्थलों की पहचान हुई है?
अधिकारियों के अनुसार राज्यभर में महत्वपूर्ण, थोक और अन्य कीमती खनिजों वाले 126 स्थानों की पहचान पहले ही की जा चुकी है। बेहतर कामकाज के कारण खनन राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि भी दर्ज की गई है।
मुफ़्त रेत नीति से सरकार को कितना नुकसान हो रहा है?
मुख्यमंत्री नायडू ने बताया कि जनता को मुफ़्त रेत उपलब्ध कराने की नीति से सरकार को सालाना लगभग ₹1,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस नीति को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए।
आंध्र प्रदेश में सोने के खनन की क्या संभावनाएँ हैं?
मुख्यमंत्री नायडू ने चित्तूर जिले के जोन्नागिरी और चिगुरुगुंटा में सोने के भंडार की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने अधिकारियों को भविष्य की खोज के लिए शेष खनिज ब्लॉकों का विस्तृत अध्ययन करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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