23 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अरुण गोविल ने UN में उठाया स्वास्थ्य का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 21 फैसलों का दिया हवाला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अरुण गोविल ने UN में उठाया स्वास्थ्य का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 21 फैसलों का दिया हवाला

सारांश

भाजपा सांसद अरुण गोविल ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के दशकों पुराने फैसलों को पेश किया, जो जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य को शामिल मानते हैं — 1995 के श्रमिक स्वास्थ्य फैसले से लेकर 2024 के जलवायु परिवर्तन संबंधी संवैधानिक अधिकार तक।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद अरुण गोविल ने 23 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत के साथ स्वास्थ्य अधिकार पर चर्चा में भाग लिया।
सर्वोच्च न्यायालय वर्षों से संविधान के अनुच्छेद 21 की व्याख्या में स्वास्थ्य के अधिकार को शामिल मानता आया है।
1995 के ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल को मौलिक अधिकार घोषित किया और नियोक्ताओं को स्वास्थ्य बीमा देने का निर्देश दिया।
2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा को संवैधानिक अधिकार माना।
गोविल ने इलाज खर्च, भाषा बाधा, दूरी और कानूनी जागरूकता को स्वास्थ्य अधिकार की राह में प्रमुख चुनौतियाँ बताया।

भाजपा सांसद अरुण गोविल ने 23 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य के अधिकार पर विशेष दूत के साथ हुई बातचीत में भारत की न्यायपालिका की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय दशकों से संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) की व्यापक व्याख्या करते हुए उसमें स्वास्थ्य के अधिकार को भी शामिल मानता रहा है। यह चर्चा 'स्वास्थ्य के अधिकार को न्यायिक रूप से लागू कर न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करना' विषय पर केंद्रित थी।

बातचीत का मुख्य विषय और भारत का पक्ष

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक्स पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की। गोविल ने बातचीत के दौरान माना कि इलाज का खर्च, भाषा की बाधा, दूरी और कानूनी जानकारी की कमी जैसी चुनौतियाँ नागरिकों को स्वास्थ्य के अधिकार का पूरा लाभ उठाने से रोक सकती हैं।

उन्होंने कॉरपोरेट जवाबदेही के मुद्दे को भी उठाया और कहा, 'कुछ मामलों में कॉरपोरेट ताकत जवाबदेही से बच निकलती है।' साथ ही उन्होंने रिपोर्ट में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल किए जाने की सराहना की, जिससे सदस्य देश परस्पर सीख सकें।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले

गोविल ने 1995 के एक महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का विशेष उल्लेख किया, जिसमें श्रमिकों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने कहा, '1995 में ही अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल का अधिकार मौलिक अधिकार है।' अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि नियोक्ता अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराएँ।

उन्होंने उन न्यायिक हस्तक्षेपों का भी जिक्र किया जिनका उद्देश्य मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ सुनिश्चित करना और अस्पताल की सुविधाओं में सुधार करना था। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच असमान बनी हुई है।

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अधिकार

गोविल ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण को भी अनुच्छेद 21 के दायरे में माना है। उन्होंने कहा, '2024 में अदालत ने जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा को भी संवैधानिक अधिकार माना।' गौरतलब है कि यह फैसला जलवायु न्याय के संदर्भ में भारतीय न्यायशास्त्र में एक उल्लेखनीय विकास है।

खाद्य लेबलिंग और प्रजनन स्वास्थ्य

सांसद गोविल ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी वाले लेबल लगाने से संबंधित हालिया न्यायिक निर्देशों का उल्लेख करते हुए इसे स्वास्थ्य पर व्यावसायिक प्रभावों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से संबंधित भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का जिक्र करने के लिए विशेष दूत की सराहना की।

भारत की प्रतिबद्धता और आगे की राह

गोविल ने कहा कि भारत अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ, किफायती और समान बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा, 'हम इस बात के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि देश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों।' भारत के न्यायिक अनुभव और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के बीच यह संवाद आने वाले समय में नीति-निर्माण को और मजबूत बनाने का आधार बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन न्यायिक घोषणाओं और जमीनी वास्तविकता के बीच की खाई को नज़रअंदाज करना उचित नहीं होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने दशकों से स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार माना है, फिर भी भारत में स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय GDP के लगभग 2% के आसपास ही बना हुआ है। न्यायिक आदेश और नीतिगत क्रियान्वयन के बीच की यह दूरी वह असली परीक्षा है जिसे वैश्विक मंच पर भी स्वीकार किया जाना चाहिए।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुण गोविल ने संयुक्त राष्ट्र में क्या कहा?
भाजपा सांसद अरुण गोविल ने न्यूयॉर्क में UN के स्वास्थ्य अधिकार विशेष दूत के साथ बातचीत में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के उन फैसलों का हवाला दिया जिनमें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य के अधिकार को मान्यता दी गई है। उन्होंने इलाज खर्च, भाषा बाधा और कानूनी जागरूकता को स्वास्थ्य अधिकार की चुनौतियाँ बताया।
भारत में अनुच्छेद 21 और स्वास्थ्य के अधिकार का क्या संबंध है?
भारत का सर्वोच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) की व्याख्या करते हुए उसमें स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं के अधिकार को भी शामिल मानता है। 1995 के एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि औद्योगिक विकास श्रमिकों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में जलवायु परिवर्तन पर क्या फैसला दिया?
2024 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से मुक्त रहने को संविधान के तहत एक अधिकार के रूप में मान्यता दी। गोविल ने इसे अनुच्छेद 21 के दायरे के विस्तार का एक उल्लेखनीय उदाहरण बताया।
इस UN बातचीत में कॉरपोरेट जवाबदेही का मुद्दा क्यों उठा?
गोविल ने बताया कि UN विशेष दूत की रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि कुछ मामलों में कॉरपोरेट ताकत जवाबदेही से बच निकलती है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य के अधिकार की राह में एक वैश्विक चुनौती के रूप में रेखांकित किया।
भारत स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए क्या कर रहा है?
गोविल के अनुसार, भारत अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुलभ, किफायती और समान बनाने के लिए निरंतर काम कर रहा है। न्यायिक हस्तक्षेपों के जरिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ सुनिश्चित करने और अस्पताल सुविधाओं में सुधार के प्रयास इसी दिशा में हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले