असम में 8 नए सह-जिले बनाने का ऐलान, हिमंता बिस्वा सरमा बोले — कुल संख्या 47 होगी
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार अपने को-डिस्ट्रिक्ट (सह-जिला) मॉडल के तहत 8 नए सह-जिले स्थापित करेगी, जिससे असम में चालू सह-जिलों की कुल संख्या बढ़कर 47 हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए किया और इसे 'ईज़ ऑफ गवर्नेंस' की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।
को-डिस्ट्रिक्ट मॉडल क्या है
असम सरकार का को-डिस्ट्रिक्ट मॉडल प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की एक पहल है, जिसके तहत चुने हुए सरकारी कार्य और सेवाएँ जिला मुख्यालय से हटाकर स्थानीय सह-जिला कार्यालयों के माध्यम से नागरिकों तक पहुँचाई जाती हैं। इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों के निवासियों को रोज़मर्रा की सरकारी ज़रूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी पोस्ट में लिखा, "अच्छा शासन तब शुरू होता है, जब सरकार लोगों के करीब आती है। हमारा को-डिस्ट्रिक्ट मॉडल ठीक यही कर रहा है।" उन्होंने बताया कि पहले से 39 सह-जिले कार्यरत हैं और अब 8 और जोड़े जाएंगे।
असम के लिए यह पहल क्यों ज़रूरी है
असम की भौगोलिक स्थिति इस पहल को विशेष रूप से प्रासंगिक बनाती है। राज्य में कठिन भूभाग, नदी-घाटियाँ और सीमित कनेक्टिविटी के कारण बड़ी आबादी के लिए जिलास्तरीय सेवाओं तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण रहा है। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस और लास्ट-माइल डिलीवरी को अपने प्रशासनिक एजेंडे का केंद्र बना रही है।
सह-जिला नेटवर्क के विस्तार से स्थानीय स्तर पर विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय मज़बूत होने और कल्याणकारी योजनाओं को तेज़ी से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रशासनिक सुधारों की व्यापक रणनीति
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने कार्यकाल में बार-बार नागरिक-केंद्रित शासन और प्रशासनिक बाधाओं को कम करने पर ज़ोर दिया है। यह विस्तार उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें डिजिटल गवर्नेंस, प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और सरकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक डिलीवरी शामिल है।
सरकार विस्तार प्रक्रिया के तहत 8 नए सह-जिलों की भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक अधिकार-क्षेत्रों की औपचारिक घोषणा जल्द कर सकती है।
आगे क्या होगा
नए सह-जिलों की स्थापना से असम के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भूमि रिकॉर्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र, और अन्य सरकारी सेवाएँ घर के नज़दीक मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्रियान्वयन प्रभावी रहा तो यह मॉडल अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भी एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।