असम सरकार ने ACS अधिकारी अरूप कुमार चक्रवर्ती को कदाचार पर बर्खास्त किया
सारांश
मुख्य बातें
असम सरकार ने 1999 बैच के असम सिविल सेवा (ACS) अधिकारी अरूप कुमार चक्रवर्ती को कथित दुर्व्यवहार और सेवा नियमों के गंभीर उल्लंघन के आरोप में विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया है। गुवाहाटी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्मिक विभाग ने जांच के निष्कर्षों की समीक्षा के बाद 17 जुलाई को यह अंतिम आदेश जारी किया।
मुख्य आरोप और जांच के निष्कर्ष
अधिकारियों के अनुसार, चक्रवर्ती पर भर्ती में अनियमितताओं और सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने सहित कई आरोप लगाए गए थे। विभागीय जांच में यह भी पाया गया कि वे आधिकारिक कार्य समय के दौरान बार-बार कार्यालय में अनुपस्थित रहे।
जांच के निष्कर्षों में यह स्पष्ट किया गया कि चक्रवर्ती का आचरण असम सेवा (अनुशासन और अपील) नियमों का गंभीर उल्लंघन था। इसके आधार पर सरकार ने अधिकतम दंड के रूप में सेवा से बर्खास्तगी का आदेश दिया।
प्रक्रिया और पारदर्शिता
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अनुशासनात्मक प्रक्रिया के दौरान चक्रवर्ती को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया। कार्मिक विभाग ने जांच रिपोर्ट की विधिवत समीक्षा के बाद ही बर्खास्तगी का अंतिम आदेश जारी किया।
हालांकि राज्य सरकार ने जांच के विस्तृत निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो लागू कानूनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
असम सरकार की जवाबदेही नीति का हिस्सा
इस बर्खास्तगी को असम सरकार की उस व्यापक नीति के अंतर्गत देखा जा रहा है, जिसके तहत राज्य के प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में सरकार ने कथित भ्रष्टाचार, कर्तव्य में लापरवाही और सेवा मानदंडों के उल्लंघन से जुड़े कई मामलों में अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
यह ऐसे समय में आया है जब असम में प्रशासनिक सुधार और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर राज्य सरकार का रुख पहले से अधिक कठोर होता दिख रहा है।
आगे की कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त कानूनी या प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल कार्मिक विभाग ने बर्खास्तगी आदेश को अंतिम रूप दे दिया है।