28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हिमाचल प्रदेश में छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में तीन कॉलेज शिक्षकों की बर्खास्तगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हिमाचल प्रदेश में छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में तीन कॉलेज शिक्षकों की बर्खास्तगी

सारांश

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग ने छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में तीन कॉलेज शिक्षकों को बर्खास्त किया है। यह कार्रवाई छात्राओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है, जिसे शिक्षा सचिव ने पुष्टि की है।

मुख्य बातें

तीन कॉलेज शिक्षकों को यौन उत्पीड़न के आरोप में बर्खास्त किया गया।
शिक्षा विभाग ने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
जांच में सभी आरोप सिद्ध हुए।
ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
यह कदम शिक्षा प्रणाली में विश्वास को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

शिमला, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में तीन कॉलेज शिक्षकों को बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। विभागीय जांच में सभी शिक्षकों को दोषी पाया गया। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने इस संबंध में आदेश जारी किया, जिसे अधिकारियों ने पुष्टि की।

बर्खास्त किए गए शिक्षकों में वीरेंद्र शर्मा, अनिल कुमार और पवन कुमार शामिल हैं। वीरेंद्र शर्मा गणित के सहायक प्राध्यापक थे, अनिल कुमार रसायन विज्ञान के सहायक प्राध्यापक थे और सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर में पढ़ाते थे। वहीं, पवन कुमार नृत्य-कथक के प्राध्यापक थे और शिमला के जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय में कार्यरत थे।

शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया है कि इन तीनों शिक्षकों पर “गंभीर नैतिक पतन और घोर दुराचार” के आरोप पूरी तरह से सिद्ध हो चुके हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिक्षक और छात्रा का संबंध आपसी विश्वास और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल पर आधारित होता है। ऐसे कृत्य न केवल इस विश्वास को तोड़ते हैं, बल्कि पूरे संस्थान की अनुशासन व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाते हैं और शिक्षा प्रणाली में लोगों का भरोसा कम करते हैं।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, वीरेंद्र शर्मा पर 1 दिसंबर 2021 को मामला दर्ज किया गया था। उस समय वे राजीव गांधी राजकीय डिग्री कॉलेज, चौड़ा मैदान में तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने बीएससी द्वितीय वर्ष की एक छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने छात्रा से व्यक्तिगत रिश्ते बढ़ाने की कोशिश की और उसे अपने घर बुलाकर जबरन शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया। छात्रा ने विरोध किया और किसी तरह खुद को बचाकर बाहर निकल आई।

अनिल कुमार पर 14 नवंबर 2024 को आरोप लगा था। वे उस समय सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय, नादौन में कार्यरत थे। रसायन विज्ञान की प्रायोगिक कक्षा के दौरान उन्होंने बीएससी प्रथम वर्ष की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की। जांच में यह पाया गया कि उन्होंने बार-बार अनुचित तरीके से छात्रा को छुआ। बाद में आरोपों से बचने के लिए वे फरार भी हो गए थे।

पवन कुमार के खिलाफ सबसे गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए छात्राओं को नृत्य अभ्यास के लिए देर रात अपने घर बुलाया। कुछ छात्राओं को रात भर वहीं रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा। 22 जनवरी 2024 की रात को उन्होंने एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। इस मामले को दबाने की कोशिश भी की गई। जांच में यह भी सामने आया कि उनकी पत्नी ने शिकायत करने वाली छात्रा के परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।

अतिरिक्त आरोपों में, पवन कुमार पर बिना अनुमति छात्रों को अंकों में मनमानी करने और उपस्थिति रिकॉर्ड ठीक से न रखने के भी आरोप सिद्ध हुए हैं।

विभाग के अनुसार, तीनों शिक्षकों ने जांच में जो सफाई दी, वह साक्ष्यों के सामने नहीं टिक सकी। इसलिए, शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया कि ऐसे शिक्षकों को कॉलेज में रखना छात्राओं की सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल के लिए ठीक नहीं है।

तीनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कड़े कदम से शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कॉलेजों में छात्राओं के साथ किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को भी उजागर करती है। जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्यों बर्खास्त किए गए शिक्षकों पर आरोप लगे?
इन शिक्षकों पर छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप थे, जो विभागीय जांच में सिद्ध हुए।
बर्खास्तगी का आदेश किसने जारी किया?
बर्खास्तगी का आदेश शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने जारी किया।
क्या यह पहला मामला है?
नहीं, यह मामला पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन यह स्थिति के गंभीर होने को दर्शाता है।
क्या छात्रों की सुरक्षा के लिए और भी कदम उठाए जाएंगे?
जी हां, शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और भविष्य में छात्रों की सुरक्षा के लिए और भी कदम उठाने की बात कही है।
क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है?
बिल्कुल, समाज में विश्वास बहाल करने के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले