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क्या हिमाचल प्रदेश के सीएम ने महिला कॉलेज छात्रा के लिए न्याय का आश्वासन दिया?

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क्या हिमाचल प्रदेश के सीएम ने महिला कॉलेज छात्रा के लिए न्याय का आश्वासन दिया?

सारांश

हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक छात्रा के निधन के बाद उसके परिवार को न्याय का आश्वासन दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवार से बात की और निष्पक्ष जांच का वादा किया। रैगिंग संबंधी मामले में कार्रवाई की गई है। यह मामला शिक्षा और सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।

मुख्य बातें

सीएम ने न्याय का आश्वासन दिया।
रैगिंग के खिलाफ कार्रवाई की गई।
शोक संतप्त परिवार को समर्थन।
निष्पक्ष जांच का वादा।

शिमला, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को धर्मशाला के सरकारी डिग्री कॉलेज की एक छात्रा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए छात्रा के माता-पिता से फोन पर संपर्क किया और अपनी गहरी संवेदना और समर्थन व्यक्त किया।

उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

उन्हें बताया गया कि एसोसिएट प्रोफेसर अशोक कुमार और तीन अन्य छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक उपाय के रूप में, एसोसिएट प्रोफेसर को जांच के परिणाम आने और अनुशासनात्मक कार्रवाई होने तक निलंबित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार पारदर्शी, गहन और समयबद्ध जांच के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार परिवार के साथ पूरी तरह से खड़ी है और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी दोषियों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाए।

एक दिन पहले, सरकार ने विभागीय जांच के नतीजे आने तक एसोसिएट प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया था।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की धारा 3 के तहत अशोक कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

आदेशों में कहा गया है कि निलंबन की अवधि के दौरान अशोक कुमार का मुख्यालय शिमला स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय में रहेगा और वे उच्च अधिकारियों से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह जरूरी है कि हम इस घटना को गंभीरता से लें। शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा और छात्रों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। इस मामले में जो भी दोषी हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या रैगिंग के खिलाफ कोई कानून है?
हां, हिमाचल प्रदेश में रैगिंग निषेध अधिनियम, 2009 के तहत रैगिंग एक गंभीर अपराध है।
सीएम ने परिवार को क्या आश्वासन दिया?
सीएम ने परिवार को हर संभव मदद और न्याय का आश्वासन दिया है।
क्या एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है?
जी हां, एसोसिएट प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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