असम में गो-तस्करी पर बड़ी कार्रवाई: जनवरी से 425 FIR, 856 गिरफ्तार, 4,355 मवेशी बरामद
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 21 मई 2026 को जानकारी दी कि राज्य में 1 जनवरी से 19 मई 2026 के बीच गो-चोरी और पशु तस्करी के विरुद्ध चलाए गए अभियान में 425 मामले दर्ज किए गए हैं और 856 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, इस कार्रवाई में 4,355 मवेशी बरामद हुए और 2,980 किलोग्राम से अधिक बीफ जब्त की गई।
अभियान का विस्तार और आँकड़े
मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि असम सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल गो-चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध बीफ कारोबार और अंतर-राज्यीय पशु तस्करी नेटवर्क को भी निशाना बना रहा है।
गौरतलब है कि 4,355 मवेशियों की बरामदगी और 2,980 किलोग्राम से अधिक बीफ की जब्ती यह दर्शाती है कि तस्करी का दायरा व्यापक था। प्रति माह औसतन लगभग 85 मामले और 170 से अधिक गिरफ्तारियाँ दर्ज होना इस अभियान की निरंतरता को रेखांकित करता है।
त्योहारों से पहले विशेष सतर्कता
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आगामी त्योहारों को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पशु तस्करी के मामले त्योहारी सीजन के आसपास बढ़ने की प्रवृत्ति देखी जाती रही है।
असम पुलिस ने सीमावर्ती जिलों — विशेष रूप से बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल से लगती सीमाओं पर — निगरानी बढ़ाई है, जो पशु तस्करी के प्रमुख मार्ग माने जाते हैं।
यूसीसी बिल की तैयारी से जुड़ा संदर्भ
इस अभियान की घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। उन्होंने कहा, 'इस विधानसभा सत्र में हम समान नागरिक संहिता बिल लाएंगे और हम इसे पारित करेंगे। यह हमारी उन पुरानी प्रतिबद्धताओं में से एक थी कि अगर मैं मुख्यमंत्री बना तो हम पहले ही सत्र में यूसीसी पारित करेंगे।' यह बयान असम को उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संकेत है।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों के विरुद्ध असम पशु संरक्षण अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे चलाए जा रहे हैं। सरमा सरकार ने संकेत दिया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और तस्करी नेटवर्क से जुड़े बड़े नामों तक पहुँचने की कोशिश की जाएगी।