13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर असम कांग्रेस का सवाल: गलवान, ब्रह्मपुत्र और होर्मुज स्ट्रेट पर क्या हुई चर्चा?

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर असम कांग्रेस का सवाल: गलवान, ब्रह्मपुत्र और होर्मुज स्ट्रेट पर क्या हुई चर्चा?

सारांश

असम कांग्रेस नेता अमीनुल इस्लाम ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे — गलवान घाटी, ब्रह्मपुत्र के कथित घटते जलस्तर और होर्मुज स्ट्रेट पर क्या कोई ठोस बात हुई? विपक्ष का आरोप है कि भारत की विदेश नीति 'तस्वीरों तक सिमट कर रह गई है।'

मुख्य बातें

असम कांग्रेस नेता अमीनुल इस्लाम ने 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नतीजों पर सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा कि गलवान घाटी संघर्ष (2020) और भारत-चीन संबंधों पर शिखर सम्मेलन में क्या सार्थक चर्चा हुई।
इस्लाम ने दावा किया कि 2022 के बाद से ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर 40 प्रतिशत कम हो गया है और इस मुद्दे को ब्रिक्स में उठाया जाना चाहिए था।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की उपस्थिति का हवाला देते हुए होर्मुज स्ट्रेट पर भारत-ईरान वार्ता की जानकारी माँगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति कमज़ोर हुई है और सरकार को ब्रिक्स के ठोस परिणाम सार्वजनिक करने चाहिए।

असम कांग्रेस नेता अमीनुल इस्लाम ने 13 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारत की मेजबानी में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नतीजों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण की माँग की कि इस उच्चस्तरीय राजनयिक मंच पर भारत के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर क्या कोई ठोस प्रगति हुई।

मुख्य आरोप और सवाल

इस्लाम ने तीन प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरा — भारत-चीन संबंध, 2020 का गलवान घाटी संघर्ष, और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम। उन्होंने आरोप लगाया कि शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाएँ केवल व्यापक घोषणाओं तक सीमित रहीं और भारत की सुरक्षा व अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करने वाले विशिष्ट मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने सवाल किया, 'क्या भारत-चीन संबंधों में कोई बेहतर स्थिति बनी है? क्या गलवान की स्थिति पर कोई चर्चा हुई या इस बात पर चर्चा हुई कि 2022 के बाद से ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर 40 प्रतिशत तक कम हो गया है?' — यह दावा उन्होंने चीन से जुड़ी व्यापक रणनीतिक चुनौतियों के संदर्भ में किया।

होर्मुज स्ट्रेट और ईरान का संदर्भ

कांग्रेस नेता ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की शिखर सम्मेलन में भागीदारी का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि क्या भारत ने तेहरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर कोई सार्थक बातचीत की। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का भारत के आयात-निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है।

विदेश नीति पर हमला

इस्लाम ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध कमज़ोर हुए हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध इस समय मूल रूप से बहुत खराब हैं। विदेश नीति लगातार कमज़ोर हो रही है।' केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि

यह टिप्पणी भारत की मेजबानी में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ठीक बाद आई है, जिसमें विस्तारित समूह के नेताओं ने मौजूदा जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा पर सामान्यीकरण की प्रक्रिया अभी भी जारी बताई जा रही है और ब्रह्मपुत्र पर चीन की बाँध परियोजनाओं को लेकर भारत की चिंताएँ पुरानी हैं।

आगे क्या

इस्लाम ने केंद्र सरकार से माँग की कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के परिणामों को लेकर संसद या जनता के समक्ष अधिक पारदर्शिता दिखाई जाए। उनके इन बयानों से विपक्षी दलों के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर बहस तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वे एक वास्तविक नीतिगत रिक्तता की ओर इशारा करते हैं — बहुपक्षीय मंचों पर भारत के द्विपक्षीय एजेंडे की पारदर्शिता। ब्रह्मपुत्र जलस्तर का 40% वाला दावा सत्यापित नहीं है और इसे सावधानी से लिया जाना चाहिए, लेकिन ऊपरी धारा की चीनी बाँध परियोजनाओं पर भारत की चिंताएँ दशकों पुरानी और दर्ज हैं। असली सवाल यह है कि क्या ब्रिक्स जैसे मंच — जहाँ चीन भी सदस्य है — भारत के लिए इन संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों को उठाने का उपयुक्त मंच हैं, या यह विपक्ष की ओर से राजनयिक प्रक्रिया की सीमाओं को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर किया गया हमला है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमीनुल इस्लाम ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर क्या सवाल उठाए?
असम कांग्रेस नेता अमीनुल इस्लाम ने 13 सितंबर 2026 को पूछा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के रणनीतिक हितों — गलवान घाटी, ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर और होर्मुज स्ट्रेट — पर कोई ठोस चर्चा हुई या नहीं। उन्होंने केंद्र सरकार से सम्मेलन के परिणामों को सार्वजनिक करने की माँग की।
ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर में 40% कमी का दावा क्या है?
इस्लाम ने दावा किया कि 2022 के बाद से ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर 40 प्रतिशत तक कम हो गया है और इसे उन्होंने चीन से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों से जोड़ा। यह दावा उनकी ओर से किया गया है और इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट से भारत का क्या संबंध है और ब्रिक्स में इसका क्यों ज़िक्र हुआ?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, और भारत के ऊर्जा आयात पर इसका सीधा असर पड़ता है। इस्लाम ने सवाल उठाया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की ब्रिक्स में उपस्थिति के बावजूद भारत ने इस विषय पर कोई सार्थक बातचीत की या नहीं।
क्या केंद्र सरकार ने इस्लाम के आरोपों पर कोई जवाब दिया?
रिपोर्टों के अनुसार, 13 सितंबर 2026 तक केंद्र सरकार की ओर से अमीनुल इस्लाम के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में किन विषयों पर चर्चा हुई?
भारत की मेजबानी में हुए इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विस्तारित समूह के नेताओं ने वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की। हालाँकि, विपक्ष का आरोप है कि चर्चाएँ व्यापक घोषणाओं तक सीमित रहीं और भारत-विशिष्ट द्विपक्षीय मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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