असम बिजली-सरप्लस राज्य बनने की राह पर: CM हिमंत बिस्वा सरमा का ₹14,202 करोड़ का एनर्जी विज़न
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 22 मई 2026 को घोषणा की कि असम धीरे-धीरे बिजली-सरप्लस राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने 2035 तक ₹14,202 करोड़ के ऊर्जा अवसंरचना लक्ष्य के साथ फिलहाल ₹6,235 करोड़ की चार बड़ी परियोजनाएं सक्रिय रूप से क्रियान्वित की जा रही हैं। यह कदम पूर्वोत्तर भारत में असम को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री का एक्स पोस्ट और ऊर्जा विज़न
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'असम धीरे-धीरे बिजली के मामले में आत्मनिर्भर राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है। ₹14,202 करोड़ के एनर्जी विज़न और ₹6,235 करोड़ की परियोजनाओं के साथ, जो पहले से ही चल रही हैं, हम विकास को बढ़ावा देने और अपने लोगों को भरोसेमंद बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए अपने बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहे हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में तेज़ शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के कारण बिजली की माँग लगातार बढ़ रही है।
मुख्य परियोजनाएं और अवसंरचना विस्तार
अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क को उन्नत करने और वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हाइड्रोपावर और थर्मल पावर परियोजनाओं को अपग्रेड किया जा रहा है, साथ ही सबस्टेशनों, ट्रांसमिशन कॉरिडोर और ग्रामीण विद्युतीकरण अवसंरचना पर भी काम जारी है। गौरतलब है कि ये परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में हैं और आने वाले वर्षों में राज्य की उत्पादन एवं ट्रांसमिशन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर
राज्य सरकार अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी रोडमैप के तहत सोलर पावर सहित अन्य नवीकरणीय ऊर्जा पहलों को भी प्राथमिकता दे रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस रणनीति का उद्देश्य पूरे राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर औद्योगिक विकास, अवसंरचना विस्तार और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
आम जनता और उद्योग पर असर
बिजली आत्मनिर्भरता की दिशा में यह प्रयास पूर्वोत्तर भारत में निवेश के लिए असम की प्राथमिकता को और मज़बूत करेगा। हाल के वर्षों में तेज़ शहरीकरण, उद्योगों के विस्तार और घरों में बिजली कनेक्शन की बढ़ती दर के कारण राज्य में बिजली की माँग में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो असम न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि पड़ोसी राज्यों को बिजली निर्यात करने की स्थिति में भी आ सकता है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री सरमा ने असम की व्यापक आर्थिक विकास योजनाओं और भविष्य के औद्योगिक विस्तार के लिए बिजली क्षेत्र को सुदृढ़ करने के महत्व पर बार-बार ज़ोर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, 2035 तक निर्धारित ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने के लिए चरणबद्ध तरीके से निवेश जारी रहेगा और परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी।