असम में शहरी अपशिष्ट निपटान 65% पूरा: हिमंता बिस्वा सरमा का स्वच्छ भारत मिशन पर बड़ा दावा

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असम में शहरी अपशिष्ट निपटान 65% पूरा: हिमंता बिस्वा सरमा का स्वच्छ भारत मिशन पर बड़ा दावा

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि राज्य ने शहरी क्षेत्रों में 65% पुराने अपशिष्ट का निपटान कर लिया है और 54 में से 23 उपचार संयंत्र चालू हैं। यह स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूर्वोत्तर भारत की एक उल्लेखनीय प्रगति है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 19 मई 2026 को घोषणा की कि शहरी क्षेत्रों में 65% पुराने अपशिष्ट निपटान का कार्य पूरा हो चुका है।
राज्य में 54 पुराने अपशिष्ट उपचार संयंत्रों की पहचान की गई है, जिनमें से 23 पहले से चालू हैं।
यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत जैव-खनन और अपशिष्ट प्रसंस्करण तकनीकों पर आधारित है।
सरकार का लक्ष्य नगर निगम क्षेत्रों में 100 प्रतिशत अपशिष्ट निपटान सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के आह्वान से प्रेरित बताया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 19 मई 2026 को घोषणा की कि राज्य ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में 65 प्रतिशत पुराने अपशिष्ट निपटान का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब 100 प्रतिशत निपटान की दिशा में तेज़ी से काम जारी है। उन्होंने इसे अपनी सरकार की उन उपलब्धियों में गिनाया जिन पर सार्वजनिक चर्चा अपेक्षाकृत कम होती है।

मुख्यमंत्री का एक्स पर बयान

सामाजिक माध्यम मंच एक्स पर साझा की गई एक पोस्ट में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के आह्वान से प्रेरित होकर, हमने 65 प्रतिशत अपशिष्ट निपटान का कार्य पूरा कर लिया है और 100 प्रतिशत निपटान के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं।' उन्होंने इस पहल को केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की भावना से जोड़ते हुए इसे एक सतत शहरी विकास की दिशा में ठोस कदम बताया।

मुख्य घटनाक्रम: संयंत्र और बुनियादी ढाँचा

मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, असम के शहरी केंद्रों में 54 पुराने अपशिष्ट उपचार संयंत्रों की पहचान की गई है। इनमें से 23 संयंत्र पहले से ही चालू अवस्था में हैं और सक्रिय रूप से सेवा दे रहे हैं। शेष संयंत्रों को चरणबद्ध तरीके से परिचालन में लाने की योजना है।

अधिकारियों के अनुसार, इस पुराने अपशिष्ट निपटान पहल का मुख्य उद्देश्य नगर निगम क्षेत्रों में वर्षों से जमा हुए कचरे के ढेरों को जैव-खनन और अपशिष्ट प्रसंस्करण तकनीकों के ज़रिये वैज्ञानिक रूप से साफ करना और उन्हें पुन: प्रयोज्य अथवा पर्यावरण के अनुकूल सामग्री में बदलना है।

आम जनता पर असर

यह पहल गुवाहाटी सहित असम के प्रमुख शहरों और कस्बों में नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शहरी स्वच्छता, अपशिष्ट पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान प्रणालियों में सुधार से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। गौरतलब है कि अनुचित कचरा प्रबंधन शहरी भारत में जल-जनित बीमारियों और वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण रहा है।

असम सरकार ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि उचित अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता सतत शहरी विकास और जन स्वास्थ्य के अनिवार्य घटक हैं।

व्यापक संदर्भ

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के दूसरे चरण के तहत राज्यों को पुराने कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए प्रोत्साहित कर रही है। असम की यह प्रगति पूर्वोत्तर भारत के उन राज्यों में उल्लेखनीय मानी जा रही है जहाँ शहरी बुनियादी ढाँचे की चुनौतियाँ तुलनात्मक रूप से अधिक रही हैं।

क्या होगा आगे

राज्य सरकार का लक्ष्य शेष 31 संयंत्रों को भी जल्द से जल्द चालू करना और शहरी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत अपशिष्ट निपटान सुनिश्चित करना है। नागरिक बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने के व्यापक अभियान के तहत अपशिष्ट पृथक्करण और प्रसंस्करण को और अधिक व्यवस्थित रूप देने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 54 में से शेष 31 संयंत्र कब तक चालू होंगे और उनकी प्रसंस्करण क्षमता वास्तविक कचरे की मात्रा के अनुपात में है या नहीं। पूर्वोत्तर भारत में शहरीकरण की रफ़्तार तेज़ है और नया कचरा पुराने निपटान की गति से अधिक तेज़ी से जमा होता है — यह विरोधाभास नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घोषित आँकड़ों की स्वतंत्र सत्यापन प्रणाली की अनुपस्थिति एक पुरानी समस्या है, जो इस प्रगति रिपोर्ट को भी उसी संदेह के घेरे में रखती है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में शहरी अपशिष्ट निपटान की वर्तमान स्थिति क्या है?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, असम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी क्षेत्रों में 65 प्रतिशत पुराने अपशिष्ट का निपटान कर लिया है। राज्य अब 100 प्रतिशत निपटान के लक्ष्य की ओर काम कर रहा है।
असम में कितने अपशिष्ट उपचार संयंत्र चालू हैं?
राज्य में कुल 54 पुराने अपशिष्ट उपचार संयंत्रों की पहचान की गई है, जिनमें से 23 संयंत्र पहले से चालू अवस्था में हैं और सक्रिय रूप से सेवा दे रहे हैं।
असम की पुराने अपशिष्ट निपटान पहल में कौन-सी तकनीकें इस्तेमाल हो रही हैं?
इस पहल में जैव-खनन और अपशिष्ट प्रसंस्करण तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनके ज़रिये नगर निगम क्षेत्रों में वर्षों से जमा कचरे को वैज्ञानिक तरीके से साफ कर पुन: प्रयोज्य या पर्यावरण के अनुकूल सामग्री में बदला जा रहा है।
यह पहल किस केंद्रीय योजना से जुड़ी है?
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री सरमा ने इसे केंद्र के स्वच्छ भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित बताया है।
इस अपशिष्ट प्रबंधन अभियान से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान से शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, जल-जनित बीमारियों और वायु प्रदूषण में कमी आएगी। इसके साथ ही शहरी पर्यावरण और नागरिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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