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दिमासा भाषा संरक्षण के लिए असम सरकार ने गठित किया 2 मंत्रियों का पैनल, 2023 समझौते की अनुपालना

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दिमासा भाषा संरक्षण के लिए असम सरकार ने गठित किया 2 मंत्रियों का पैनल, 2023 समझौते की अनुपालना

सारांश

असम सरकार ने 2023 के DNLA शांति समझौते की धारा 5.1 के तहत दिमासा भाषा के संरक्षण और विकास के लिए शिक्षा मंत्री रानोज पेगू और पहाड़ी क्षेत्र मंत्री कृष्णेंदु पॉल का दो सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समूह गठित किया है, जो समिति की रिपोर्ट की समीक्षा कर सरकार को सिफारिशें देगा।

मुख्य बातें

असम सरकार ने दिमासा भाषा संरक्षण के लिए दो सदस्यीय मंत्रिस्तरीय पैनल गठित किया।
पैनल में शिक्षा मंत्री रानोज पेगू और पहाड़ी क्षेत्र मंत्री कृष्णेंदु पॉल शामिल हैं।
यह पैनल 2023 में असम सरकार, DNLA और DPSC के बीच हुए शांति समझौते की धारा 5.1 के तहत बनाया गया है।
मंत्रिस्तरीय समूह दिमासा भाषा समिति की रिपोर्ट की समीक्षा कर राज्य सरकार को अनुशंसाएँ सौंपेगा।
पहाड़ी क्षेत्र विभाग पैनल को आवश्यक सचिवीय सहायता प्रदान करेगा।

असम सरकार ने दिमासा भाषा के संरक्षण, प्रचार और विकास से जुड़ी सिफारिशों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समूह का गठन किया है। यह निर्णय असम सरकार, दिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी (DNLA) और दिमासा पीपल्स सुप्रीम काउंसिल (DPSC) के बीच 2023 में हुए शांति समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के क्रम में लिया गया है। 24 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक आदेश इस समझौते की धारा 5.1 के अंतर्गत आता है।

मंत्रिस्तरीय पैनल की संरचना

इस दो सदस्यीय समूह में असम के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू और पहाड़ी क्षेत्र मंत्री कृष्णेंदु पॉल शामिल हैं। दोनों मंत्रियों को दिमासा भाषा से जुड़े मुद्दों पर पहले से गठित समिति की रिपोर्ट का गहन अध्ययन करने और भाषा के संरक्षण, प्रचार एवं विकास के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जांच करने का दायित्व सौंपा गया है।

आधिकारिक आदेश के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्र विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह समिति की सिफारिशों पर विचार-विमर्श और जांच के दौरान इस मंत्रिस्तरीय समूह को आवश्यक सचिवीय सहायता उपलब्ध कराए।

2023 के शांति समझौते की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि DNLA एक पूर्व सशस्त्र संगठन है जिसने असम के पहाड़ी जिलों में दिमासा समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था। 2023 में केंद्र और राज्य सरकार के साथ हुए इस समझौते में भाषाई, सांस्कृतिक और विकासात्मक मुद्दों पर कई वादे किए गए थे, जिनमें दिमासा भाषा के संरक्षण और प्रोत्साहन को विशेष महत्त्व दिया गया था। यह पैनल उन्हीं वादों को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम है।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में स्थानीय जनजातीय भाषाओं के संरक्षण की माँग तेज़ हो रही है और इन भाषाओं को शिक्षा व प्रशासन में समुचित स्थान दिलाने की कोशिशें की जा रही हैं।

दिमासा भाषा का महत्त्व

दिमासा भाषा मुख्य रूप से असम के दीमा हसाओ और आसपास के पहाड़ी जिलों में निवास करने वाले दिमासा समुदाय द्वारा बोली जाती है। यह भाषा इस समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है, लेकिन डिजिटल युग और आधुनिक शिक्षा की प्रमुखता के कारण इसे संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। भाषाई पहचान को मज़बूत करना शांति प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग माना जा रहा है।

आगे की प्रक्रिया

मंत्रिस्तरीय समूह समिति की रिपोर्ट में दर्ज सिफारिशों की विस्तृत समीक्षा करने के बाद राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएँ सौंपेगा। इसके आधार पर राज्य सरकार दिमासा भाषा के संरक्षण एवं विकास से जुड़े नीतिगत फैसले लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पैनल की सिफारिशें भविष्य में शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर सीधा असर डाल सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे 2023 के समझौते के तीन साल बाद की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए — जो यह संकेत देता है कि शांति समझौतों में भाषाई वादों पर अमल अक्सर धीमा रहता है। असली सवाल यह है कि पैनल की सिफारिशें कितने समय में नीति में तब्दील होंगी और क्या इन्हें स्कूली पाठ्यक्रम या सरकारी रोज़गार में व्यावहारिक रूप दिया जाएगा। पूर्वोत्तर के अन्य भाषा संरक्षण प्रयासों का अनुभव बताता है कि बिना बजटीय प्रतिबद्धता और समयसीमा के, समितियों की रिपोर्टें अलमारियों में बंद रह जाती हैं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम सरकार ने दिमासा भाषा के लिए कौन-सा पैनल गठित किया है?
असम सरकार ने दिमासा भाषा के संरक्षण, प्रचार और विकास से जुड़ी सिफारिशों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समूह गठित किया है, जिसमें शिक्षा मंत्री रानोज पेगू और पहाड़ी क्षेत्र मंत्री कृष्णेंदु पॉल शामिल हैं। यह पैनल 2023 के DNLA शांति समझौते की धारा 5.1 के तहत बनाया गया है।
2023 का DNLA शांति समझौता क्या था?
2023 में असम सरकार, दिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी (DNLA) और दिमासा पीपल्स सुप्रीम काउंसिल (DPSC) के बीच एक शांति समझौता हुआ था, जिसमें दिमासा समुदाय के भाषाई, सांस्कृतिक और विकासात्मक मुद्दों पर कार्रवाई का वादा किया गया था। वर्तमान मंत्रिस्तरीय पैनल उन्हीं वादों को पूरा करने की दिशा में एक कदम है।
दिमासा भाषा कहाँ बोली जाती है?
दिमासा भाषा मुख्य रूप से असम के दीमा हसाओ और आसपास के पहाड़ी जिलों में दिमासा समुदाय द्वारा बोली जाती है। यह इस समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
मंत्रिस्तरीय पैनल का अगला कदम क्या होगा?
यह पैनल दिमासा भाषा समिति की रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों की विस्तृत समीक्षा करेगा और फिर राज्य सरकार को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए अपनी अनुशंसाएँ सौंपेगा। इसके बाद सरकार नीतिगत फैसले लेगी।
इस पैनल के गठन से दिमासा समुदाय को क्या फायदा होगा?
इस पैनल की सिफारिशों से दिमासा भाषा को शिक्षा, पाठ्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में समुचित स्थान मिलने की उम्मीद है। यह भाषाई पहचान को संस्थागत मान्यता दिलाने और शांति प्रक्रिया को मज़बूत करने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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