29 अक्टूबर 2026
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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का स्पष्टीकरण: मंत्री दैमारी की उल्फा तारीफ शांति समझौते वाले गुट के लिए थी

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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का स्पष्टीकरण: मंत्री दैमारी की उल्फा तारीफ शांति समझौते वाले गुट के लिए थी

सारांश

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने मंत्री बिस्वजीत दैमारी की उल्फा तारीफ को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी — कहा, यह 2023 के शांति समझौते वाले गुट के लिए था, प्रतिबंधित उल्फा-आई के लिए नहीं। दोनों गुटों के बीच यह राजनीतिक अंतर असम की शांति प्रक्रिया की नाजुक स्थिति को दर्शाता है।

मुख्य बातें

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 29 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि मंत्री बिस्वजीत दैमारी की उल्फा तारीफ शांति समझौते वाले गुट के संदर्भ में थी।
मंत्री दैमारी ने तिनसुकिया में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर पाँच दशकों में असम की रक्षा के लिए उल्फा की सराहना की थी।
29 दिसंबर 2023 को नई दिल्ली में केंद्र, असम सरकार और उल्फा के बातचीत समर्थक गुट के बीच त्रिपक्षीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
शांति समझौते वाले गुट के नेता अनूप चेतिया हैं; परेश बरुआ के नेतृत्व वाला उल्फा-आई अभी भी प्रतिबंधित है।
सरमा के अनुसार, दैमारी के बयान को उल्फा-आई के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य के मंत्री बिस्वजीत दैमारी द्वारा हाल ही में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) की की गई तारीफ उस गुट के संदर्भ में थी जो बातचीत का समर्थक है और जिसने केंद्र सरकार व असम सरकार के साथ शांति समझौता संपन्न किया है — न कि परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) से। गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सरमा ने इस अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि शांति समझौता करने वाले गुट को प्रतिबंधित संगठन नहीं माना जाता, जबकि उल्फा-आई अभी भी प्रतिबंधित है।

विवाद की पृष्ठभूमि

मंत्री बिस्वजीत दैमारी ने कथित तौर पर तिनसुकिया जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पिछले पाँच दशकों में असम को बाहरी ताकतों से बचाने के लिए उल्फा की प्रशंसा की थी। उन्होंने संगठन के नेतृत्व में मोरन और मटक समुदायों की भूमिका का भी उल्लेख किया। यह बयान असम के उस दशकों पुराने उग्रवादी इतिहास को देखते हुए तत्काल विवाद का विषय बन गया, जो भारी हिंसा, सुरक्षा अभियानों और जान-माल के भारी नुकसान से जुड़ा रहा है।

गौरतलब है कि उल्फा की विरासत को लेकर असम में राजनीतिक संवेदनशीलता बनी रहती है, और किसी भी सरकारी प्रतिनिधि की इस संगठन के प्रति सहानुभूतिपूर्ण टिप्पणी स्वाभाविक रूप से जाँच के दायरे में आती है।

मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण

सरमा ने स्पष्ट किया कि दैमारी ने विशेष रूप से अनूप चेतिया और अन्य नेताओं से जुड़े उस गुट का उल्लेख किया था जो शांति प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस गुट के साथ शांति समझौता पहले ही हो चुका है, इसलिए इसे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन की श्रेणी में नहीं रखा जाता। मुख्यमंत्री के अनुसार, दैमारी के बयानों को उल्फा-आई के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सरमा ने जोर देकर कहा कि शांति समझौते में शामिल गुट और परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा-आई के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है — क्योंकि उल्फा-आई ने किसी भी शांति प्रक्रिया में भाग नहीं लिया है और अब भी प्रतिबंधित है।

29 दिसंबर 2023 का त्रिपक्षीय समझौता

29 दिसंबर 2023 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, असम सरकार और उल्फा के बातचीत समर्थक गुट के प्रतिनिधियों के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत, गुट ने हिंसा का मार्ग छोड़ने, हथियार एवं गोला-बारूद सौंपने, सशस्त्र संगठन भंग करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का वचन दिया था।

यह ऐसे समय में आया था जब दशकों से चली आ रही उल्फा की सशस्त्र गतिविधियों के कारण असम में सैकड़ों लोगों की जानें गई थीं और राज्य की सामाजिक-आर्थिक प्रगति पर गहरा असर पड़ा था। परेश बरुआ के नेतृत्व वाला उल्फा-आई इस ऐतिहासिक समझौते से बाहर रहा और उसने अपना अलग रास्ता अपनाए रखा।

राजनीतिक निहितार्थ और आगे की राह

यह स्पष्टीकरण असम की राजनीति में एक नाजुक पहलू को उजागर करता है — जहाँ सरकार शांति समझौते की उपलब्धियों को रेखांकित करने और प्रतिबंधित संगठनों के प्रति कठोर रुख बनाए रखने के बीच संतुलन साध रही है। दैमारी के बयान ने राज्य के उग्रवाद के इतिहास और उसकी राजनीतिक विरासत पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि असम में शांति प्रक्रिया की सफलता के लिए यह ज़रूरी है कि सरकारी प्रतिनिधि सार्वजनिक मंचों पर इन दोनों गुटों के बीच का अंतर स्पष्ट रखें, ताकि शांति समझौते की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे। सरमा का यह स्पष्टीकरण उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े राजनीतिक असंतुलन को उजागर करता है — शांति प्रक्रिया में शामिल गुट को 'सम्माननीय' बताना और उल्फा-आई को 'प्रतिबंधित' कहना, यह रेखा सार्वजनिक मंचों पर खींचना आसान नहीं है। दैमारी जैसे वरिष्ठ मंत्री का इस विषय पर सतर्क भाषा न अपनाना सरकार की संचार रणनीति पर सवाल उठाता है। असम में उल्फा की विरासत अभी भी पीड़ितों के परिजनों, सुरक्षाबलों और विस्थापित परिवारों के लिए एक खुला ज़ख्म है — ऐसे में 'तारीफ' शब्द का चयन संवेदनशीलता की कमी दर्शाता है, चाहे इरादा कुछ भी रहा हो।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री बिस्वजीत दैमारी ने उल्फा के बारे में क्या कहा था?
मंत्री बिस्वजीत दैमारी ने कथित तौर पर तिनसुकिया जिले में एक कार्यक्रम के दौरान पिछले पाँच दशकों में असम को बाहरी ताकतों से बचाने के लिए उल्फा की सराहना की थी। उन्होंने संगठन के नेतृत्व में मोरन और मटक समुदायों की भूमिका का भी उल्लेख किया था।
असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
सरमा ने स्पष्ट किया कि दैमारी की टिप्पणी उल्फा के उस बातचीत समर्थक गुट के लिए थी, जिसने 29 दिसंबर 2023 को सरकार के साथ शांति समझौता किया था। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी प्रतिबंधित उल्फा-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) के समर्थन में नहीं थी।
उल्फा के शांति समझौते वाले गुट और उल्फा-आई में क्या अंतर है?
उल्फा का बातचीत समर्थक गुट अनूप चेतिया के नेतृत्व में 29 दिसंबर 2023 को त्रिपक्षीय शांति समझौते में शामिल हो गया और उसने हिंसा छोड़ने, हथियार सौंपने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का वचन दिया। वहीं, परेश बरुआ के नेतृत्व वाला उल्फा-आई इस समझौते से बाहर रहा और अभी भी प्रतिबंधित संगठन है।
उल्फा के साथ शांति समझौता कब और कहाँ हुआ था?
29 दिसंबर 2023 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, असम सरकार और उल्फा के बातचीत समर्थक गुट के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट) पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत गुट ने सशस्त्र संगठन भंग करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने की प्रतिबद्धता जताई।
इस विवाद का असम की राजनीति पर क्या असर है?
दैमारी के बयान ने असम में उल्फा की दशकों पुरानी विरासत और सरकार के रुख पर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सरमा का स्पष्टीकरण शांति समझौते की विश्वसनीयता बनाए रखने और प्रतिबंधित उल्फा-आई के प्रति कठोर रुख को रेखांकित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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