8 जुलाई 2026
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अयोध्या के प्राचीन कौशल्या-सुमित्रा कुंडों पर अतिक्रमण: हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में खाली कराने का आदेश दिया

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अयोध्या के प्राचीन कौशल्या-सुमित्रा कुंडों पर अतिक्रमण: हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में खाली कराने का आदेश दिया

सारांश

अयोध्या के पौराणिक कौशल्या और सुमित्रा कुंड दशकों से अतिक्रमण की चपेट में थे — प्रशासनिक शिकायतें बेनतीजा रहीं। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए एक सप्ताह में कब्जा हटाने का आदेश दिया है। यह मामला अयोध्या की धार्मिक विरासत के संरक्षण की व्यापक चुनौती को उजागर करता है।

मुख्य बातें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने अयोध्या जिला प्रशासन को एक सप्ताह में कुंडों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया।
मामला बाग बिजैसी स्थित माता कौशल्या कुंड और माता सुमित्रा कुंड से जुड़ा है।
जनहित याचिका महंत राजू दास (सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने दायर की।
कथित तौर पर लगभग चार दशकों से इन कुंडों तक का सार्वजनिक मार्ग अतिक्रमण से प्रभावित था।
दो अलग-अलग वार्डों में स्वीकृत पानी टंकियों के एक साथ निर्माण से भूमि विवाद और बढ़ा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने अयोध्या के ऐतिहासिक माता कौशल्या कुंड और माता सुमित्रा कुंड पर हुए अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन को कड़ा आदेश दिया है। न्यायालय ने एक सप्ताह के भीतर इन दोनों पौराणिक कुंडों से अतिक्रमण हटाने और उन्हें संरक्षित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत एवं हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत राजू दास द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ये दोनों कुंड अयोध्या सदर तहसील के अंतर्गत बाग बिजैसी क्षेत्र में स्थित हैं और धार्मिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। महंत राजू दास के अनुसार, कथित तौर पर लगभग चार दशकों से इन कुंडों तक पहुँचने वाला मुख्य सार्वजनिक मार्ग आबादी क्षेत्र से होकर संचालित होता रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि धीरे-धीरे भूमाफियाओं ने कुंडों की जमीन पर कब्जा कर लिया और उनकी मूल पहचान को मिटाने की कोशिश की।

गौरतलब है कि प्रशासन को पहले भी इस संदर्भ में शिकायतें दी गई थीं, लेकिन कथित तौर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद यह मामला न्यायालय तक पहुँचा।

पानी टंकी निर्माण से बढ़ा विवाद

महंत राजू दास ने बताया कि आबादी के दक्षिणी दिशा में दो पानी टंकियाँ एक साथ निर्मित की गईं, जबकि ये दोनों टंकियाँ अलग-अलग वार्डों में स्वीकृत थीं। इस निर्माण के कारण भूमि की पूर्ति के लिए कुंड तक जाने वाला सार्वजनिक मार्ग कथित तौर पर अधिग्रहीत होता चला गया। इसी के चलते आसपास की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें बढ़ती रहीं और अंततः कुंडों का अस्तित्व ही संकट में आ गया।

न्यायालय का निर्देश

जनहित याचिका की सुनवाई के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने स्पष्ट आदेश दिया कि इन कुंडों की भूमि पर जो भी अतिक्रमण हुआ है, उसे तत्काल हटाया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की पहचान और महत्व को बनाए रखने के लिए प्रशासन उन्हें सुरक्षित करे। जिला प्रशासन को इस संबंध में एक सप्ताह का समय दिया गया है।

महंत राजू दास का पक्ष

महंत राजू दास ने कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को बचाने की है। उनका कहना है कि इन कुंडों का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है और इनकी उपेक्षा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि न्यायालय के आदेश का पालन समयसीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

आगे की राह

न्यायालय के आदेश के बाद अब सभी की निगाहें अयोध्या जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह निर्धारित एक सप्ताह में किस तरह की कार्रवाई करता है। यह मामला अयोध्या में धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर व्यापक बहस को भी नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर कार्रवाई तब हुई जब मामला न्यायालय पहुँचा — यह जवाबदेही की उस खाई को दर्शाता है जो अयोध्या के विकास के बड़े आख्यान में अक्सर अनदेखी रह जाती है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में विरासत-संरक्षण की माँग तेज़ हुई है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर भूमाफियाओं के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई अभी भी न्यायालयी दबाव पर निर्भर दिखती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या के कौशल्या कुंड और सुमित्रा कुंड पर क्या विवाद है?
अयोध्या सदर तहसील के बाग बिजैसी क्षेत्र में स्थित इन दोनों पौराणिक कुंडों पर कथित तौर पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया था और इन तक पहुँचने वाला सार्वजनिक मार्ग भी अवरुद्ध हो गया था। दशकों तक प्रशासनिक शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुँचा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने अयोध्या जिला प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर इन कुंडों से अतिक्रमण हटाने और उन्हें संरक्षित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इन ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों की पहचान बनाए रखना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।
यह जनहित याचिका किसने दायर की और क्यों?
यह याचिका सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत एवं हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत राजू दास ने दायर की। उनका कहना था कि प्रशासन को पहले भी शिकायत दी गई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।
पानी टंकियों का इस विवाद से क्या संबंध है?
याचिका के अनुसार, आबादी की दक्षिणी दिशा में दो पानी टंकियाँ एक साथ बनाई गईं, जबकि वे अलग-अलग वार्डों में स्वीकृत थीं। इस निर्माण के कारण कुंड तक जाने वाला सार्वजनिक मार्ग कथित तौर पर अधिग्रहीत होने लगा, जिससे आसपास की जमीन पर कब्जे की शिकायतें और बढ़ीं।
राष्ट्र प्रेस
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