अयोध्या के कौशल्या-सुमित्रा कुंड अतिक्रमण मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में खाली कराने का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के बाग बिजैसी क्षेत्र में स्थित प्राचीन माता कौशल्या कुंड और माता सुमित्रा कुंड पर दशकों से जारी अतिक्रमण का मामला अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ तक पहुँच गया है। 22 मई 2026 को सुनवाई के बाद अदालत ने अयोध्या जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर इन धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों से अतिक्रमण हटाया जाए और उन्हें संरक्षित किया जाए।
याचिका का आधार
सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत एवं हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत राजू दास ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में यह जनहित याचिका दायर की। याचिका में अयोध्या सदर तहसील के अंतर्गत बाग बिजैसी में स्थित इन दोनों पौराणिक कुंडों के संरक्षण तथा इन तक पहुँचने वाले सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण-मुक्त रखने की माँग की गई थी। महंत राजू दास के अनुसार, इन कुंडों की भूमि पर लंबे समय से कब्जा किया जा रहा था और प्रशासन को पूर्व में शिकायत दिए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अतिक्रमण की पृष्ठभूमि
महंत राजू दास ने आरोप लगाया कि कथित भूमाफिया ने कुंडों के चारों ओर की भूमि पर कब्जा कर लिया और इन ऐतिहासिक स्थलों की मूल पहचान को मिटाने की कोशिश की। याचिका में बताया गया कि लगभग चार दशकों से इन कुंडों तक पहुँचने का मुख्य सार्वजनिक मार्ग आबादी क्षेत्र से होकर गुज़रता रहा है।
गौरतलब है कि वर्तमान में आबादी की दक्षिणी दिशा में दो पानी की टंकियाँ एक साथ निर्मित की जा रही हैं, जबकि ये दोनों टंकियाँ अलग-अलग वार्डों में स्वीकृत थीं। इस निर्माण के कारण कुंडों तक जाने वाला सार्वजनिक मार्ग प्रभावित हो रहा है और आसपास की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं। महंत दास का कहना है कि धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र घेर लिया गया और इन कुंडों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया।
हाईकोर्ट का आदेश
सुनवाई के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन कुंडों की भूमि पर जो भी अतिक्रमण है, उसे तत्काल हटाया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को इस प्रकार संरक्षित किया जाए कि उनकी पहचान और सांस्कृतिक महत्व बना रहे।
आम जनता पर असर
यह मामला केवल दो कुंडों तक सीमित नहीं है — यह अयोध्या जैसे धार्मिक नगरों में प्राचीन जलस्रोतों और पौराणिक स्थलों की सुरक्षा का व्यापक प्रश्न उठाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ये कुंड धार्मिक आस्था के केंद्र हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की माँग और तीव्र हो गई है।
आगे क्या होगा
अदालत के आदेश के अनुसार जिला प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करनी होगी। यदि प्रशासन इस समय-सीमा में कार्रवाई नहीं करता, तो मामले की अगली सुनवाई में अदालत सख्त रुख अपना सकती है। महंत राजू दास ने स्पष्ट किया है कि वे इन कुंडों के पूर्ण संरक्षण तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।