7 जुलाई 2026
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अयोध्या के कौशल्या-सुमित्रा कुंड अतिक्रमण मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में खाली कराने का आदेश दिया

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अयोध्या के कौशल्या-सुमित्रा कुंड अतिक्रमण मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में खाली कराने का आदेश दिया

सारांश

अयोध्या के पौराणिक कौशल्या कुंड और सुमित्रा कुंड पर कथित भूमाफिया के कब्जे का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचा। महंत राजू दास की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने जिला प्रशासन को एक सप्ताह में अतिक्रमण हटाने का कड़ा आदेश दिया — यह अयोध्या के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की बड़ी लड़ाई है।

मुख्य बातें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 22 मई 2026 को अयोध्या जिला प्रशासन को एक सप्ताह में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया।
मामला माता कौशल्या कुंड और माता सुमित्रा कुंड से जुड़ा है, जो बाग बिजैसी, अयोध्या सदर तहसील में स्थित हैं।
महंत राजू दास (सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी) ने जनहित याचिका दायर की; आरोप है कि कथित भूमाफिया ने कुंडों की भूमि पर कब्जा किया।
याचिका के अनुसार लगभग चार दशकों से कुंडों तक का सार्वजनिक मार्ग प्रभावित है; दो पानी टंकियों के निर्माण से स्थिति और जटिल हुई।
प्रशासन को कुंडों की ऐतिहासिक पहचान और धार्मिक महत्व बनाए रखने के लिए संरक्षण सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।

अयोध्या के बाग बिजैसी क्षेत्र में स्थित प्राचीन माता कौशल्या कुंड और माता सुमित्रा कुंड पर दशकों से जारी अतिक्रमण का मामला अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ तक पहुँच गया है। 22 मई 2026 को सुनवाई के बाद अदालत ने अयोध्या जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर इन धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों से अतिक्रमण हटाया जाए और उन्हें संरक्षित किया जाए।

याचिका का आधार

सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत एवं हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत राजू दास ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में यह जनहित याचिका दायर की। याचिका में अयोध्या सदर तहसील के अंतर्गत बाग बिजैसी में स्थित इन दोनों पौराणिक कुंडों के संरक्षण तथा इन तक पहुँचने वाले सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण-मुक्त रखने की माँग की गई थी। महंत राजू दास के अनुसार, इन कुंडों की भूमि पर लंबे समय से कब्जा किया जा रहा था और प्रशासन को पूर्व में शिकायत दिए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अतिक्रमण की पृष्ठभूमि

महंत राजू दास ने आरोप लगाया कि कथित भूमाफिया ने कुंडों के चारों ओर की भूमि पर कब्जा कर लिया और इन ऐतिहासिक स्थलों की मूल पहचान को मिटाने की कोशिश की। याचिका में बताया गया कि लगभग चार दशकों से इन कुंडों तक पहुँचने का मुख्य सार्वजनिक मार्ग आबादी क्षेत्र से होकर गुज़रता रहा है।

गौरतलब है कि वर्तमान में आबादी की दक्षिणी दिशा में दो पानी की टंकियाँ एक साथ निर्मित की जा रही हैं, जबकि ये दोनों टंकियाँ अलग-अलग वार्डों में स्वीकृत थीं। इस निर्माण के कारण कुंडों तक जाने वाला सार्वजनिक मार्ग प्रभावित हो रहा है और आसपास की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं। महंत दास का कहना है कि धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र घेर लिया गया और इन कुंडों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया।

हाईकोर्ट का आदेश

सुनवाई के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन कुंडों की भूमि पर जो भी अतिक्रमण है, उसे तत्काल हटाया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को इस प्रकार संरक्षित किया जाए कि उनकी पहचान और सांस्कृतिक महत्व बना रहे।

आम जनता पर असर

यह मामला केवल दो कुंडों तक सीमित नहीं है — यह अयोध्या जैसे धार्मिक नगरों में प्राचीन जलस्रोतों और पौराणिक स्थलों की सुरक्षा का व्यापक प्रश्न उठाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ये कुंड धार्मिक आस्था के केंद्र हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की माँग और तीव्र हो गई है।

आगे क्या होगा

अदालत के आदेश के अनुसार जिला प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करनी होगी। यदि प्रशासन इस समय-सीमा में कार्रवाई नहीं करता, तो मामले की अगली सुनवाई में अदालत सख्त रुख अपना सकती है। महंत राजू दास ने स्पष्ट किया है कि वे इन कुंडों के पूर्ण संरक्षण तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रशासनिक इच्छाशक्ति की है — क्योंकि महंत राजू दास के अनुसार पहले भी शिकायतें दी गई थीं और कोई कार्रवाई नहीं हुई। अयोध्या में राम मंदिर के बाद धार्मिक पर्यटन की बाढ़ आई है, फिर भी पौराणिक कुंड जैसे स्थल दशकों से उपेक्षित रहे — यह विरोधाभास प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है। न्यायालय का हस्तक्षेप ज़रूरी था, पर न्यायिक आदेश के बिना ऐसे स्थलों की सुरक्षा न होना एक बड़ी प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। यदि एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं होती, तो यह मामला अयोध्या में धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की व्यापक नीतिगत बहस का केंद्र बन सकता है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या के कौशल्या कुंड और सुमित्रा कुंड विवाद क्या है?
यह मामला अयोध्या के बाग बिजैसी क्षेत्र में स्थित दो प्राचीन पौराणिक कुंडों — माता कौशल्या कुंड और माता सुमित्रा कुंड — पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा है। आरोप है कि कथित भूमाफिया ने इन कुंडों की भूमि पर कब्जा कर उनकी मूल पहचान को खतरे में डाल दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 22 मई 2026 को अयोध्या जिला प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर इन कुंडों से अतिक्रमण हटाने और उन्हें संरक्षित करने का स्पष्ट निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि इन ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों की पहचान बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
यह जनहित याचिका किसने और क्यों दायर की?
सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत एवं हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत राजू दास ने यह याचिका दायर की। उनका कहना था कि प्रशासन को पहले भी शिकायतें दी गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
इन कुंडों तक पहुँचने का रास्ता क्यों प्रभावित हुआ?
याचिका के अनुसार लगभग चार दशकों से इन कुंडों तक का मुख्य सार्वजनिक मार्ग आबादी क्षेत्र से होकर गुज़रता रहा है। आबादी की दक्षिणी दिशा में दो पानी की टंकियाँ एक साथ बनाए जाने से यह मार्ग प्रभावित हुआ, जबकि दोनों टंकियाँ अलग-अलग वार्डों में स्वीकृत थीं।
इस मामले का अयोध्या के अन्य धार्मिक स्थलों पर क्या असर पड़ सकता है?
यह मामला एक मिसाल बन सकता है — यदि हाईकोर्ट के आदेश पर सख्ती से अमल होता है तो अयोध्या के अन्य उपेक्षित पौराणिक स्थलों के संरक्षण की माँग भी तेज हो सकती है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में धार्मिक पर्यटन बढ़ा है, जिससे ऐसे स्थलों की सुरक्षा और भी प्रासंगिक हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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