7 नवंबर 2026
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अयोध्या दीपोत्सव 2026: 10वें महोत्सव में 30 लाख दीये, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और CM योगी होंगे साक्षी

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अयोध्या दीपोत्सव 2026: 10वें महोत्सव में 30 लाख दीये, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और CM योगी होंगे साक्षी

सारांश

दसवाँ दीपोत्सव सिर्फ उत्सव नहीं, एक सांस्कृतिक महासमागम है — तेलंगाना के गुसाड़ी नृत्य से लेकर मथुरा के मोर नृत्य तक, पूरा भारत अयोध्या में उतर आया है। 30 लाख दीये, 2,100 ड्रोन और देश में पहली बार उपराष्ट्रपति की उपस्थिति — रामनगरी इस बार नया इतिहास लिखने को तैयार है।

मुख्य बातें

7 नवंबर 2026 को अयोध्या में दसवें दीपोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने साकेत महाविद्यालय से लोक संस्कृति आधारित झांकियों को हरी झंडी दिखाई।
सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये सजाए गए हैं; 35,000 स्वयंसेवकों ने तीन दिन में कार्य पूरा किया।
राधाकृष्णन और CM योगी आदित्यनाथ पहली बार एक साथ दीपोत्सव में भाग लेंगे।
2,100 ड्रोन रामायण प्रसंगों को आकाश में जीवंत करेंगे; 2,147 अर्चक सरयू महाआरती में भाग लेंगे।
मथुरा, तेलंगाना सहित कई राज्यों और विदेशी दलों ने अंतरराष्ट्रीय रामलीला और लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी।

अयोध्या में 7 नवंबर 2026 को दसवें दीपोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ, जब पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने साकेत महाविद्यालय से विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति और रामायण प्रसंगों पर आधारित झांकियों को हरी झंडी दिखाई। ढोल-मंजीरों की गूंज, धोबिया नृत्य की थाप और पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों ने पूरी रामनगरी को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया। सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये सजाए जा चुके हैं, जो शाम को एक साथ प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।

झांकियों और लोकनृत्य से सजी रामनगरी

झांकियों के अग्रभाग में महिला कलाकार ढोल बजाते हुए आगे बढ़ रही थीं, जबकि मार्ग में उपस्थित श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने पुष्पवर्षा कर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। मथुरा से आई 15 सदस्यीय दल ने मोर नृत्य की प्रस्तुति दी। दल के कलाकारों ने कहा कि कान्हा के भक्त होते हुए भी प्रभु श्रीराम की धरती पर अपनी कला प्रस्तुत करने का यह अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात है।

तेलंगाना से आई 15 सदस्यीय आदिवासी कलाकारों की टीम गुसाड़ी नृत्य के ज़रिये दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे इन कलाकारों ने सिर पर मोर पंखों का मुकुट धारण किया हुआ है और ढोल की थाप पर उनकी सामूहिक प्रस्तुति दीपोत्सव की रौनक में चार चाँद लगा रही है। मथुरा से ही नगाड़ा और बम रसिया की एक अलग टीम भी महोत्सव में शामिल हुई है।

कलाकारों की भावना — राम की धरती पर गर्व

नगाड़ा-बम रसिया टीम के सदस्य लक्ष्मण बेनीवाल ने बताया कि वे हर वर्ष अयोध्या दीपोत्सव में भाग लेते हैं और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भी उनकी टीम यहाँ उपस्थित थी। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव की भव्यता और यहाँ का उत्साह उन्हें बार-बार यहाँ खींच लाता है। एक महिला कलाकार ने बताया कि उन्होंने इसी वर्ष से इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देना आरंभ किया है और आज की प्रस्तुति उन्होंने भगवान श्रीराम व अयोध्या की जनता को समर्पित की है।

मुख्य समारोह: उपराष्ट्रपति और CM योगी करेंगे राज्याभिषेक

दोपहर में रामकथा पार्क में आयोजित मुख्य समारोह में उपराष्ट्रपति डॉ. सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान राम का राज्याभिषेक करेंगे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगी। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब देश के उपराष्ट्रपति दीपोत्सव के इस भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे। विभिन्न देशों से आई टीमें अंतरराष्ट्रीय रामलीला का मंचन भी करेंगी।

30 लाख दीये, 2,100 ड्रोन और 2,147 अर्चकों की महाआरती

राम की पैड़ी सहित सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये सजाने का कार्य अवध विश्वविद्यालय के करीब 35,000 स्वयंसेवकों ने तीन दिन की लगातार मेहनत से शुक्रवार को पूरा किया। इस विशाल व्यवस्था के संचालन के लिए 900 घाट समन्वयक, 112 घाट प्रभारी और 27 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।

शाम को उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एक साथ लाखों दीये प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। सरयू महाआरती में 2,147 अर्चक एक साथ भाग लेंगे, जबकि 2,100 ड्रोन के माध्यम से आकाश में रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को भी रंग-बिरंगी रोशनी से आकर्षक ढंग से सजाया गया है।

देशभर से उमड़े श्रद्धालु, उत्सव का माहौल

दीपोत्सव को लेकर देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का अयोध्या पहुँचने का सिलसिला जारी है। मंदिरों, प्रमुख मार्गों और घाटों पर उत्सव का माहौल है। रोशनी, लोकनृत्य, रामलीला और दीपों की जगमगाहट के बीच रामनगरी एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भव्य प्रदर्शन कर रही है। यह आयोजन भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने का अनूठा उदाहरण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली महत्व इसके सांस्कृतिक विस्तार में है — तेलंगाना से आदिवासी गुसाड़ी नृत्य और मथुरा से मोर नृत्य का अयोध्या में एकत्र होना यह बताता है कि यह आयोजन अब केवल उत्तर प्रदेश का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है। उपराष्ट्रपति की पहली उपस्थिति इसे संवैधानिक मान्यता देती है। हालाँकि, इतने विशाल आयोजन में 35,000 स्वयंसेवकों और 1,000 से अधिक समन्वयकों की तैनाती के बावजूद भीड़ प्रबंधन और पर्यावरणीय प्रभाव — विशेषकर सरयू नदी में तेल-बाती के अवशेष — जैसे दीर्घकालिक प्रश्न भी प्रतिवर्ष उठते रहे हैं जिनका संतोषजनक उत्तर अभी बाकी है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या दीपोत्सव 2026 में क्या खास है?
यह दसवाँ दीपोत्सव है और पहली बार देश के उपराष्ट्रपति डॉ. सी.पी. राधाकृष्णन इस आयोजन के साक्षी बनेंगे। सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये प्रज्ज्वलित किए जाएंगे और 2,100 ड्रोन रामायण प्रसंगों को आकाश में जीवंत करेंगे।
दीपोत्सव में किन-किन राज्यों के कलाकार शामिल हैं?
इस वर्ष मथुरा से मोर नृत्य और नगाड़ा-बम रसिया दल, तथा तेलंगाना से 15 सदस्यीय आदिवासी कलाकारों की टीम गुसाड़ी नृत्य लेकर पहुँची है। विभिन्न देशों से आई टीमें अंतरराष्ट्रीय रामलीला का भी मंचन करेंगी।
सरयू तट पर दीप सज्जा का काम किसने किया?
अवध विश्वविद्यालय के करीब 35,000 स्वयंसेवकों ने तीन दिन की निरंतर मेहनत से शुक्रवार को दीप सज्जा का काम पूरा किया। इस व्यवस्था के लिए 900 घाट समन्वयक, 112 घाट प्रभारी और 27 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।
दीपोत्सव का मुख्य समारोह कहाँ और कब होगा?
मुख्य समारोह रामकथा पार्क में आयोजित है, जहाँ उपराष्ट्रपति डॉ. सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान राम का राज्याभिषेक करेंगे। शाम को सरयू तट पर 2,147 अर्चकों द्वारा महाआरती और एक साथ 30 लाख दीपों का प्रज्ज्वलन होगा।
अयोध्या दीपोत्सव का इतिहास क्या है?
अयोध्या दीपोत्सव की शुरुआत उत्तर प्रदेश सरकार के तत्वावधान में हुई थी और यह हर वर्ष दीपावली के अवसर पर आयोजित किया जाता है। 2026 में यह दसवाँ संस्करण है और प्रत्येक वर्ष इसकी भव्यता में वृद्धि होती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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