अयोध्या मछली विवाद: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने CM योगी के खिलाफ लखनऊ में मानहानि परिवाद दाखिल किया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने मंगलवार, 1 सितंबर को लखनऊ की जनपद न्यायालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल किया। यह कदम अयोध्या में आयोजित निषाद सम्मेलन के दौरान मत्स्य भोज में मछली खाने को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से की गई कथित टिप्पणी के बाद उठाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
कांग्रेस की ओर से जारी मीडिया अपडेट के अनुसार, अजय राय अयोध्या में राम जन्मभूमि और हनुमानगढ़ी के दर्शन के लिए गए थे। वहाँ राम निहाल निषाद द्वारा आयोजित निषाद सम्मेलन में मत्स्य भोज का कार्यक्रम हुआ था। राय का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस सम्मेलन के संदर्भ में उनके मछली खाने को लेकर बिना किसी तथ्य या प्रमाण के सार्वजनिक बयान दिया, जो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाता है।
अदालत में परिवाद
अजय राय ने अपने अधिवक्ता संजीव पाण्डेय के माध्यम से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा की अदालत में यह परिवाद दाखिल किया। परिवाद में मुख्यमंत्री के उस बयान को आधार बनाया गया है जो निषाद सम्मेलन के संदर्भ में दिया गया था। अब अदालत की कार्यवाही के ज़रिए यह तय होगा कि इस परिवाद पर आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई होगी।
अजय राय का पक्ष
अजय राय ने मुख्यमंत्री के आरोपों को पूरी तरह गलत और तथ्यहीन बताया है। उनका कहना है कि वे पूर्ण शाकाहारी हैं और इस प्रकार के बयान से न केवल उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया, बल्कि उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया। उन्होंने इसी आधार पर न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का निर्णय लिया।
राजनीतिक टकराव का नया मोर्चा
यह विवाद अब उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के शीर्ष प्रदेश नेतृत्व के बीच सीधे कानूनी टकराव का रूप ले चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पहले से ही तीखी है। गौरतलब है कि इस तरह के सार्वजनिक बयानबाज़ी से उपजे मानहानि के मुकदमे उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई परिपाटी नहीं हैं, परंतु एक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा सीधे मुख्यमंत्री के विरुद्ध अदालत जाना इस विवाद को विशेष महत्त्व देता है।
आगे क्या होगा
अब यह देखना होगा कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा की अदालत इस परिवाद पर संज्ञान लेती है या नहीं। यदि अदालत परिवाद स्वीकार करती है, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कानूनी नोटिस जारी हो सकता है। यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में और गर्माने की संभावना है।