आजमगढ़: खाटू श्याम मंदिर निर्माण स्थल पर शटरिंग गिरने से एक मजदूर की मौत, दो घायल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में 2 नवंबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में कंधरापुर थाना क्षेत्र के भंवरनाथ मंदिर के निकट निर्माणाधीन खाटू श्याम मंदिर की शटरिंग अचानक ढह जाने से एक मजदूर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। हादसे में तीन मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिनमें से एक को अस्पताल पहुँचने पर मृत घोषित कर दिया गया।
हादसे का घटनाक्रम
मंदिर की छत पर स्लैब ढलाई की तैयारी चल रही थी और मजदूर छत पर शटरिंग लगाने के काम में जुटे थे। इसी दौरान शटरिंग अचानक भरभराकर गिर पड़ी और काम कर रहे तीनों मजदूर मलबे की चपेट में आ गए। मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई।
सूचना मिलते ही कंधरापुर थाने की पुलिस और एंबुलेंस टीम घटनास्थल पर पहुँची। स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया और तीनों मजदूरों को मलबे से निकालकर मंडलीय जिला चिकित्सालय भेजा गया।
मृतक और घायलों का विवरण
मंडलीय जिला चिकित्सालय के ईएमओ डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि राजाराम राजभर (30 वर्ष), निवासी आजमगढ़, को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। दूसरे घायल कमलेश चौहान (लगभग 23 वर्ष) के सिर में गंभीर चोटें आई हैं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है — प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। तीसरे घायल अरुण चौहान (35 वर्ष) को मामूली चोटें आई हैं और उनका उपचार जिला अस्पताल में जारी है।
जाँच और कार्रवाई
पुलिस के अनुसार हादसे के कारणों की जाँच की जा रही है। आशंका है कि शटरिंग कमज़ोर होने या उसे पर्याप्त सपोर्ट न मिलने के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने मंदिर निर्माण करा रहे ठेकेदार और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जाँच रिपोर्ट आने के बाद लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के सवाल
इस हादसे के बाद निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर निर्माण में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और समय रहते शटरिंग की मजबूती की जाँच होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में निर्माण स्थलों पर असुरक्षित परिस्थितियों के कारण दुर्घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं। जाँच के नतीजे और प्रशासन की कार्रवाई यह तय करेगी कि जिम्मेदारी किस पर तय होती है।