2 नवंबर 2026
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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर बड़े हमले, नुश्की-खारान से ग्वादर तक हिंसा का सिलसिला

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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर बड़े हमले, नुश्की-खारान से ग्वादर तक हिंसा का सिलसिला

सारांश

बलूचिस्तान में हिंसा का नया दौर — नुश्की और खारान में ताज़े हमलों के साथ-साथ BLF का दावा है कि अक्टूबर में 25 अभियानों में 129 से अधिक पाकिस्तानी कर्मी हताहत हुए। ग्वादर से पंजाब तक गैस पाइपलाइन तक को निशाना बनाया गया। सभी दावे अभी एकतरफा हैं।

मुख्य बातें

2 नवंबर 2026 को बलूचिस्तान के नुश्की और खारान जिलों में सुरक्षा बलों पर अलग-अलग हमले हुए।
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने दावा किया कि अक्टूबर में 25 अभियानों में 129 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मी हताहत हुए।
ग्वादर में चलाए गए 'ऑपरेशन अलमास' में कथित तौर पर 80 से अधिक कर्मी मारे गए।
बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने कच्छी जिले के सन्नी क्षेत्र में सैन्य शिविर पर कब्जे और 12 कर्मियों के मारे जाने का दावा किया।
पंजाब के रहीम यार खान में 36 इंच की गैस पाइपलाइन में विस्फोट का दावा; सुई से पंजाब तक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका।
सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है; पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 2 नवंबर 2026 को सुरक्षा बलों पर एक के बाद एक कई हमले होने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नुश्की और खारान जिलों में अलग-अलग घटनाओं में सशस्त्र हमलावरों ने सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाया, जिससे भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मुख्य घटनाक्रम

नुश्की जिले के अहमद वाल क्षेत्र में सशस्त्र हमलावरों ने पैदल और वाहनों में यात्रा कर रहे सुरक्षा कर्मियों पर हमला किया। इसी दौरान खारान जिले में एक सैन्य वाहन विस्फोट की चपेट में आने की भी खबर है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इलाके में बिछाई गई बारूदी सुरंगों के कारण सुरक्षा बलों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

ये घटनाएं खारान के लिजाय क्षेत्र में एक दिन पहले हुई झड़पों के ठीक बाद सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उस मुठभेड़ में एक सैन्य वाहन विस्फोट से क्षतिग्रस्त हुआ और उसके बाद हुई भिड़ंत में आठ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए या घायल हुए। उस दौरान एक क्वाडकॉप्टर ड्रोन गिराए जाने का भी दावा किया गया, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।

बीएलएफ के दावे और अक्टूबर का हिसाब

ताज़ा हमलों की जिम्मेदारी किसी संगठन ने तत्काल नहीं ली। इस बीच, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने दावा किया है कि उसने अक्टूबर 2026 के दौरान 25 अलग-अलग अभियानों में 129 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मियों को मारा तथा 30 से ज़्यादा को गंभीर रूप से घायल किया।

रविवार को जारी मासिक रिपोर्ट में BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वहराम बलूच ने कहा कि इन कार्रवाइयों में ग्वादर जिले में चलाया गया 'ऑपरेशन अलमास' भी शामिल था, जिसमें कथित तौर पर 80 से अधिक सैन्य और खुफिया कर्मी मारे गए। संगठन ने यह भी दावा किया कि ग्वादर में सैन्य बैरकों, खुफिया ठिकानों और बख्तरबंद वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, और एक पुलिस स्टेशन पर कब्जा किया गया।

BLF के अनुसार, अक्टूबर में उसने सात सैन्य चौकियों, छह शिविरों, दो खुफिया ठिकानों और 11 सैन्य काफिलों पर हमले किए, तथा तीन बार प्रमुख सड़कें बंद कीं। संगठन ने 14 सैन्य वाहन, दो निगरानी ड्रोन, पांच क्वाडकॉप्टर, एक निगरानी कैमरा और एक मोबाइल टावर नष्ट करने का भी दावा किया। इसके अलावा 15 व्यावसायिक ट्रेलरों और ट्रकों को नुकसान पहुंचाने और एक सरकारी वाहन कब्जे में लेने का दावा किया गया।

बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स के अलग दावे

अलग से, बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने रविवार सुबह कच्छी जिले के सन्नी क्षेत्र में पाकिस्तानी सैन्य शिविर पर कब्जा कर लिया। संगठन के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच ने कहा, 'स्वतंत्रता सेनानियों ने शिविर पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया और 12 दुश्मन कर्मियों को मार गिराया।' उन्होंने कहा कि बाकी सैनिक क्षेत्र छोड़कर भाग गए और सन्नी कस्बे, पुलिस स्टेशन तथा कई सरकारी इमारतों पर भी उनका नियंत्रण हो गया।

इसके अतिरिक्त, BRG ने दावा किया कि पंजाब प्रांत के रहीम यार खान जिले के बाला चौक के पास रविवार रात एक गैस पाइपलाइन में विस्फोट किया गया। प्रवक्ता के अनुसार, लड़ाकों ने डेरा बुगती जिले के सुई क्षेत्र से पंजाब तक गैस ले जाने वाली 36 इंच की पाइपलाइन पर विस्फोटक लगाए, जिससे उसे भारी नुकसान पहुंचा।

पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से किसी भी दावे पर तत्काल कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सशस्त्र संगठनों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव पहले से ऊँचाई पर है, और अंतरराष्ट्रीय निवेश परियोजनाओं — विशेषकर ग्वादर से जुड़ी — की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

आगे की स्थिति

बलूचिस्तान में यह सिलसिला थमने के कोई संकेत नहीं हैं। सशस्त्र संगठनों द्वारा जारी किए गए दावे अभी तक एकतरफा हैं — पाकिस्तान सेना का आधिकारिक खंडन या स्वीकृति आना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्वादर बंदरगाह और सीपेक (CPEC) ढाँचे के इर्द-गिर्द बढ़ती हिंसा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दीर्घकालिक चुनौती बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि खंडन की अनुपस्थिति अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा संकेत बन जाती है। CPEC और ग्वादर को लेकर चीन की चिंताएँ इस संदर्भ में नई परतें जोड़ती हैं, जिन पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में 2 नवंबर को क्या हुआ?
2 नवंबर 2026 को बलूचिस्तान के नुश्की और खारान जिलों में सुरक्षा बलों पर कई हमले हुए। नुश्की के अहमद वाल क्षेत्र में सशस्त्र हमलावरों ने सैनिकों को निशाना बनाया, जबकि खारान में एक सैन्य वाहन विस्फोट की चपेट में आया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने अक्टूबर के बारे में क्या दावा किया?
BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वहराम बलूच ने रविवार को जारी मासिक रिपोर्ट में दावा किया कि अक्टूबर 2026 में 25 अलग-अलग अभियानों में 129 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मी हताहत हुए। इनमें ग्वादर में चलाया गया 'ऑपरेशन अलमास' भी शामिल था, जिसमें कथित तौर पर 80 से अधिक कर्मी मारे गए।
बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने क्या दावे किए?
BRG ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने कच्छी जिले के सन्नी क्षेत्र में पाकिस्तानी सैन्य शिविर पर कब्जा कर 12 कर्मियों को मार गिराया। इसके अलावा पंजाब के रहीम यार खान में सुई से आने वाली 36 इंच की गैस पाइपलाइन को विस्फोट से उड़ाने का भी दावा किया गया।
क्या इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि हुई है?
नहीं। रिपोर्टों के अनुसार इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से भी इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है। ये दावे मुख्यतः सशस्त्र संगठनों के एकतरफा बयानों पर आधारित हैं।
बलूचिस्तान में यह हिंसा क्यों बढ़ रही है?
बलूचिस्तान में दशकों से अलगाववादी आंदोलन सक्रिय है, जो स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग से जुड़ा है। ग्वादर बंदरगाह और CPEC परियोजनाओं के विस्तार के साथ हिंसा की भौगोलिक पहुँच और तीव्रता दोनों बढ़ी हैं। पाकिस्तानी सेना के अभियानों और स्थानीय असंतोष के बीच यह टकराव लंबे समय से जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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