नारायणगंज में महिला वकील से मारपीट और 'डांसर्स' टिप्पणी पर बीएनपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के नारायणगंज जिला जज कोर्ट परिसर में 25 मई 2026 को महिला अधिवक्ताओं ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया। जनरल लॉयर्स के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में मांग की गई कि नारायणगंज सिटी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सदस्य सचिव अबु अल यूसुफ खान टीपू और वकील रफीकुल अहमद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह प्रदर्शन पीड़ित महिला वकील अमीना अख्तर शिल्पी के साथ कथित मारपीट और महिला अधिवक्ताओं को 'डांसर्स' कहे जाने की घटना के बाद सामने आया।
मुख्य घटनाक्रम
पीड़िता अमीना अख्तर शिल्पी के अनुसार, अदालत परिसर से फेरीवालों को हटाने के मुद्दे पर रफीकुल अहमद से बहस हुई। शिल्पी ने आरोप लगाया, 'बहस के दौरान एक समय ऐसा आया कि रफीकुल ने मुझ पर हमला कर दिया। बाद में एडवोकेट अबू अल यूसुफ खान टीपू भी शामिल हो गए और मुझे मुक्का मारा।'
शिल्पी ने स्पष्ट किया था कि फेरीवालों को हटाने का आदेश बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव का था और उस कार्रवाई में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। इसके बावजूद कथित तौर पर उन पर हमला किया गया।
आपत्तिजनक टिप्पणी का विवाद
मामला उस समय और तूल पकड़ गया जब टीपू ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कथित तौर पर महिला वकीलों को 'डांसर्स' कह दिया। इस टिप्पणी ने न केवल नारायणगंज बल्कि व्यापक कानूनी बिरादरी में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
जातीयताबादी आइनजीबी फोरम की जिला इकाई की संयुक्त संयोजक शमसुन नूर बंधन ने बार एसोसिएशन नेतृत्व और बीएनपी के केंद्रीय नेतृत्व से मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
व्यापक संदर्भ: बांग्लादेश में महिला हिंसा की बढ़ती चिंता
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा पर गंभीर चिंताएँ उठाई जा रही हैं। यूनिसेफ ने पिछले सप्ताह कहा था कि 2026 में बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ती यौन और क्रूर हिंसा की घटनाएं लैंगिक और बाल हिंसा रोकने के उपायों को और मजबूत करने की तत्काल जरूरत का संकेत देती हैं।
बांग्लादेश में यूनिसेफ प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने कहा, 'अपराधियों को सजा न देने की संस्कृति खत्म होनी चाहिए और संस्थागत सुरक्षा, बाल-अनुकूल पुलिस और न्याय व्यवस्था, सामुदायिक सुरक्षा तथा सामाजिक सेवाओं की कमियों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।'
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस महीने की शुरुआत में अवामी लीग ने भी कहा था कि बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ रही है और यह अब केवल 'महिलाओं का मुद्दा' नहीं, बल्कि 'शासन, न्याय और राष्ट्रीय चरित्र का संकट' बन चुका है। गौरतलब है कि अदालत परिसर जैसे संस्थागत स्थानों पर इस तरह की घटनाएँ न्यायपालिका में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े करती हैं।
आगे क्या होगा
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और विस्तार दिया जाएगा। बार एसोसिएशन और बीएनपी केंद्रीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जो इस मामले की दिशा तय करेगी।