बांग्लादेश में घरेलू हिंसा: WHO के आंकड़ों में हर दो में से एक महिला शिकार, दक्षिण एशिया में दूसरा सबसे बुरा हाल
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में अंतरंग साथी हिंसा (Intimate Partner Violence) एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है — विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग हर दो में से एक महिला अपने साथी द्वारा हिंसा का शिकार हो चुकी है। वैश्विक सूचकांक में बांग्लादेश महिलाओं के विरुद्ध शारीरिक और यौन हिंसा के मामलों में विश्व में 11वें स्थान पर है, और दक्षिण एशिया में केवल अफगानिस्तान की स्थिति इससे अधिक गंभीर बताई गई है। 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर जारी रिपोर्टों ने इस संकट की व्यापकता को फिर से रेखांकित किया।
आंकड़ों की भयावह तस्वीर
बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (BBS) के सर्वेक्षण के अनुसार, 46.7 प्रतिशत महिलाओं ने अपने साथी द्वारा शारीरिक हिंसा झेलने की बात स्वीकार की, जबकि 28.5 प्रतिशत ने यौन हिंसा का अनुभव बताया। इसके अतिरिक्त, 32.7 प्रतिशत महिलाओं ने भावनात्मक उत्पीड़न, 9.7 प्रतिशत ने आर्थिक हिंसा और 50.1 प्रतिशत ने साथी द्वारा नियंत्रित व्यवहार का सामना करने की जानकारी दी।
फरवरी 2025 में जारी 'वायलेंस अगेंस्ट वुमन सर्वे 2024' के निष्कर्ष और भी चिंताजनक हैं — इसके अनुसार बांग्लादेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की 70 प्रतिशत महिलाओं ने अपने जीवनकाल में कम से कम एक प्रकार की अंतरंग साथी हिंसा का सामना किया है।
वैश्विक संदर्भ में बांग्लादेश की स्थिति
गौरतलब है कि बांग्लादेश में घरेलू हिंसा दशकों से चिंता का विषय रही है, फिर भी देश इस समस्या के सबसे अधिक प्रभावित राष्ट्रों में बना हुआ है। WHO के वैश्विक आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि यह समस्या केवल किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी — दोनों परिवेशों में व्याप्त है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रगति का दावा करता रहा है।
महिलाओं और परिवारों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरंग साथी हिंसा का दुष्प्रभाव केवल पीड़ित महिला तक सीमित नहीं रहता। यह परिवार की संरचना को कमज़ोर करती है, बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को बाधित करती है, और समाज में भय, चुप्पी तथा असमानता के चक्र को और गहरा करती है।
ढाका विश्वविद्यालय की मानवविज्ञान प्रोफेसर जोबैदा नसरीन ने कहा, 'मेरे शोध से पता चलता है कि जिन परिवारों में साथी हिंसा आम होती है, वहां के बच्चे मानसिक आघात, रिश्तों से डर, अलगाववादी व्यवहार और प्रतिशोध की भावना के अधिक शिकार होते हैं।'
क्या होगा आगे
अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर जारी इन रिपोर्टों ने नीति-निर्माताओं पर ठोस कानूनी और सामाजिक सुधारों की माँग को फिर से तेज़ कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रिपोर्टिंग तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता और पीड़ितों को सुरक्षित न्यायिक आश्रय नहीं मिलता, तब तक ये आंकड़े बदलने की संभावना कम है।