5 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बांग्लादेश में खसरा वैक्सीन घोटाले की जांच: मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल पर तीन सदस्यीय आयोग गठित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांग्लादेश में खसरा वैक्सीन घोटाले की जांच: मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल पर तीन सदस्यीय आयोग गठित

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का 2026 का प्रकोप महज़ एक अचानक आई आपदा नहीं था — यह प्रशासनिक विफलता की परिणति थी। यूनिसेफ की दस बैठकों और छह पत्रों की चेतावनियाँ अनसुनी रहीं, टीकाकरण कवरेज आठ वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुँचा, और अब सरकार ने जवाबदेही तय करने के लिए जांच आयोग बैठाया है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश सरकार ने 5 नवंबर 2026 को खसरा वैक्सीन खरीद व वितरण में अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित किया।
आयोग की अध्यक्षता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मामून रहमान करेंगे; जांच की समयसीमा 8 अगस्त 2024 से 17 फरवरी 2026 के बीच की है।
आयोग को 60 कार्यदिवसों में सरकार को रिपोर्ट सौंपनी होगी।
यूनिसेफ ने 2024-2026 के बीच 5-6 औपचारिक पत्रों और लगभग 10 बैठकों से वैक्सीन कमी की चेतावनी दी थी, जो कथित तौर पर नजरअंदाज़ की गई।
वार्षिक आवश्यकता 7 करोड़ खुराक के मुकाबले अगस्त-नवंबर 2025 में केवल 1.78 करोड़ खुराक ही खरीदी जा सकीं।
2025 में खसरा टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2% पर आया — 2017 से 2025 के बीच का सबसे निचला स्तर।

बांग्लादेश सरकार ने 5 नवंबर 2026 को पूर्व अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल (8 अगस्त 2024 से 17 फरवरी 2026) के दौरान खसरा (मीजल्स) के टीकों की खरीद और वितरण में हुई कथित अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। ढाका से प्रकाशित स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आयोग जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा और भविष्य में ऐसी विफलताओं को रोकने के उपाय सुझाएगा।

आयोग की संरचना और अधिकार

बांग्लादेश के प्रमुख समाचारपत्र 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग की अध्यक्षता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मामून रहमान करेंगे। इसके अन्य दो सदस्यों में बांग्लादेश कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स (BCPS) के अध्यक्ष मावदुद हुसैन आलमगीर और स्वास्थ्य सेवा प्रभाग के अतिरिक्त सचिव एबीएम मोइनुल इस्लाम शामिल हैं।

आयोग को बांग्लादेश में किसी भी स्थान का निरीक्षण करने और किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करने का अधिकार दिया गया है। उसे 60 कार्यदिवसों के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। स्वास्थ्य सेवा प्रभाग आयोग को सचिवालय संबंधी सहायता उपलब्ध कराएगा।

खसरा प्रकोप की पृष्ठभूमि और गंभीरता

इस वर्ष अगस्त में कनाडा स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) ने बांग्लादेश में 2026 में फैले खसरे के प्रकोप को 'हाल के इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक' बताया था। संगठन की रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेशज़ 2026 मीजल्स आउटब्रेक' के अनुसार, महामारी विज्ञान के नजरिए से यह प्रकोप अप्रत्याशित नहीं था।

रिपोर्ट में 2024-2025 के दौरान टीकों की आपूर्ति में रुकावटें, नियमित टीकाकरण में चूक, निर्धारित पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों को रद्द करना, टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले आबादी समूहों की समय पर पहचान न कर पाना — इन्हें प्रमुख कारण बताया गया।

यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की चेतावनियाँ अनसुनी रहीं

GCDG की रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से कहा गया कि संगठन ने 2024 से 2026 के बीच पाँच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों के माध्यम से अंतरिम सरकार को संभावित वैक्सीन की कमी के बारे में बार-बार आगाह किया था। बांग्लादेश के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को प्रतिवर्ष विभिन्न टीकों की करीब 7 करोड़ खुराक की जरूरत होती है, किंतु अगस्त से नवंबर 2025 के बीच यूनिसेफ की अग्रिम वित्तीय सहायता से केवल 1.78 करोड़ खुराक ही खरीदी जा सकीं।

यूनिसेफ के अनुसार, धन आवंटित होने के बावजूद खरीद प्रक्रिया के तरीके को लेकर अनिर्णय और लंबी खुली निविदा प्रक्रिया के कारण समय पर टीकों की खरीद संभव नहीं हो पाई। गौरतलब है कि बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से स्वीकृत टीके यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था के जरिए खरीदता रहा था। अंतरिम सरकार ने इस स्थापित व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया था।

टीकाकरण कवरेज में ऐतिहासिक गिरावट

बांग्लादेशी समाचारपत्र 'समकाल' की ओर से प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के आंकड़ों के हवाले से GCDG ने बताया कि 2025 में खसरा टीकाकरण का कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गया — यह 2017 से 2025 के बीच दर्ज किया गया सबसे निचला स्तर था।

WHO ने बाद में 2024-2025 के दौरान खसरा-रूबेला (MR) वैक्सीन का देशव्यापी स्टॉक खत्म होने और नियमित टीकाकरण में कमी को बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने और 2026 में खसरे के प्रकोप का प्रमुख कारण बताया।

वर्तमान सरकार पर भी सवाल

GCDG ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार ने इस वर्ष सत्ता में आने के बाद पहले से ज्ञात और मापे जा सकने वाले जोखिमों के बावजूद समय पर और प्रभावी कदम नहीं उठाए। आयोग की जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि सत्ता-परिवर्तन के बाद शासन की निरंतरता में आई किस स्तर की खाई ने बच्चों को इस रोकथाम-योग्य बीमारी के खतरे में डाला। आने वाले महीनों में आयोग की रिपोर्ट बांग्लादेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही बांग्लादेश की उस नीतिगत भूल का स्वीकरण भी — जब एक सुचारू अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था को बिना विकल्प तैयार किए बदल दिया गया। यूनिसेफ की दस बैठकों और छह पत्रों की चेतावनियाँ दस्तावेजों में दर्ज हैं, फिर भी वैक्सीन का स्टॉक खाली रहा — यह लापरवाही नहीं, कथित तौर पर नीतिगत जिद की कीमत है। विडंबना यह है कि GCDG ने मौजूदा BNP सरकार को भी ज्ञात जोखिमों पर निष्क्रियता के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जो बताता है कि जवाबदेही केवल पूर्व सरकार तक सीमित रखना राजनीतिक सुविधा का काम होगा। आयोग की रिपोर्ट तभी सार्थक होगी जब वह संस्थागत सुधारों की ठोस अनुशंसाएं करे — न कि केवल पिछली सरकार के अधिकारियों को दोषी ठहराने का उपकरण बने।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरा वैक्सीन जांच आयोग क्यों गठित किया गया?
बांग्लादेश सरकार ने पूर्व अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल (8 अगस्त 2024 से 17 फरवरी 2026) के दौरान खसरा टीकों की खरीद और वितरण में हुई कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलताओं की जांच के लिए यह आयोग बनाया है। 2026 में बांग्लादेश में खसरे का गंभीर प्रकोप फैला, जिसे GCDG ने 'रोकी जा सकने वाली त्रासदी' बताया।
जांच आयोग में कौन शामिल हैं और उसके पास क्या अधिकार हैं?
आयोग की अध्यक्षता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मामून रहमान कर रहे हैं। BCPS अध्यक्ष मावदुद हुसैन आलमगीर और स्वास्थ्य सेवा प्रभाग के अतिरिक्त सचिव एबीएम मोइनुल इस्लाम भी इसके सदस्य हैं। आयोग को बांग्लादेश में कहीं भी निरीक्षण और किसी से भी पूछताछ का अधिकार है, और उसे 60 कार्यदिवसों में रिपोर्ट देनी है।
2026 में बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप इतना गंभीर क्यों हुआ?
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में खसरा टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2% पर आ गया — 2017-2025 के बीच सबसे निचला स्तर। इसके पीछे टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी, यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था बदलकर खुली निविदा अपनाना, और पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों को रद्द करना प्रमुख कारण रहे।
यूनिसेफ ने बांग्लादेश को वैक्सीन संकट के बारे में कब और कितनी बार चेताया था?
यूनिसेफ ने 2024 से 2026 के बीच पाँच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों के माध्यम से अंतरिम सरकार को संभावित वैक्सीन कमी के बारे में बार-बार आगाह किया था। इसके बावजूद वार्षिक जरूरत के 7 करोड़ खुराक के मुकाबले अगस्त-नवंबर 2025 में केवल 1.78 करोड़ खुराक ही खरीदी जा सकीं।
क्या मौजूदा BNP सरकार को भी खसरा प्रकोप के लिए जिम्मेदार माना गया है?
GCDG ने आरोप लगाया है कि मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहले से ज्ञात और मापे जा सकने वाले जोखिमों के बावजूद समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए। गठित जांच आयोग मुख्यतः यूनुस-कालीन (8 अगस्त 2024 से 17 फरवरी 2026) अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले