7 अगस्त 2026
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बांग्लादेश खसरा प्रकोप 2026: टीकाकरण विफलता और प्रशासनिक लापरवाही ने बढ़ाया संकट — GCDG रिपोर्ट

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बांग्लादेश खसरा प्रकोप 2026: टीकाकरण विफलता और प्रशासनिक लापरवाही ने बढ़ाया संकट — GCDG रिपोर्ट

सारांश

बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप कोई अचानक आई आपदा नहीं — यह टीका आपूर्ति की जानबूझकर बदली गई व्यवस्था, यूनिसेफ की अनसुनी चेतावनियों और प्रशासनिक निष्क्रियता का सिलसिलेवार परिणाम है। GCDG की रिपोर्ट इसे 'रोकी जा सकने वाली त्रासदी' कहती है।

मुख्य बातें

GCDG ने बांग्लादेश के 2026 खसरा प्रकोप को देश के हालिया इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया।
2025 में खसरा टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2% पर आया — 2017-2025 के बीच का सबसे निचला स्तर।
यूनिसेफ ने 2024-2026 के बीच 5-6 औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों में टीके की कमी की चेतावनी दी, जिसे अनसुना किया गया।
वार्षिक 7 करोड़ खुराक की ज़रूरत के मुकाबले अगस्त-नवंबर 2025 में केवल 1.78 करोड़ खुराक ही खरीदी जा सकीं।
WHO ने MR टीके के स्टॉक की समाप्ति और नियमित टीकाकरण के अभाव को प्रकोप की मुख्य वजह बताया।
BNP सरकार की चिकित्सा प्रतिक्रिया में देरी और 'सूचना की अपारदर्शिता' को GCDG ने अलग विफलता बताया।

बांग्लादेश में 2026 के खसरा प्रकोप को कनाडा स्थित अंतरराष्ट्रीय वकालत संगठन ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) ने देश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक करार दिया है। संगठन की रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप' में स्पष्ट कहा गया है कि यह बीमारी पूरी तरह टीकाकरण से रोकी जा सकती थी।

प्रकोप की जड़ें: क्या हुआ था

GCDG के अनुसार यह संकट अचानक नहीं आया — महामारी विज्ञान के नजरिए से यह अप्रत्याशित नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024-2025 में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान टीकों की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई, नियमित टीकाकरण में चूक हुई, तय पूरक टीकाकरण अभियान रद्द किए गए, और जोखिम वाले समूहों की समय पर पहचान नहीं हो सकी।

गौरतलब है कि बांग्लादेश लंबे समय से यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला के ज़रिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुमोदित टीके खरीदता था। अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को खुली निविदा खरीद प्रक्रिया से बदल दिया, जिसके परिणाम घातक साबित हुए।

यूनिसेफ की चेतावनियाँ और खरीद में विफलता

रिपोर्ट में यूनिसेफ का हवाला देते हुए बताया गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच पाँच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों में अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित कमी की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।

बांग्लादेश के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के लिए प्रतिवर्ष लगभग 7 करोड़ खुराक विभिन्न टीकों की आवश्यकता होती है। लेकिन अगस्त से नवंबर 2025 के बीच यूनिसेफ की अग्रिम फंडिंग से केवल 1.78 करोड़ खुराक ही खरीदी जा सकीं। यूनिसेफ के अनुसार, फंड आवंटित होने के बावजूद खरीद की विधि को लेकर अनिर्णय और लंबी खुली निविदा प्रक्रिया के चलते समय पर टीके उपलब्ध नहीं हो सके।

टीकाकरण कवरेज में ऐतिहासिक गिरावट

बांग्लादेशी दैनिक समकाल में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के आँकड़ों का हवाला देते हुए GCDG ने बताया कि 2025 में खसरे के टीकाकरण का कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गया — जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे निचला स्तर है।

WHO ने बाद में पुष्टि की कि 2024-2025 के दौरान बांग्लादेश में खसरा-रूबेला (MR) टीके का देशव्यापी स्टॉक खत्म होना और नियमित टीकाकरण का अभाव बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट और 2026 के प्रकोप की मुख्य वजह रही।

वर्तमान सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल

GCDG ने इस साल की शुरुआत में सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकार 'ज्ञात और मापने योग्य जोखिमों' पर तेज़ी से प्रतिक्रिया देने में विफल रही।

अप्रैल की शुरुआत में ही अस्पतालों में भीड़, आइसोलेशन और रेफरल की खामियों की चेतावनी मिल चुकी थी। फिर भी उपकरणों की खरीद, अस्थायी आइसोलेशन इकाइयाँ स्थापित करना, मानव संसाधन तैनात करना और मानक उपचार प्रोटोकॉल बनाना मई के अंत तक चलता रहा। GCDG ने वर्तमान सरकार की चिकित्सा प्रतिक्रिया में 'सूचना की अपारदर्शिता' को एक अलग और गंभीर विफलता बताया है।

आगे की राह

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश में खसरे के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। GCDG ने बांग्लादेश सरकार से WHO-अनुमोदित आपूर्ति श्रृंखला को बहाल करने, टीकाकरण कवरेज को तत्काल बढ़ाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सूचनाओं में पारदर्शिता लाने की माँग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर प्रशासनिक निर्णय लिए गए होते, तो इस संकट को टाला जा सकता था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन तमाम देशों के लिए चेतावनी है जहाँ राजनीतिक संक्रमण के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे को नीतिगत प्रयोगों का शिकार बनाया जाता है। WHO-अनुमोदित आपूर्ति व्यवस्था को खुली निविदा प्रक्रिया से बदलने का निर्णय शासन-सुधार के नाम पर लिया गया, लेकिन इसकी कीमत बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता ने चुकाई। यूनिसेफ की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद निष्क्रियता यह सवाल उठाती है कि जवाबदेही का तंत्र कहाँ था। BNP सरकार की देरी यह भी दर्शाती है कि संकट विरासत में मिले हों तो भी प्रतिक्रिया की गति राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में 2026 का खसरा प्रकोप क्यों फैला?
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2025 में अंतरिम सरकार के दौरान टीका आपूर्ति व्यवस्था बदलने, खरीद में देरी और नियमित टीकाकरण बाधित होने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता घट गई। WHO ने MR टीके के स्टॉक की समाप्ति को प्रकोप की मुख्य वजह बताया है।
GCDG की 'प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी' रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप महामारी विज्ञान के नजरिए से अप्रत्याशित नहीं था और टीकाकरण से पूरी तरह रोका जा सकता था। रिपोर्ट प्रशासनिक विफलताओं और सूचना की अपारदर्शिता को प्रमुख कारण मानती है।
यूनिसेफ ने बांग्लादेश को कितनी बार चेतावनी दी थी?
रिपोर्ट के अनुसार यूनिसेफ ने 2024 से 2026 के बीच पाँच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों में अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित कमी की चेतावनी दी थी। इन चेतावनियों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
बांग्लादेश में खसरा टीकाकरण कवरेज कितना गिरा?
EPI के आँकड़ों के अनुसार 2025 में खसरे का टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गया, जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले कवरेज काफी ऊँचे स्तर पर बना हुआ था।
BNP सरकार की प्रतिक्रिया पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
GCDG के अनुसार BNP सरकार अप्रैल में मिली चेतावनियों के बावजूद आइसोलेशन इकाइयाँ, उपकरण खरीद और उपचार प्रोटोकॉल मई के अंत तक भी पूरी तरह स्थापित नहीं कर सकी। संगठन ने सरकार की प्रतिक्रिया में 'सूचना की अपारदर्शिता' को एक अलग और गंभीर विफलता बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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