बांग्लादेश में खसरे से 481 बच्चों की मौत, यूनिसेफ ने वैक्सीन कमी पर 5-6 बार दी थी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर रूप धारण कर चुका है। मार्च 2026 से अब तक 481 बच्चों की मौत खसरे या उससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण हो चुकी है, जबकि लगभग 66,000 मामलों की पुष्टि हुई है या संक्रमण की आशंका जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने खुलासा किया है कि उसने 2024 से 2026 के बीच बांग्लादेश की पूर्व अंतरिम सरकार को वैक्सीन की कमी के बारे में बार-बार सचेत किया था, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
यूनिसेफ ने कितनी बार दी चेतावनी
ढाका में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने बताया कि संस्था ने स्वास्थ्य मंत्रालय को इस विषय पर 5 से 6 पत्र भेजे और करीब 10 बैठकों में वैक्सीन की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2024 से 2026 के बीच लगातार यह चेतावनी दी गई कि वैक्सीन की अनुपलब्धता एक बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है।
यूनिसेफ के उप कार्यकारी निदेशक टेड शायबान ने पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश दौरे के दौरान विदेश मंत्रालय के साथ हुई बैठक में भी इस संकट की ओर ध्यान दिलाया था। रिपोर्टों के अनुसार, इन चेतावनियों के बावजूद वैक्सीन की खरीद में आवश्यक तेज़ी नहीं आई।
वैक्सीन कमी की वजह क्या रही
यूनिसेफ के अनुसार, संकट का एक प्रमुख कारण सरकार द्वारा वैक्सीन खरीद प्रणाली में किया गया बदलाव था, जिसने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया। इस प्रक्रियागत देरी के चलते जब मामले बढ़ने शुरू हुए, तब पर्याप्त खुराक उपलब्ध नहीं थी।
बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्री सकावत हुसैन ने दावा किया कि मौजूदा सरकार को वैक्सीन की गंभीर कमी विरासत में मिली है। उनके अनुसार, जब तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, उस समय सरकारी स्टॉक में एक भी वैक्सीन खुराक उपलब्ध नहीं थी।
जाँच में सहयोग का आश्वासन
यूनिसेफ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खसरे के प्रकोप की जाँच में साक्ष्य और पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। यह जाँच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार द्वारा शुरू की गई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुज़र रहा है।
आम जनता और बच्चों पर असर
रिपोर्टों के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित वर्ग छोटे बच्चे हैं, जिनमें से 481 की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 66,000 से अधिक मामलों के साथ यह बांग्लादेश में हाल के वर्षों का सबसे गंभीर खसरा प्रकोप माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर टीकाकरण अभियान चलाया गया होता तो इस त्रासदी को काफी हद तक रोका जा सकता था।
आगे क्या होगा
BNP सरकार की जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि पूर्व अंतरिम सरकार की लापरवाही किस हद तक ज़िम्मेदार थी। यूनिसेफ का सहयोग इस प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता देगा। फिलहाल, बांग्लादेश सरकार आपातकालीन वैक्सीन आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयासों में जुटी है, ताकि आगे और मौतों को रोका जा सके।