बांसवाड़ा: माही नदी में नाव पलटी, 21 वर्षीय जयेश और 8 वर्षीय मानव लापता; SDRF का रेस्क्यू जारी

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बांसवाड़ा: माही नदी में नाव पलटी, 21 वर्षीय जयेश और 8 वर्षीय मानव लापता; SDRF का रेस्क्यू जारी

सारांश

राजस्थान के बांसवाड़ा में माही नदी पर धार्मिक यात्रा के बाद नाव की सवारी त्रासदी में बदल गई। लाइफ जैकेट नहीं, नाव ओवरलोड और नाविक फरार — 8 वर्षीय मानव समेत दो लोग अभी भी लापता हैं। तीन नदियों के संगम पर हुआ यह हादसा नदी पर्यटन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

5 मई को बांसवाड़ा की माही नदी में नाव पलटने से 21 वर्षीय जयेश और 8 वर्षीय मानव लापता हैं।
नाव में सवार 10 में से 8 लोग तैरकर सुरक्षित बाहर निकले; हादसा दोपहर 3 बजे हुआ।
किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी; नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे।
हादसे के बाद नाविक मौके से फरार हो गया।
SDRF, पुलिस, सिविल डिफेंस और स्थानीय गोताखोरों की 10 सदस्यीय टीम दो नावों से रात तक सर्च ऑपरेशन चला रही है।
सभी यात्री भानो का पाड़ा गाँव के निवासी थे और संगमेश्वर महादेव मंदिर में पूजा के बाद नाव पर सवार हुए थे।

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मंगलवार, 5 मई को माही नदी में एक नाव पलटने से दो लोग लापता हो गए — जिनमें 8 वर्षीय बच्चा मानव और 21 वर्षीय जयेश शामिल हैं। यह हादसा अर्थुना थाना क्षेत्र में दोपहर करीब 3 बजे हुआ, जब नाव किनारे से लगभग 200 मीटर दूर पलट गई। नाव में सवार 10 में से 8 लोग, जिनमें नाविक भी शामिल था, तैरकर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

हादसे का पूरा घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, सभी यात्री भानो का पाड़ा गाँव के निवासी थे और संगमेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद नाव की सवारी के लिए निकले थे। यह मंदिर उस स्थान पर स्थित है जहाँ माही, अनास और जाखम नदियों का संगम होता है और कथित तौर पर साल में लगभग 8 महीने पानी में डूबा रहता है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे और किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। हादसे के बाद नाविक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति

बांसवाड़ा एसपी सुधीर जोशी ने बताया कि पुलिस बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। करीब 10 सदस्यों की टीम दो नावों की सहायता से रात तक सर्च ऑपरेशन चला रही है। पुलिस, सिविल डिफेंस और स्थानीय गोताखोरों के साथ-साथ ग्रामीण भी खोज अभियान में सहयोग कर रहे हैं।

स्थानीय मछुआरों को भी अभियान में शामिल किया गया है ताकि लापता लोगों और डूबी हुई नाव का पता लगाया जा सके, जिसे अभी तक बरामद नहीं किया जा सका है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह घटना नदी पर्यटन और धार्मिक स्थलों के आसपास नाव सुरक्षा मानकों की अनदेखी को एक बार फिर उजागर करती है। अधिकारियों को संदेह है कि नाव में ओवरलोडिंग और लाइफ जैकेट की अनुपस्थिति इस हादसे के प्रमुख कारण रहे। गौरतलब है कि यह क्षेत्र तीन नदियों के संगम पर है, जहाँ जलधारा अपेक्षाकृत तेज़ और अनिश्चित होती है।

आगे क्या होगा

अधिकारियों ने बताया कि खोज अभियान जारी रहेगा। फरार नाविक के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब राजस्थान में नदी तटों पर धार्मिक पर्यटन का मौसम चरम पर होता है, जिससे नाव सुरक्षा नियमों के सख्त पालन की माँग और प्रासंगिक हो जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक परिचित त्रासदी की पुनरावृत्ति है — लाइफ जैकेट नहीं, ओवरलोडेड नाव, और घटना के बाद फरार नाविक। धार्मिक स्थलों के आसपास नदी पर्यटन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में एक पुरानी समस्या है। तीन नदियों के संगम जैसे संवेदनशील स्थान पर बिना किसी नियामक निगरानी के नाव चलाने की अनुमति देना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। जब तक नाव संचालकों की जवाबदेही और यात्रियों की सुरक्षा के लिए बाध्यकारी तंत्र नहीं बनेगा, ऐसी खबरें आती रहेंगी।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांसवाड़ा माही नदी नाव हादसे में कौन लापता हैं?
हादसे में 21 वर्षीय जयेश और 8 वर्षीय मानव लापता हैं, जो दोनों भानो का पाड़ा गाँव के निवासी बताए गए हैं। नाव में सवार बाकी 8 लोग तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में कौन-कौन शामिल है?
बांसवाड़ा एसपी सुधीर जोशी के नेतृत्व में पुलिस, SDRF, सिविल डिफेंस, स्थानीय गोताखोर और मछुआरे मिलकर खोज अभियान चला रहे हैं। करीब 10 सदस्यों की टीम दो नावों से रात तक सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए है।
नाविक के खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है?
हादसे के बाद नाविक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और उसके खिलाफ कार्रवाई की संभावना है।
संगमेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में माही, अनास और जाखम नदियों के संगम पर स्थित है। कथित तौर पर यह मंदिर साल में करीब 8 महीने पानी में डूबा रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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