बरेली में डॉक्टर पति पर दहेज प्रताड़ना और ट्रिपल तलाक का मुकदमा, थाना कैंट में एफआईआर दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के बरेली में एक विवाहित महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके डॉक्टर पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के विरुद्ध दहेज प्रताड़ना और ट्रिपल तलाक के आरोप में थाना कैंट में मुकदमा दर्ज किया है। 11 जुलाई को दर्ज इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत कार्रवाई की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस कमिश्नर आशुतोष शिवम ने बताया कि पीड़िता ने शुक्रवार को थाना कैंट में तहरीर दी, जिसमें उल्लेख किया गया कि वर्ष 2019 में उत्तराखंड में उसका निकाह हुआ था। महिला के अनुसार, उसके डॉक्टर पति द्वारा लगातार उसकी पिटाई की जाती रही। इसके अतिरिक्त जेठ और जेठानियों सहित ससुराल के अन्य सदस्यों ने भी उसके साथ मारपीट की।
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, पीड़िता को दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से प्रताड़ित किया गया। इसी के साथ उसे अलग-अलग स्थानों पर तीन तलाक भी दिया गया, जो मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत दंडनीय अपराध है।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के आधार पर BNS की सुसंगत धाराओं, दहेज प्रतिषेध अधिनियम तथा मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया है। पुलिस कमिश्नर आशुतोष शिवम ने बताया कि मामले की जाँच जारी है और अन्य आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जा रहे हैं।
झारखंड में भी दहेज उत्पीड़न का मामला
इसी बीच, झारखंड के गिरिडीह जिले के हीरोडीह थाना क्षेत्र से भी दहेज उत्पीड़न से जुड़ी एक दुखद घटना सामने आई। भूचारोबाद (आजाद नगर) निवासी रजिया खातून की विवाह के करीब एक माह बाद ही गुरुवार की शाम संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी शादी हीरोडीह थाना क्षेत्र के कुरूमडीहा गांव के अब्जल अंसारी से हुई थी।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष मोटरसाइकिल की माँग कर रहा था और माँग पूरी न होने पर रजिया को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। परिजनों ने दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाया है। शुक्रवार को परिजनों और ग्रामीणों ने शव के साथ जमुआ-खोरीमहुआ मुख्य मार्ग जाम कर ससुराल पक्ष की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जाँच की माँग की। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जाम समाप्त हुआ।
आम जनता पर असर
ये दोनों मामले दहेज उत्पीड़न की उस व्यापक समस्या को उजागर करते हैं जो सामाजिक और आर्थिक सीमाओं के पार फैली है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत ट्रिपल तलाक को आपराधिक घोषित किए जाने के बावजूद ऐसी घटनाएँ रिपोर्ट होती रहती हैं।
क्या होगा आगे
बरेली मामले में पुलिस जाँच जारी है और आरोपी पक्ष के विरुद्ध गिरफ्तारी की कार्रवाई संभावित है। गिरिडीह मामले में पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का संकेत दिया है। दोनों मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए स्थानीय प्रशासन पर दबाव बना हुआ है।