3 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र सूखा: बावनकुले ने जालना-छत्रपति संभाजीनगर में किसानों से मिलकर दिया हरसंभव मदद का आश्वासन

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महाराष्ट्र सूखा: बावनकुले ने जालना-छत्रपति संभाजीनगर में किसानों से मिलकर दिया हरसंभव मदद का आश्वासन

सारांश

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 2 अक्टूबर को जालना और छत्रपति संभाजीनगर के सूखाग्रस्त खेतों का जायजा लिया — तुअर, कपास, मौसंबी और हल्दी की फसलें संकट में हैं। किसानों को सरकारी मदद का भरोसा मिला, अधिकारियों को त्वरित सर्वेक्षण के निर्देश।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 2 अक्टूबर 2026 को जालना और छत्रपति संभाजीनगर के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
बदनापुर तालुका के वरुडी गांव में खेतों में जाकर सूखे की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया।
तुअर, कपास, मौसंबी के बाग और हिंगोली में हल्दी की फसलें बुरी तरह प्रभावित हैं।
ग्रामीणों ने चारा कैंप के बजाय सीधे ग्राम पंचायतों को पशु-संख्या के आधार पर चारा उपलब्ध कराने की माँग रखी।
अधिकारियों को दोनों जिलों में नुकसान का शीघ्र और सटीक सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए।

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 2 अक्टूबर 2026 को जालना और छत्रपति संभाजीनगर जिलों के सूखा प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने फसलों और फलों के बागों को हुए नुकसान का जायजा लिया, प्रभावित किसानों से सीधी बातचीत की और संबंधित अधिकारियों को नुकसान का त्वरित एवं सटीक आकलन करने के निर्देश दिए।

जालना दौरे का विवरण

जालना जिले में मंत्री बावनकुले ने बदनापुर तालुका के वरुडी गांव का दौरा किया और खेतों में जाकर सूखे की गंभीरता का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। उनके साथ विधायक नारायण कुचे, अतिरिक्त जिलाधिकारी रमेश मिसल, पूर्व जिला अध्यक्ष बद्रीनाथ पाठाडे, जिला महासचिव अनिलराव कोलते पाटिल, घनसावंगी विधानसभा क्षेत्र प्रमुख सतीश घाडगे पाटिल समेत स्थानीय पदाधिकारी और नागरिक मौजूद रहे।

मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि तुअर और कपास की फसलें समाप्ति की कगार पर हैं, जबकि पानी की भारी कमी के चलते फलों के बाग सूखते जा रहे हैं। मौसंबी की खेती पर सूखे का विशेष रूप से गंभीर असर पड़ा है और हिंगोली में हल्दी की फसल को भी उल्लेखनीय नुकसान हुआ है।

चारा वितरण पर ग्रामीणों की माँग

बावनकुले ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण चाहते हैं कि केंद्रीय चारा कैंप स्थापित करने के बजाय ग्राम पंचायतों को उनके यहाँ उपस्थित पशुओं की संख्या के आधार पर सीधे चारा उपलब्ध कराया जाए, ताकि पंचायतें स्वयं वितरण का काम संभाल सकें।

मंत्री ने कहा कि यह विकेंद्रीकृत व्यवस्था अधिक प्रभावी और व्यावहारिक हो सकती है। उन्होंने अधिकारियों को इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए।

छत्रपति संभाजीनगर में निरीक्षण

जालना के बाद मंत्री बावनकुले छत्रपति संभाजीनगर जिले में सतना फाटा के निकट सूखा प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं। इस दौरान विधायक अनुराधा चव्हाण, विधायक एनटी कुचे, करमाड कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष रामबाबा शेलके, भाऊराव मुले, सुदाम थोम्ब्रे और सतीश घाटगे पाटिल सहित स्थानीय पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सरकार की प्रतिक्रिया और आश्वासन

मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने किसानों को स्पष्ट रूप से भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ मज़बूती से खड़ी है और हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। दोनों जिलों में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में हुए कृषि नुकसान का शीघ्र एवं सटीक सर्वेक्षण पूरा किया जाए।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मराठवाड़ा क्षेत्र में कमज़ोर मानसून के कारण बड़े पैमाने पर फसल नुकसान की आशंका जताई जा रही है। आने वाले हफ्तों में सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर राहत उपायों की रूपरेखा तय होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि सर्वेक्षण के बाद राहत राशि किसानों तक कितनी जल्दी पहुँचती है — महाराष्ट्र में पिछले सूखा-राहत चक्रों में नौकरशाही विलंब एक बड़ी समस्या रहा है। ग्रामीणों की विकेंद्रीकृत चारा वितरण की माँग व्यावहारिक है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। मराठवाड़ा की मौसंबी और हल्दी जैसी नकदी फसलें छोटे किसानों की आजीविका की रीढ़ हैं — इनके नुकसान की भरपाई महज आश्वासनों से नहीं होगी, बल्कि समयबद्ध और पारदर्शी मुआवज़े की दरकार है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रशेखर बावनकुले का जालना और छत्रपति संभाजीनगर दौरा क्यों हुआ?
महाराष्ट्र मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 2 अक्टूबर 2026 को इन दोनों जिलों में सूखे से प्रभावित फसलों और फलों के बागों के नुकसान का जायजा लेने के लिए दौरा किया। उन्होंने किसानों से सीधी बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को त्वरित सर्वेक्षण के निर्देश दिए।
महाराष्ट्र के इन जिलों में सूखे से कौन-सी फसलें प्रभावित हुई हैं?
जालना और छत्रपति संभाजीनगर में तुअर, कपास और मौसंबी की फसलें गंभीर रूप से प्रभावित हैं, जबकि पानी की कमी से फलों के बाग सूख रहे हैं। हिंगोली में हल्दी की फसल को भी उल्लेखनीय नुकसान हुआ है।
किसानों ने चारा वितरण को लेकर क्या माँग रखी है?
ग्रामीणों ने केंद्रीय चारा कैंप स्थापित करने के बजाय ग्राम पंचायतों को उनके पशुओं की संख्या के आधार पर सीधे चारा उपलब्ध कराने की माँग रखी है। मंत्री बावनकुले ने इस सुझाव को व्यावहारिक बताते हुए अधिकारियों को इस पर विचार करने के निर्देश दिए।
महाराष्ट्र सरकार सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए क्या कदम उठा रही है?
मंत्री बावनकुले ने दोनों जिलों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का शीघ्र और सटीक सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया गया है, जिसकी रूपरेखा सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।
जालना दौरे में कौन-कौन से अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल थे?
जालना दौरे में विधायक नारायण कुचे, अतिरिक्त जिलाधिकारी रमेश मिसल, पूर्व जिला अध्यक्ष बद्रीनाथ पाठाडे और जिला महासचिव अनिलराव कोलते पाटिल सहित कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। छत्रपति संभाजीनगर दौरे में विधायक अनुराधा चव्हाण, विधायक एनटी कुचे और करमाड कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष रामबाबा शेलके भी साथ थे।
राष्ट्र प्रेस
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