महाराष्ट्र सूखा: बावनकुले ने जालना-छत्रपति संभाजीनगर में किसानों से मिलकर दिया हरसंभव मदद का आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 2 अक्टूबर 2026 को जालना और छत्रपति संभाजीनगर जिलों के सूखा प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने फसलों और फलों के बागों को हुए नुकसान का जायजा लिया, प्रभावित किसानों से सीधी बातचीत की और संबंधित अधिकारियों को नुकसान का त्वरित एवं सटीक आकलन करने के निर्देश दिए।
जालना दौरे का विवरण
जालना जिले में मंत्री बावनकुले ने बदनापुर तालुका के वरुडी गांव का दौरा किया और खेतों में जाकर सूखे की गंभीरता का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। उनके साथ विधायक नारायण कुचे, अतिरिक्त जिलाधिकारी रमेश मिसल, पूर्व जिला अध्यक्ष बद्रीनाथ पाठाडे, जिला महासचिव अनिलराव कोलते पाटिल, घनसावंगी विधानसभा क्षेत्र प्रमुख सतीश घाडगे पाटिल समेत स्थानीय पदाधिकारी और नागरिक मौजूद रहे।
मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि तुअर और कपास की फसलें समाप्ति की कगार पर हैं, जबकि पानी की भारी कमी के चलते फलों के बाग सूखते जा रहे हैं। मौसंबी की खेती पर सूखे का विशेष रूप से गंभीर असर पड़ा है और हिंगोली में हल्दी की फसल को भी उल्लेखनीय नुकसान हुआ है।
चारा वितरण पर ग्रामीणों की माँग
बावनकुले ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण चाहते हैं कि केंद्रीय चारा कैंप स्थापित करने के बजाय ग्राम पंचायतों को उनके यहाँ उपस्थित पशुओं की संख्या के आधार पर सीधे चारा उपलब्ध कराया जाए, ताकि पंचायतें स्वयं वितरण का काम संभाल सकें।
मंत्री ने कहा कि यह विकेंद्रीकृत व्यवस्था अधिक प्रभावी और व्यावहारिक हो सकती है। उन्होंने अधिकारियों को इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए।
छत्रपति संभाजीनगर में निरीक्षण
जालना के बाद मंत्री बावनकुले छत्रपति संभाजीनगर जिले में सतना फाटा के निकट सूखा प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं। इस दौरान विधायक अनुराधा चव्हाण, विधायक एनटी कुचे, करमाड कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष रामबाबा शेलके, भाऊराव मुले, सुदाम थोम्ब्रे और सतीश घाटगे पाटिल सहित स्थानीय पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सरकार की प्रतिक्रिया और आश्वासन
मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने किसानों को स्पष्ट रूप से भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ मज़बूती से खड़ी है और हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। दोनों जिलों में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में हुए कृषि नुकसान का शीघ्र एवं सटीक सर्वेक्षण पूरा किया जाए।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मराठवाड़ा क्षेत्र में कमज़ोर मानसून के कारण बड़े पैमाने पर फसल नुकसान की आशंका जताई जा रही है। आने वाले हफ्तों में सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर राहत उपायों की रूपरेखा तय होने की संभावना है।