बंगाल चुनाव-बाद हिंसा 2021: पॉक्सो कोर्ट ने करीम शेख और सैयद तरजेन हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई
सारांश
मुख्य बातें
मुर्शिदाबाद के जंगीपुर स्थित पॉक्सो कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को 2021 के चुनाव-बाद हिंसा से जुड़े एक गंभीर यौन अपराध मामले में दोनों दोषियों — करीम शेख और सैयद तरजेन हुसैन — को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अन्य अपराधों के लिए भी उन्हें अलग-अलग अवधि का कठोर कारावास दिया, जो सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी।
मामले की पृष्ठभूमि
वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य में व्यापक चुनाव-बाद हिंसा हुई थी। इस हिंसा के दौरान हत्या और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की अनेक घटनाएँ सामने आईं। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त 2021 के अपने आदेश में निर्देश दिया था कि हत्या तथा दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े मामलों की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए।
सीबीआई की जाँच और आरोप
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में CBI की एससीबी कोलकाता इकाई ने 27 मई 2022 को यह मामला दर्ज किया। यह प्रकरण मूल रूप से मुर्शिदाबाद के फराक्का पुलिस स्टेशन में पीड़िता के पिता की लिखित शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोपियों पर आईपीसी की धारा 376डीए (सामूहिक दुष्कर्म), धारा 365 (अपहरण) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत आरोप तय किए गए थे।
अदालत का फैसला और मुआवजा
विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने 28 जुलाई 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। 29 जुलाई 2026 को सजा सुनाते हुए पॉक्सो कोर्ट ने करीम शेख और सैयद तरजेन हुसैन दोनों को उम्रकैद की सजा दी। मुर्शिदाबाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पीड़िता को ₹5 लाख का मुआवजा दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, आरोपी की एम्बुलेंस की बिक्री से प्राप्त राशि भी पीड़िता को दी जाएगी।
आम जनता और न्याय-व्यवस्था पर असर
यह फैसला उन दर्जनों मामलों में से एक है जो 2021 की चुनाव-बाद हिंसा के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर CBI को सौंपे गए थे। गौरतलब है कि इस हिंसा में बड़ी संख्या में महिलाएँ और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग प्रभावित हुए थे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में न्यायिक जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। अदालत का यह निर्णय पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। CBI अभी भी 2021 की हिंसा से जुड़े कई अन्य मामलों की जाँच जारी रखे हुए है। पीड़िता के परिवार को मुआवजे की राशि और एम्बुलेंस बिक्री से प्राप्त धनराशि दिलाने की प्रक्रिया अदालत की निगरानी में आगे बढ़ेगी।