आईटीआई लिमिटेड की ₹1,685 करोड़ की 44.03 एकड़ भूमि ई-नीलामी रोकने की मांग, कांग्रेस नेता ने केंद्र-कर्नाटक को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता रमेश बाबू ने 22 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार को पत्र लिखकर बेंगलुरु के कृष्णराजपुरम (केआर पुरम) स्थित आईटीआई लिमिटेड की 44.03 एकड़ भूमि की प्रस्तावित ई-नीलामी को तत्काल रद्द या स्थगित करने की माँग की है। राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम (NLMC) के माध्यम से प्रस्तावित इस नीलामी की आरक्षित कीमत ₹1,685.40 करोड़ निर्धारित की गई है।
किन्हें लिखा गया पत्र
रमेश बाबू ने यह पत्र केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को संबोधित किया है। तीनों को एक साथ पत्र लिखना इस मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, क्योंकि केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकारें हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भूमि का महत्व
पत्र में उल्लेख किया गया है कि इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज (ITI) लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1948 में तत्कालीन मैसूर राज्य में एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) के रूप में हुई थी। उस समय मैसूर सरकार ने रोज़गार सृजन और सार्वजनिक हित में इस रणनीतिक उद्योग की स्थापना के लिए लगभग 400 एकड़ भूमि रियायती दरों पर अथवा निःशुल्क आवंटित की थी। रमेश बाबू के अनुसार, वर्षों के दौरान अतिक्रमण, हस्तांतरण और प्रशासनिक कारणों से आईटीआई लिमिटेड अपने मूल भूमि क्षेत्र के बड़े हिस्से पर नियंत्रण खो चुकी है।
पहले भी हो चुकी है भूमि बिक्री
पत्र के अनुसार, केंद्र सरकार की संपत्ति मुद्रीकरण योजना के तहत आईटीआई लिमिटेड ने हाल ही में कृष्णराजपुरम स्थित 21 एकड़ भूमि केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग को लगभग ₹914.31 करोड़ में बेची थी। इस बिक्री का पंजीकरण 2 जुलाई 2026 के आसपास हुआ बताया गया है। अब कंपनी द्वारा NLMC के माध्यम से 44.03 एकड़ अतिरिक्त भूमि की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
भूमि स्वामित्व पर उठाए सवाल
रमेश बाबू ने दावा किया है कि नीलामी के लिए प्रस्तावित भूमि के कुछ हिस्से कथित तौर पर राज्य सरकार के नाम दर्ज हैं, जिन्हें वैध रूप से आईटीआई लिमिटेड या केंद्र सरकार द्वारा बेचा नहीं जा सकता। उनके अनुसार, केवल राजस्व जुटाने के उद्देश्य से इस भूमि को निजी कंपनियों या डेवलपर्स को सौंपना उस मूल सार्वजनिक उद्देश्य के विपरीत है, जिसके लिए यह आवंटित की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि बेंगलुरु के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित मूल्यवान सरकारी भूमि की एकमुश्त बिक्री भविष्य में सार्वजनिक परियोजनाओं, औद्योगिक विकास और रोज़गार सृजन की संभावनाओं को स्थायी रूप से समाप्त कर सकती है।
माँगें और वैकल्पिक सुझाव
कांग्रेस नेता ने माँग की है कि ई-नीलामी प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और भूमि के संबंध में केंद्र तथा कर्नाटक सरकार द्वारा संयुक्त समीक्षा कराई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस भूमि का उपयोग संयुक्त केंद्रीय-राज्य औद्योगिक परियोजना, कौशल विकास केंद्र, मैन्युफैक्चरिंग हब या अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए किया जाए। गौरतलब है कि तकनीकी बोलियाँ जमा करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर 2026 निर्धारित है, जिसे देखते हुए रमेश बाबू ने तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई है।