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बेंगलुरु: उप्परपेट पुलिस ने सिर्फ 16 मिनट में लापता 3 वर्षीय बच्चे को सुरक्षित बचाया

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बेंगलुरु: उप्परपेट पुलिस ने सिर्फ 16 मिनट में लापता 3 वर्षीय बच्चे को सुरक्षित बचाया

सारांश

बेंगलुरु में 24 मई की शाम एक तीन वर्षीय बच्चा माता-पिता से बिछड़ा — और महज 16 मिनट में 'होयसला-77' टीम ने उसे सकुशल लौटाया। 'नम्मा 112' से शुरू हुई इस रेस में एएसआई नागराजा जे. और एपीसी बालप्पा की तत्परता ने साबित किया कि सही तंत्र और सतर्कता मिलें तो हर सेकंड मायने रखता है।

मुख्य बातें

24 मई 2025 की शाम 6:02 बजे बेंगलुरु के उप्परपेट क्षेत्र में एक तीन वर्षीय बच्चा माता-पिता से बिछड़ गया।
ट्रैवल ऑफिस स्टाफ ने तुरंत आपातकालीन हेल्पलाइन 'नम्मा 112' पर सूचना दी।
'होयसला-77' टीम के एएसआई नागराजा जे.
और एपीसी बालप्पा ने मात्र 16 मिनट में बच्चे को सुरक्षित बचाया।
बच्चे की पहचान की पुष्टि के बाद उसे माता-पिता को सौंपा गया।
बेंगलुरु पुलिस ने नागरिकों से भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बच्चों पर नज़र रखने और आपात स्थिति में 'नम्मा 112' डायल करने की अपील की।

बेंगलुरु के उप्परपेट पुलिस स्टेशन की 'होयसला-77' गश्ती टीम ने 24 मई 2025 की शाम एक तीन वर्षीय लापता बच्चे को मात्र 16 मिनट के भीतर सकुशल उसके माता-पिता के पास पहुँचाया। शहर के एक ट्रैवल ऑफिस के पास हुई इस घटना में पुलिस की तत्काल प्रतिक्रिया और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय ने एक संभावित गंभीर स्थिति को चंद मिनटों में सुलझा दिया।

घटनाक्रम: कैसे गायब हुआ बच्चा

24 मई की शाम लगभग 6:02 बजे, उप्परपेट पुलिस स्टेशन क्षेत्र में स्थित एक ट्रैवल ऑफिस के पास एक परिवार यात्रा कर रहा था। इसी दौरान तीन वर्षीय बच्चा अचानक माता-पिता की नजरों से ओझल हो गया। ट्रैवल ऑफिस के कर्मचारियों ने बिना देरी किए आपातकालीन हेल्पलाइन 'नम्मा 112' पर सूचना दी।

यह ऐसे समय में आया जब शाम की भीड़-भाड़ के बीच बच्चे का भटकना परिवार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। ट्रैवल ऑफिस स्टाफ की सतर्कता इस पूरे बचाव अभियान की पहली कड़ी साबित हुई।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

'नम्मा 112' के कर्मचारियों ने सूचना मिलते ही उप्परपेट पुलिस स्टेशन की 'होयसला-77' गश्ती टीम को तुरंत अलर्ट किया। टीम में तैनात एएसआई नागराजा जे. और एपीसी बालप्पा घटनास्थल पर पहुँचे और बच्चे की उम्र, पहनावे तथा अन्य ज़रूरी विवरण एकत्र कर आसपास के इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया।

पुलिसकर्मियों की तेज़ी और व्यवस्थित खोज का नतीजा यह रहा कि बच्चा बहुत कम समय में मिल गया। पहचान की पुष्टि के बाद बच्चे को सुरक्षित रूप से उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। राहत मिलने पर परिवार ने पुलिस टीम का आभार जताया।

आपातकालीन तंत्र की भूमिका

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा के लिए इस तरह का त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेंगलुरु पुलिस का कहना है कि शहर में बच्चों के लापता होने की सूचना मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाती है। गौरतलब है कि 'नम्मा 112' और 'होयसला' गश्ती इकाइयों के बीच यह समन्वय बेंगलुरु के आपातकालीन ढाँचे की रीढ़ है।

नागरिकों से अपील

बेंगलुरु पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बच्चों पर विशेष ध्यान दें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत 'नम्मा 112' पर कॉल करें। पुलिस के अनुसार, नागरिकों की सतर्कता और आपातकालीन सेवाओं की तेज़ प्रतिक्रिया मिलकर ऐसी घटनाओं को बड़ी त्रासदी बनने से रोक सकती है।

क्या होगा आगे

उप्परपेट पुलिस की इस कार्रवाई ने शहर में पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के प्रति जनविश्वास को मज़बूत किया है। यह ऑपरेशन एक मिसाल बन गया है कि सही समय पर सही कदम उठाने से बड़े संकट को टाला जा सकता है। बेंगलुरु पुलिस का 'होयसला' कार्यक्रम आगे भी इसी तत्परता के साथ कार्य करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

हेल्पलाइन और गश्ती दल — एक साथ सक्रिय हो। बेंगलुरु जैसे महानगर में जहाँ भीड़ और यातायात हर मिनट को भारी बनाते हैं, 'होयसला' कार्यक्रम की तत्परता एक मॉडल है जिसे अन्य शहरों को अपनाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या यही तेज़ी उन मामलों में भी दिखती है जहाँ परिवार कम पढ़े-लिखे हों या हेल्पलाइन नंबर न जानते हों — वहाँ तंत्र की असली परीक्षा होती है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में 3 वर्षीय बच्चे को कैसे बचाया गया?
24 मई 2025 की शाम उप्परपेट क्षेत्र में बच्चे के लापता होने की सूचना 'नम्मा 112' को दी गई, जिसके बाद 'होयसला-77' टीम के एएसआई नागराजा जे. और एपीसी बालप्पा ने मात्र 16 मिनट में बच्चे को खोजकर माता-पिता को सौंपा।
'नम्मा 112' क्या है और यह कैसे काम करता है?
'नम्मा 112' बेंगलुरु की एकीकृत आपातकालीन हेल्पलाइन है जो पुलिस, एम्बुलेंस और अग्निशमन सेवाओं को एक नंबर से जोड़ती है। इस मामले में हेल्पलाइन ने तुरंत नज़दीकी गश्ती टीम को अलर्ट किया, जिससे त्वरित बचाव संभव हुआ।
बेंगलुरु में बच्चा लापता हो जाए तो क्या करें?
तुरंत 'नम्मा 112' पर कॉल करें और बच्चे की उम्र, पहनावे तथा आखिरी बार देखे जाने की जगह की जानकारी दें। बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, जल्दी सूचना देने से बचाव की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
'होयसला' गश्ती टीम क्या है?
'होयसला' बेंगलुरु पुलिस की मोबाइल पेट्रोलिंग इकाई है जो शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चौबीसों घंटे गश्त करती है। 'होयसला-77' इसी कार्यक्रम की एक टीम है जिसने इस बचाव अभियान को अंजाम दिया।
क्या बेंगलुरु में बच्चों के लापता होने की घटनाएँ आम हैं?
बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बच्चों के बिछड़ने की घटनाएँ होती रहती हैं और इन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों पर विशेष नज़र रखें।
राष्ट्र प्रेस
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