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पीएम स्वनिधि योजना से बेंगलुरु की निंगम्मा बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, मोदी ने 'मन की बात' में की तारीफ

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पीएम स्वनिधि योजना से बेंगलुरु की निंगम्मा बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, मोदी ने 'मन की बात' में की तारीफ

सारांश

घर के बर्तनों में खाना बनाकर मेज पर बेचने से लेकर तीन बच्चों को स्कूल भेजने तक — बेंगलुरु की टीएस निंगम्मा की कहानी पीएम स्वनिधि योजना की असली ताकत बयान करती है। ₹10,000 के पहले ऋण से शुरू हुआ सफर आज एक फलते-फूलते इडली-डोसा कारोबार तक पहुँच गया है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु की रेहड़ी विक्रेता टीएस निंगम्मा ने पीएम स्वनिधि योजना के तहत ₹10,000 , ₹20,000 और ₹50,000 के ऋण लिए।
पहले ऋण से ठेला और बर्तन खरीदे; बाद के ऋणों से दुकान का विस्तार किया और कर्मचारी रखे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त 2026 को 'मन की बात' में निंगम्मा की उद्यमशीलता की सराहना की।
निंगम्मा अब अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं।
पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में शुरू हुई; बिना गारंटी के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आसान ऋण देती है।

बेंगलुरु की रेहड़ी विक्रेता टीएस निंगम्मा कभी इतनी आर्थिक तंगी में थीं कि घर के बर्तनों में खाना बनाकर एक मेज पर रखकर बेचना पड़ता था। लेकिन प्रधानमंत्री स्वनिधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत मिले ऋण ने उनकी और उनके परिवार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। आज उनका इडली, डोसा और सांभर का कारोबार फल-फूल रहा है और परिवार पहले से कहीं अधिक सशक्त है।

मन की बात में मिली पहचान

निंगम्मा की इस प्रेरणादायक यात्रा का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 31 अगस्त 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में किया। उन्होंने निंगम्मा की उद्यमशीलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। प्रधानमंत्री ने बताया कि निंगम्मा ने पीएम स्वनिधि योजना की सहायता से अपनी रेहड़ी को बेहतर बनाया, मेन्यू में नए व्यंजन जोड़े, ग्राहकों की संख्या बढ़ाई और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया।

निंगम्मा ने इस सम्मान पर खुशी जताते हुए कहा, 'मैं बहुत खुश हूँ। प्रधानमंत्री ने हमारे प्रयासों को पहचान दी, इससे पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। मेरे भाई, भाभी, माता-पिता सभी बेहद खुश हैं।'

कैसे बदली ज़िंदगी — ऋण से उद्यम तक

निंगम्मा ने बताया कि योजना के तहत उन्होंने क्रमशः ₹10,000, ₹20,000 और ₹50,000 का ऋण लिया। पहले ₹10,000 के ऋण से उन्होंने एक ठेला और नए बर्तन खरीदे। जैसे-जैसे कारोबार बढ़ा, बच्चों की स्कूल फीस भरी गई और दूसरे ऋण से दुकान का विस्तार कर कुछ कर्मचारी भी रखे गए।

उन्होंने कहा, 'ऋण लेने से पहले मेरे पास दुकान लगाने के लिए कुछ नहीं था। घर के बर्तनों में खाना बनाकर एक मेज पर रखकर बेचती थी।' आज वह अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं — जो कभी उनके लिए एक सपना मात्र था।

पीएम स्वनिधि योजना: पृष्ठभूमि और महत्व

पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में शुरू की गई थी। यह सड़क किनारे कारोबार करने वाले रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी के आसान ऋण उपलब्ध कराने की एक विशेष पहल है। गौरतलब है कि समय के साथ यह योजना केवल एक ऋण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही — यह लाखों छोटे कारोबारियों के लिए वित्तीय सशक्तीकरण, डिजिटल समावेशन और सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब असंगठित क्षेत्र के विक्रेता पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर रहते हैं और उन्हें ऊँची ब्याज दरों पर अनौपचारिक ऋण लेने पर मजबूर होना पड़ता है। निंगम्मा जैसी कहानियाँ इस योजना की ज़मीनी सफलता की झलक देती हैं।

आम जनता पर असर

निंगम्मा की कहानी उन लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की प्रतिनिधि है जो पीएम स्वनिधि योजना से लाभान्वित हुए हैं। योजना के तहत मिलने वाले ऋण न केवल व्यवसाय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, परिवार की सेहत और जीवनस्तर को ऊँचा उठाने में भी योगदान दे रहे हैं।

निंगम्मा के अनुभव से स्पष्ट है कि छोटे, चरणबद्ध ऋण — यदि सही समय पर मिलें — किसी परिवार की आर्थिक नींव को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले समय में इस योजना का विस्तार और अधिक शहरी एवं अर्ध-शहरी विक्रेताओं तक होने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक सफलता की कहानी को नीतिगत सफलता का प्रमाण मान लेना जल्दबाजी होगी। पीएम स्वनिधि योजना के तहत कितने लाभार्थियों ने पहले ऋण से आगे बढ़कर तीसरे चरण तक की यात्रा पूरी की — यह आँकड़ा अभी भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। 'मन की बात' में व्यक्तिगत कहानियों का चयन सरकार की संचार रणनीति का हिस्सा है, जो योजना की व्यापक पहुँच और चूक दर (default rate) पर ध्यान हटाता है। असली कसौटी यह है कि क्या योजना असंगठित क्षेत्र के विक्रेताओं को औपचारिक अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप से शामिल कर पाई है — या अधिकांश लाभार्थी अभी भी पहले ₹10,000 के दायरे में ही हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है और यह कैसे काम करती है?
पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में शुरू की गई एक केंद्रीय पहल है, जो सड़क किनारे कारोबार करने वाले रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी के ₹10,000 से शुरू होकर ₹50,000 तक का ऋण उपलब्ध कराती है। समय पर पुनर्भुगतान करने पर लाभार्थी अगले चरण के ऋण के लिए पात्र होते हैं।
टीएस निंगम्मा ने पीएम स्वनिधि योजना से क्या हासिल किया?
बेंगलुरु की टीएस निंगम्मा ने योजना के तहत ₹10,000, ₹20,000 और ₹50,000 के ऋण लिए। इससे उन्होंने ठेला, बर्तन खरीदे, इडली-डोसा-सांभर का कारोबार खड़ा किया, कर्मचारी रखे और अपने तीन बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की।
PM मोदी ने 'मन की बात' में निंगम्मा का जिक्र क्यों किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त 2026 को 'मन की बात' कार्यक्रम में निंगम्मा की उद्यमशीलता और पीएम स्वनिधि योजना के ज़रिए उनकी आत्मनिर्भरता की यात्रा को उजागर किया। उन्होंने इसे योजना की सफलता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
पीएम स्वनिधि योजना से कौन लाभ उठा सकता है?
यह योजना मुख्य रूप से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए है। इसमें फल-सब्जी, खाने-पीने की चीजें, कपड़े और अन्य सामान बेचने वाले छोटे कारोबारी शामिल हैं, जो पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से वंचित रहते हैं।
पीएम स्वनिधि योजना का रेहड़ी विक्रेताओं के जीवन पर क्या दीर्घकालिक असर है?
योजना के तहत मिलने वाले ऋण न केवल व्यवसाय विस्तार में सहायक हैं, बल्कि डिजिटल लेनदेन, सामाजिक सुरक्षा लाभ और वित्तीय साक्षरता तक पहुँच भी सुनिश्चित करते हैं। निंगम्मा जैसे उदाहरण दर्शाते हैं कि चरणबद्ध ऋण परिवार की शिक्षा और जीवनस्तर में भी सुधार ला सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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