भवानीपुर चुनाव याचिका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी की अर्जी पर सुनवाई 6 सप्ताह टाली, दस्तावेज़ आदान-प्रदान का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार, 4 अगस्त को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा भवानीपुर विधानसभा के चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। न्यायालय ने सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेज़ों की प्रतियाँ परस्पर उपलब्ध कराने और अदालत में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार के रूप में भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ा था। उनके विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मैदान में थे। इस चुनाव में ममता बनर्जी 15,105 मतों के अंतर से पराजित हुईं।
इसके बाद ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर परिणाम को चुनौती दी। उनका तर्क है कि मतगणना के पहले 12 राउंड तक वे शुभेंदु अधिकारी से काफी आगे थीं, किंतु उसके बाद रुझान अचानक पलट गया। उन्होंने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जिसे वे इस अप्रत्याशित बदलाव का कारण मानती हैं।
मंगलवार की सुनवाई में क्या हुआ
मामले की सुनवाई जस्टिस गौरांग कांत की एकल पीठ में हुई। शुभेंदु अधिकारी की ओर से पेश अधिवक्ता जॉयदीप कर ने अदालत से अपना लिखित पक्ष दाखिल करने हेतु चार सप्ताह का समय माँगा।
ममता बनर्जी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और चार बार के लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने इस अनुरोध का विरोध किया। उन्होंने कहा कि चुनाव याचिकाओं में न्यायिक प्रक्रिया पाँच वर्ष के भीतर पूरी न होना एक स्थापित चलन बन चुका है। कल्याण बनर्जी ने अदालत से आग्रह किया, 'यह एक खराब परंपरा है। कृपया कम-से-कम इस मामले में एक उदाहरण स्थापित करने में मदद करें।'
इस पर शुभेंदु अधिकारी के वकील ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और चुनाव से जुड़े अन्य दस्तावेज़ सुरक्षित रखे गए हैं, इसलिए सुनवाई में अनावश्यक विलंब का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत के निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस गौरांग कांत ने निर्देश दिया कि सभी पक्ष चार सप्ताह के भीतर अपने पास उपलब्ध आवश्यक दस्तावेज़ों की प्रतियाँ एक-दूसरे को सौंपें और इस संदर्भ में शपथपत्र दाखिल करें। न्यायालय ने रजिस्ट्रार जनरल को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि निर्धारित दस्तावेज़ सभी संबंधित पक्षों तक विधिवत पहुँचें। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
आगे क्या
यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में व्यापक रुचि का विषय बना हुआ है, क्योंकि ममता बनर्जी का राजनीतिक भविष्य और उनके चुनावी आरोपों की न्यायिक जाँच दोनों इस याचिका के परिणाम से जुड़े हैं। अगली सुनवाई में दस्तावेज़ों के आदान-प्रदान के बाद मामले की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।