ओडिशा सिलिकॉन वैली: कटक के नारज में 870 एकड़ पर टेक हब, ₹23,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 सम्मेलन में घोषणा की कि राज्य सरकार कटक जिले के नारज में 870 एकड़ भूमि पर पूर्वी भारत की पहली 'ओडिशा सिलिकॉन वैली' विकसित करेगी। सम्मेलन के दौरान राज्य को लगभग ₹23,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 6,100 रोज़गार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
परियोजना की रूपरेखा
ओडिशा सिलिकॉन वैली में प्रमुख सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, नारज का यह क्षेत्र कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के लिए एक रणनीतिक रूप से अनुकूल स्थान है। कटक-भुवनेश्वर शहरी गलियारे से निर्बाध संपर्क के साथ यह स्थल पारादीप और धामरा जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक बहुआयामी पहुँच और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से भी जुड़ा हुआ है।
सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधाओं और असेंबली इकाइयों को पर्याप्त पानी व बिजली की आवश्यकता होती है। महानदी नदी के निकट स्थित होने के कारण नारज औद्योगिक जल आपूर्ति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भौगोलिक लाभ प्रदान करता है।
निवेश प्रस्ताव और रोज़गार संभावना
सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान ओडिशा को ₹23,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। राज्य सरकार के अनुसार, ये प्रस्ताव 6,100 नए रोज़गार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं। यह सेमीकॉन 2.0 के अंतर्गत एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन निर्मित करने की दिशा में ओडिशा के बढ़ते कदम का संकेत है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को तेज़ी से बढ़ावा दे रही है और कई राज्य इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की होड़ में हैं। ओडिशा का यह कदम उसे पूर्वी भारत में एक प्रमुख प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री माझी ने वैश्विक और घरेलू सेमीकंडक्टर कंपनियों, उद्योग निकायों तथा जापान, स्वीडन और ताइवान के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ कई उच्च-स्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों में क्वाडक्वांटम के साथ SiC सब्सट्रेट वेफर्स के उत्पादन हेतु एक सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित करने के लिए आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
ओडिशा पवेलियन में क्या दिखा
सम्मेलन में ओडिशा पवेलियन में RIR Power, SiCSEM, 3DGS, ARF Design जैसी कंपनियों के साथ-साथ NIT राउरकेला और PMEC ब्रह्मपुर जैसे शैक्षणिक संस्थानों की परियोजनाओं का प्रदर्शन किया गया। ये संस्थान 'मेड इन इंडिया' चिप्स के पहले बैच का डिज़ाइन तैयार करने में लगे हैं।
आगे की राह
ओडिशा सरकार का यह कदम राज्य को पारंपरिक खनन और इस्पात उद्योग से आगे बढ़कर उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण की ओर ले जाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। नारज में 'ओडिशा सिलिकॉन वैली' का वास्तविक क्रियान्वयन और निर्धारित निवेश कब ज़मीन पर उतरता है, यह देखना अब अहम होगा।