भाई जगताप ने भाजपा को घेरा: 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू क्यों नहीं हुआ?
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पास न होने के चलते उठ रही आवाजों पर कांग्रेस विधायक भाई जगताप ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र में ऑटो ड्राइवरों के लिए 'मराठी टेस्ट' पर भी अपनी सोच साझा की।
भाई जगताप ने कहा कि जब प्रधानमंत्री देशवासियों से बात करते हैं, तो उन्हें देश की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि पीएम ने कहा था कि महिलाओं को उनका हक न दिलाना सबसे बड़ा पाप है। यह बातें उनके व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं हैं। जब कांग्रेस ने यह विधेयक पेश किया था, तब आपने इसका विरोध क्यों किया था? उस समय 'भ्रूण हत्या' का मुद्दा कहां था?
उन्होंने यह सवाल उठाया कि 2023 में जब यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था, तब आप बहुमत में थे, तो इसे लागू क्यों नहीं किया गया? यह सब केवल राजनीतिक संवाद है और लोग इसे समझ चुके हैं। आज जो भी आरक्षण महिलाओं को मिला है, वह कांग्रेस की देन है। आपने विरोध किया और अब झूठे आंसू बहा रहे हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के डिबेट चैलेंज पर उन्होंने कहा कि डिबेट उन लोगों से की जाती है, जो सच्चाई के साथ बात करें। झूठी बातों पर डिबेट करने में हमें कोई रुचि नहीं है। जब हम यह विधेयक लेकर आए थे, तब आपने इसका विरोध किया था। 2023 में विधेयक पास हुआ, तो इसे लागू क्यों नहीं किया? यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
भाई जगताप ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, और गैस के मुद्दे पर देश ने आपको देख लिया है। किसानों ने आपको झुकने पर मजबूर कर दिया है। सच्चाई जनता जानती है।
पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद यूसीसी लागू करने के जेपी नड्डा के बयान पर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भी यही वादा किया गया था। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर सहित अन्य स्थानों पर यही कहा गया, तो वहां क्यों लागू नहीं हुआ? आप लोग ऐसे वादे करके सत्ता में आ जाते हैं, लेकिन कुछ नहीं करते। बहुत से राज्यों में आपकी सरकार है, वहां तो इसे लागू करना चाहिए।
महाराष्ट्र में ऑटो ड्राइवर के लिए 'मराठी टेस्ट' पर भाई जगताप ने कहा कि मराठी हमारी भाषा है और हमें उस पर गर्व है। हम चाहते हैं कि महाराष्ट्र में रहने वाले लोग मराठी जानें, लेकिन इसे जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता। आज देश के विभिन्न राज्यों के लोग रोजगार के लिए आ रहे हैं। नौकरी देने में कोई रुचि नहीं है। यदि कोई स्वयं रोजगार के लिए आ रहा है तो उसे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसे निर्णय तुरंत नहीं लेने चाहिए, थोड़ा समय देना चाहिए। इसके बाद जो भी निर्णय लेना हो, ले सकते हैं। जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।