शहजाद भट्टी का आईएसआई नेटवर्क ध्वस्त: 14 राज्यों में 200 से अधिक गिरफ्तार, 80 एफआईआर दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 18 अगस्त 2026 को घोषणा की कि सुरक्षा एजेंसियों ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पूर्व पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा संचालित शहजाद भट्टी मॉड्यूल को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया है। 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए समन्वित अभियानों में 200 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और 80 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
मॉड्यूल की कार्यप्रणाली और जटिलता
जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, शहजाद भट्टी मॉड्यूल हाल के वर्षों में सामने आए सबसे जटिल आतंकी नेटवर्कों में से एक था। अधिकारियों ने बताया कि भट्टी आईएसआई द्वारा भारत में बड़े पैमाने पर नेटवर्क संचालित करने के लिए चुने जाने से पहले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर था, जिसने युवाओं के बीच अपनी पहुँच का दुरुपयोग किया।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि भट्टी की रणनीति सोशल मीडिया पर युवाओं की पहचान करने और उनकी मनोवैज्ञानिक कमज़ोरियों — आर्थिक असुरक्षा, व्यक्तिगत समस्याएँ और भावनात्मक अस्थिरता — को भाँपकर उन्हें अपने जाल में फँसाने की थी। अधिकारी के अनुसार, वह संभावित रंगरूटों के मन की गहराई तक जाता था और भावनाओं को समझकर ही उन्हें नेटवर्क से जोड़ता था।
सोलर-पावर्ड कैमरों से पाकिस्तान को लाइव फीड
अधिकारियों ने खुलासा किया कि इस मॉड्यूल ने रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण व भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सोलर-पावर्ड सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए थे और उनसे पाकिस्तान में बैठे आकाओं को लाइव फीड भेजी जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, यह अपनी तरह का पहला मामला था। जब तक इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ, तब तक काफी मात्रा में संवेदनशील लाइव फीड पाकिस्तान पहुँच चुकी थी।
इसके अतिरिक्त, भट्टी द्वारा युवाओं को टारगेटेड किलिंग, आतंकी हमलों की योजना बनाने और हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए भी भर्ती किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, मॉड्यूल की बहु-आयामी प्रकृति ने एजेंसियों के लिए इसकी वास्तविक गतिविधियों का पता लगाना अत्यंत कठिन बना दिया था।
गृह मंत्रालय की भूमिका और अंतर-राज्य समन्वय
अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय की अध्यक्षता में कई उच्च-स्तरीय बैठकें आयोजित की गईं और 14 राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया गया। गृह मंत्री अमित शाह का निर्देश स्पष्ट था — इस मॉड्यूल को शीघ्रातिशीघ्र ध्वस्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसियों को पूर्ण अधिकार दिए गए और इसी समन्वित प्रयास के परिणामस्वरूप यह सफलता मिली।
आगे की कानूनी कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, अगला कदम शहजाद भट्टी को गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत नामित करना होगा। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों से परामर्श के बाद उसे हिरासत में लेने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा जा चुका है।
इसके अलावा, इंटरपोल के साथ तालमेल बिठाकर भट्टी के विरुद्ध लुक-आउट नोटिस और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि इस मॉड्यूल को आईएसआई से जोड़ने के पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं, जिससे इंटरपोल की कार्रवाई में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। यह पूरा अभियान भारत की सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती क्षमता और अंतर-राज्यीय समन्वय की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।