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भोपाल में 15,000 नगर निगम कर्मचारी हड़ताल पर, धनतेरस के दिन कचरे के ढेर से स्वच्छता संकट

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भोपाल में 15,000 नगर निगम कर्मचारी हड़ताल पर, धनतेरस के दिन कचरे के ढेर से स्वच्छता संकट

सारांश

धनतेरस की रात जब भोपाल के घर दीये से रोशन थे, तब सड़कों पर कचरे के ढेर बढ़ रहे थे। 15,000 नगर निगम कर्मचारियों की हड़ताल ने शहर में स्वच्छता संकट खड़ा कर दिया है और अब पेयजल आपूर्ति ठप होने की भी आशंका है।

मुख्य बातें

भोपाल नगर निगम के लगभग 15,000 कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, जिससे धनतेरस (6 नवंबर 2026) के दिन शहर में कचरे के ढेर लग गए।
कचरा उठाने का काम लगातार दूसरे दिन भी ठप; दीपावली के दौरान रोज़ाना 1,000 टन तक कचरा निकलने का अनुमान।
जल विभाग के कर्मचारियों ने 2.30 लाख नल कनेक्शनों की आपूर्ति रोकने की धमकी दी है।
कर्मचारी ₹25,000 मासिक मानदेय, सेवा नियमितीकरण और सरकारी दर्जे की माँग कर रहे हैं।
यूनियन नेताओं ने बातचीत के बावजूद हड़ताल वापस लेने से इनकार किया; मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधी बातचीत की माँग।
हड़ताल का असर मध्य प्रदेश के अन्य शहरी स्थानीय निकायों पर भी पड़ा है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 6 नवंबर 2026 को धनतेरस के अवसर पर स्वच्छता संकट गहरा गया है, जब भोपाल नगर निगम के लगभग 15,000 कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से सड़कों, बाज़ारों और रिहायशी इलाकों में कचरे के ढेर लग गए। कचरा उठाने का काम लगातार दूसरे दिन भी ठप रहा, और दीपावली से पहले घरों की सफाई कर चुके नागरिक अपना कचरा बाहर नहीं फेंक पा रहे हैं।

हड़ताल का दायरा और असर

शुरुआत में यह आंदोलन केवल सफाई कर्मचारियों तक सीमित था, लेकिन अब यह नगर निगम के कई विभागों में फैल चुका है — जिनमें जल आपूर्ति, अग्निशमन सेवा, कंप्यूटर संचालन, बिजली विभाग, भवन निर्माण अनुमति, उद्यान विभाग और अतिक्रमण हटाओ दस्ता शामिल हैं। नगर निगम के कुल 18,000 कर्मचारियों में से लगभग 15,000 इस हड़ताल में शामिल हैं — इनमें करीब 14,000 दैनिक वेतनभोगी और 1,000 आउटसोर्स कर्मचारी हैं, जो 21 जोन और 85 वार्डों में काम करते हैं।

भोपाल में रोज़ाना लगभग 850 टन कचरा निकलता है, और दीपावली के दौरान यह मात्रा बढ़कर करीब 1,000 टन तक पहुँच जाती है। कई इलाकों के निवासियों के अनुसार वे लगभग एक हफ्ते से कचरा उठाने वाली गाड़ियों का इंतज़ार कर रहे हैं। कुछ इलाकों में लोगों ने आस-पास की जगह साफ करने के लिए कचरे को जलाना भी शुरू कर दिया है।

पेयजल संकट की आशंका

सबसे बड़ी चिंता पीने के पानी की आपूर्ति बाधित होने को लेकर है। जल विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई रोकने की धमकी दी है। भोपाल में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं, जिससे त्योहार के दौरान लाखों नागरिकों को भारी परेशानी की आशंका बन गई है। गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में आया है जब दीपावली का उत्सव चरम पर है और पानी की माँग सामान्य से अधिक होती है।

कर्मचारियों की माँगें

हड़ताली कर्मचारी कम से कम ₹25,000 का मासिक मानदेय, वेतन संशोधन, सेवाओं को नियमित करने, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, अनुबंध प्रणाली (कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम) को खत्म करने और अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की माँग कर रहे हैं। गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम मुख्यालय 'अटल भवन' की बिजली काट दी और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया।

प्रशासन और नेतृत्व की प्रतिक्रिया

नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कर्मचारियों से त्योहार के मौसम में हड़ताल वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा, 'पूरे देश में लोग 'स्वच्छता मित्रों' का सम्मान करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनके पैर धोए थे। उनकी माँगों पर विचार-विमर्श के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।'

नगर आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार के अनुसार शहरी प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत सार्थक रही है। हालाँकि, यूनियन नेताओं ने कोई ठोस फैसला लिए बिना हड़ताल वापस लेने से इनकार कर दिया है और वे सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव से बात करना चाहते हैं।

आगे क्या होगा

इस हड़ताल का असर मध्य प्रदेश के अन्य शहरी स्थानीय निकायों में भी साफ-सफाई सेवाओं पर पड़ा है। यदि जल आपूर्ति बाधित हुई तो त्योहारी भीड़ और बढ़ते कचरे के बीच स्थिति और विकट हो सकती है। अब सभी की नज़रें मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली वार्ता पर टिकी हैं, जो इस संकट का तात्कालिक समाधान तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे आज भी ₹25,000 की न्यूनतम माँग के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। त्योहारी सीज़न में हड़ताल की रणनीति जनता पर दबाव बनाती है, लेकिन यह सरकार की उस विफलता को भी उजागर करती है जिसने वर्षों तक इन माँगों को टालते रहने का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता की माँग यह भी संकेत देती है कि नगर निगम प्रशासन के पास इन माँगों को पूरा करने का न अधिकार है, न संसाधन।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल नगर निगम कर्मचारियों की हड़ताल क्यों हो रही है?
कर्मचारी कम से कम ₹25,000 मासिक मानदेय, वेतन संशोधन, सेवाओं को नियमित करने, सरकारी कर्मचारी का दर्जा, अनुबंध प्रणाली समाप्त करने और अनुकंपा नियुक्ति जैसी माँगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। नगर निगम के 18,000 में से लगभग 15,000 कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं।
भोपाल में धनतेरस पर कचरे की स्थिति कितनी गंभीर है?
लगातार दूसरे दिन कचरा उठाने का काम ठप है। दीपावली के दौरान भोपाल में रोज़ाना करीब 1,000 टन कचरा निकलता है, जो सामान्य दिनों में 850 टन होता है। कई इलाकों के निवासी एक हफ्ते से गाड़ी का इंतज़ार कर रहे हैं और कुछ जगहों पर लोग कचरा जला रहे हैं।
क्या भोपाल में पेयजल आपूर्ति बाधित हो सकती है?
जल विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई रोकने की धमकी दी है। भोपाल में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं, जिससे त्योहार के दौरान लाखों नागरिकों को गंभीर परेशानी की आशंका है।
प्रशासन और कर्मचारी यूनियन के बीच बातचीत का क्या हाल है?
नगर आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार के अनुसार शहरी प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच बातचीत सार्थक रही है। हालाँकि, यूनियन नेताओं ने कोई ठोस आश्वासन मिले बिना हड़ताल वापस लेने से इनकार किया है और वे सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव से बात करना चाहते हैं।
इस हड़ताल का असर मध्य प्रदेश के अन्य शहरों पर भी पड़ा है?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार इस हड़ताल का असर मध्य प्रदेश के अन्य शहरी स्थानीय निकायों में भी साफ-सफाई सेवाओं पर पड़ा है। हड़ताल का दायरा अब केवल सफाई कर्मचारियों तक नहीं, बल्कि अग्निशमन, जल आपूर्ति और बिजली जैसे अनेक विभागों तक फैल गया है।
राष्ट्र प्रेस
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