भोपाल रेलवे TTE की सतर्कता: घर से भागी 14 वर्षीय किशोरी विदिशा में सुरक्षित परिजनों को सौंपी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल के एक सतर्क टिकट परीक्षक (TTE) ने 2 जुलाई 2026 को घर से भागी एक 14 वर्षीय किशोरी को समय पर पहचानकर उसे सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुँचाया। यह घटना भोपाल–बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 18235) में उस समय सामने आई जब किशोरी अकेले यात्रा कर रही थी।
कैसे हुई पहचान
भोपाल से बीना के बीच ड्यूटी पर तैनात TTE विजय श्रीवास ने स्लीपर कोच S-2 में एक नाबालिग बालिका को बिना किसी अभिभावक के अकेले यात्रा करते देखा। संदेह होने पर उन्होंने बालिका से संवेदनशीलता के साथ पूछताछ की, जिसमें बालिका ने स्वयं बताया कि घर में हुए विवाद के कारण वह घर छोड़कर निकल पड़ी थी।
त्वरित कार्रवाई और रेलवे तंत्र की भूमिका
स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए TTE विजय श्रीवास ने तत्काल रेलवे कंट्रोल को सूचित किया। कंट्रोल के निर्देश पर बालिका को विदिशा रेलवे स्टेशन पर आवश्यक मेमो के साथ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) विदिशा को सुपुर्द किया गया। इसके बाद RPF ने बालिका के परिजनों से संपर्क स्थापित कर उन्हें सुरक्षित सौंप दिया।
वरिष्ठ अधिकारी की सराहना
सीनियर डिवीज़नल कमर्शियल मैनेजर (SDCM) सौरभ कटारिया ने TTE की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि रेल कर्मचारी यात्री सेवा के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति भी पूरी तरह सजग रहते हैं। उन्होंने कहा, 'उनकी समय पर की गई कार्रवाई से एक नाबालिग बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।'
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब रेलवे अपने 'मिशन जीवन रक्षा' और यात्री सुरक्षा अभियानों के तहत बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ज़ोर दे रहा है। गौरतलब है कि ट्रेनों में अकेले यात्रा करते नाबालिग बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित घर पहुँचाना रेलवे सुरक्षा बल की प्राथमिकताओं में शामिल है। भोपाल मंडल के इस कदम ने एक बार फिर साबित किया कि मैदानी स्तर पर तैनात रेलकर्मियों की सजगता किसी बड़े हादसे को टाल सकती है।