हरियाणा के 77वें वन महोत्सव में भूपेंद्र यादव ने अरावली संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 7 अगस्त 2026 को मानेसर में आयोजित हरियाणा के 77वें वन महोत्सव में भाग लिया और राज्य सरकार द्वारा अरावली पर्वतमाला के संरक्षण तथा वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उठाए गए कदमों की प्रशंसा की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने इस अवसर पर पौधारोपण भी किया और कहा कि हालिया समीक्षा में राज्य की प्रगति उत्साहजनक रही है।
केंद्र की सिफारिशों पर हरियाणा की प्रगति
यादव ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पूर्व हरियाणा में वायु गुणवत्ता की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की थी। उन्होंने कहा कि यह देखकर संतोष हुआ कि हरियाणा सरकार ने केंद्र की सिफारिशों को गंभीरता से लिया है और उन्हें ज़मीन पर उतारने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्र की प्रमुख सिफारिशों में हाउसिंग सोसाइटियों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का क्रियान्वयन, उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCD) की स्थापना, स्मार्ट यातायात प्रबंधन को लागू करना तथा हरित गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल हैं।
अरावली और घास के मैदानों का महत्व
यादव ने मृदा संरक्षण और भूजल स्तर बनाए रखने में घास के मैदानों और वनक्षेत्रों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य में सराहनीय कार्य हुआ है और अरावली को पुनः हरा-भरा करना सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का संबोधन
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वन महोत्सव केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति का ऋण चुकाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जब आज दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, भारत ने सदियों पहले ही प्रकृति को पूजा का दर्जा दिया था।
सैनी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत इस वर्ष राज्य में 1.4 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें विभिन्न वर्गों की जन-भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
राज्यव्यापी आयोजन की विशेषता
इस वर्ष के समारोह की उल्लेखनीय बात यह रही कि हरियाणा के सभी जिलों में एक साथ जिला-स्तरीय वन महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में राज्य के मंत्री, सांसद, विधायक, बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैन, डिप्टी कमिश्नर और संबंधित जिलों के अन्य जन-प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
मंच पर राज्य के पर्यावरण और वन मंत्री राव नरबीर सिंह सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारी उपस्थित थे। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर भारत के कई राज्य वायु गुणवत्ता सुधार के लिए केंद्रीय दबाव का सामना कर रहे हैं — और हरियाणा की सक्रियता इस संदर्भ में महत्वपूर्ण संकेत देती है।