बिहार में एक माह में 8,681 बच्चे लापता, 85% लड़कियाँ: तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने 25 मई 2026 को आरोप लगाया कि राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है — पिछले एक महीने में 8,681 बच्चे लापता हुए हैं, जिनमें 85 प्रतिशत लड़कियाँ हैं। उन्होंने कहा कि आज समूचे बिहार की महिलाएँ, बच्चे और आम नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
एक्स पर तेजस्वी का तीखा हमला
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा: 'बिहार में प्रतिदिन अनेकों दुष्कर्म की जघन्य घटनाएँ घटती हैं। घर में घुसकर महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया जाता है। चंद दिनों में 75 से अधिक दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दिया गया है। स्वर्णकारों के साथ दिनदहाड़े लूट की घटनाएँ होती हैं।'
उन्होंने आगे कहा कि हर जिले में हर दिन हत्या, लूट और चोरी की वारदातें हो रही हैं, लेकिन मुख्यमंत्री एआई-तकनीकयुक्त कैमरों का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहे।
छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि NDA सरकार के कार्यकाल में पहले एक नीट छात्रा — जो दुष्कर्म पीड़िता थी — की हत्या हुई, और अब पटना में पॉलिटेक्निक परीक्षा देने आई एक नाबालिग छात्रा के साथ होटल में छेड़छाड़ और अपहरण के प्रयास की घटना सामने आई है। उनके अनुसार, बिहार के अलग-अलग जिलों की छात्राएँ पटना में रहकर पढ़ाई करती हैं, लेकिन मौजूदा राज में उनकी सुरक्षा बेहद चिंताजनक है।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के अंत से महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है।
मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना
तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि 'पाताल से अपराधियों को ढूंढने' का दावा करने वाले मुख्यमंत्री की सरकार में पुलिस और कानून का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि 'रीलबाजी' और 'सड़कछाप डायलॉगबाजी' छोड़कर बिहार की महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस और कारगर कदम उठाएँ।
विपक्ष का रुख और आगे की राह
तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि RJD महिलाओं की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगी। गौरतलब है कि बिहार में विधानसभा चुनाव नज़दीक आने के साथ कानून-व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रकार के आरोप मतदाताओं — विशेषकर महिला मतदाताओं — को प्रभावित कर सकते हैं।