14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार बनेगा फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन हब: पटना में VFX-3D इंडस्ट्री को सरकारी मान्यता की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार बनेगा फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन हब: पटना में VFX-3D इंडस्ट्री को सरकारी मान्यता की मांग

सारांश

पटना में तीन दशकों से हॉलीवुड-बॉलीवुड के लिए VFX और 3D काम करने वाले बिहारी तकनीशियन अब सरकारी मान्यता माँग रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ सिनेमैटिक टेक्नोलॉजी एंड आर्ट का कहना है कि सही नीति मिले तो बिहार देश का अगला फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन हब बन सकता है।

मुख्य बातें

एसोसिएशन ऑफ सिनेमैटिक टेक्नोलॉजी एंड आर्ट ने 30 मई 2026 को पटना में बिहार सरकार से पोस्ट प्रोडक्शन को उद्योग का दर्जा देने की मांग की।
चेयरमैन देवेन्द्र सिंह के अनुसार, पटना में पिछले 30 वर्षों से हॉलीवुड-बॉलीवुड फिल्मों का VFX, 3D और कलराइजेशन कार्य हो रहा है।
बिहार के कलाकार देश-विदेश के बड़े स्टूडियो में 25 से 30 प्रतिशत तक योगदान दे रहे हैं।
महासचिव अभिमन्यु प्रताप सिंह ने आधुनिक फिल्म सिटी निर्माण की माँग की, जिससे पर्यटन, निवेश और रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा।
कोषाध्यक्ष रणवीर शर्मा ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार इस उभरते क्षेत्र पर गंभीरता से ध्यान देगी।

पटना में एसोसिएशन ऑफ सिनेमैटिक टेक्नोलॉजी एंड आर्ट ने 30 मई 2026 को एक प्रेस वार्ता में मांग उठाई कि बिहार सरकार फिल्मों के पोस्ट प्रोडक्शन कार्यों — जिनमें VFX, 3D और कलराइजेशन शामिल हैं — को औपचारिक उद्योग का दर्जा दे और इस क्षेत्र को संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराए। यह मांग मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद उठी है, जब उद्योग जगत को नीतिगत सुधारों की उम्मीद जगी है।

पटना में तीन दशकों की अनदेखी प्रतिभा

संघ के चेयरमैन देवेन्द्र सिंह ने पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया स्थित बियाडा भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि पटना में पिछले लगभग 30 वर्षों से हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों के लिए VFX, 3D और कलराइजेशन का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के कई बड़े स्टूडियो में बिहार के कलाकार 25 से 30 प्रतिशत तक योगदान दे रहे हैं। बावजूद इसके, जागरूकता की कमी और सरकारी समर्थन के अभाव में यह क्षेत्र अपेक्षित पहचान हासिल नहीं कर सका।

रोज़गार और निवेश की संभावना

संघ के महासचिव अभिमन्यु प्रताप सिंह ने कहा कि यदि सरकार इस क्षेत्र को बढ़ावा दे और बड़े स्टूडियो के साथ समन्वय स्थापित हो, तो बिहार में यह एक बड़े उद्योग का रूप ले सकता है। उनके अनुसार इससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार और करियर के अवसर पैदा होंगे। गौरतलब है कि कई चर्चित फिल्मों में बिहार के तकनीशियनों ने अपनी तकनीकी प्रतिभा का योगदान दिया है, जो अब तक काफी हद तक अनाम रहा है।

फिल्म सिटी की माँग: पर्यटन और निवेश का नया द्वार

अभिमन्यु प्रताप सिंह ने बिहार में आधुनिक फिल्म सिटी विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि यहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्म सिटी बनती है, तो देश-विदेश के निर्माता पोस्ट प्रोडक्शन कार्य के लिए पटना आएंगे। इससे पर्यटन, निवेश और रोज़गार के क्षेत्र में बिहार को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य — जैसे उत्तर प्रदेश और तेलंगाना — फिल्म उद्योग को आकर्षित करने के लिए आक्रामक नीतियाँ अपना रहे हैं।

सरकार से अपेक्षाएँ

संघ के कोषाध्यक्ष रणवीर शर्मा ने उम्मीद जताई कि सरकार पोस्ट प्रोडक्शन, VFX, 3D और कलराइजेशन जैसे उभरते क्षेत्रों पर गंभीरता से ध्यान देगी, ताकि पटना आने वाले समय में फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन इंडस्ट्री के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सके। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता अमित रंजन भी उपस्थित थे। अब सभी की नज़रें राज्य सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक नीतिगत विफलता की है जिसमें 'ब्रेन ड्रेन' को रोकने के बजाय उसे स्वीकार कर लिया गया। जब UP नोएडा फिल्म सिटी और तेलंगाना हैदराबाद को ग्लोबल मीडिया हब बना रहे हैं, तब बिहार की माँग देर से आई लेकिन दिशा सही है। असली परीक्षा यह है कि सम्राट चौधरी सरकार इस माँग को चुनावी बयानबाज़ी से आगे ले जाकर ठोस नीति में बदल पाती है या नहीं — क्योंकि बिना प्रोत्साहन ढाँचे और बुनियादी ढाँचे के निवेश के, 'हब' बनने की बात महज़ एक प्रेस वार्ता तक सीमित रह जाएगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन हब बनाने की मांग क्यों उठी?
एसोसिएशन ऑफ सिनेमैटिक टेक्नोलॉजी एंड आर्ट के अनुसार, पटना में पिछले 30 वर्षों से हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों के लिए VFX, 3D और कलराइजेशन का काम हो रहा है, लेकिन सरकारी समर्थन और नीतिगत मान्यता के अभाव में यह क्षेत्र उचित पहचान नहीं पा सका। नई सरकार के गठन के बाद यह माँग फिर से उठाई गई है।
बिहार के फिल्म तकनीशियन बड़े स्टूडियो में कितना योगदान देते हैं?
संघ के चेयरमैन देवेन्द्र सिंह के अनुसार, देश-विदेश के कई बड़े स्टूडियो में बिहार के कलाकार 25 से 30 प्रतिशत तक योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें संस्थागत समर्थन और आधिकारिक पहचान नहीं मिली है।
बिहार में फिल्म सिटी बनने से क्या फायदे होंगे?
महासचिव अभिमन्यु प्रताप सिंह के अनुसार, आधुनिक फिल्म सिटी बनने से देश-विदेश के निर्माता पोस्ट प्रोडक्शन कार्य के लिए पटना आएंगे, जिससे पर्यटन, निवेश और रोज़गार के क्षेत्र में बिहार को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर करियर के अवसर पैदा होंगे।
इस मांग के पीछे कौन-सा संगठन है?
एसोसिएशन ऑफ सिनेमैटिक टेक्नोलॉजी एंड आर्ट इस मांग का नेतृत्व कर रहा है। इसके चेयरमैन देवेन्द्र सिंह, महासचिव अभिमन्यु प्रताप सिंह और कोषाध्यक्ष रणवीर शर्मा ने 30 मई 2026 को पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया स्थित बियाडा भवन में प्रेस वार्ता आयोजित की।
बिहार सरकार से पोस्ट प्रोडक्शन उद्योग के लिए क्या माँगा गया है?
संघ ने माँग की है कि VFX, 3D और कलराइजेशन जैसे पोस्ट प्रोडक्शन कार्यों को औपचारिक उद्योग का दर्जा दिया जाए, सरकारी वित्तीय सहयोग और नीतिगत ढाँचा तैयार किया जाए, तथा बड़े स्टूडियो के साथ सरकारी समन्वय स्थापित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले