बिहार पंचायत कर विवाद: विधानसभा-विधान परिषद में विपक्ष का हंगामा, उपमुख्यमंत्री बोले — अभी कोई निष्कर्ष नहीं
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा और विधान परिषद में 21 जुलाई को ग्राम पंचायत कर दर नियमावली 2026 को लेकर तीखा विवाद देखने को मिला, जब विपक्षी दलों ने सरकार पर ग्रामीण जनता पर नया आर्थिक बोझ थोपने का आरोप लगाया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि संबंधित विधेयक सदन में प्रस्तुत होने पर ही विस्तृत चर्चा होगी और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं। विधान परिषद में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दोटूक कहा कि गरीबों पर कोई नया कर लगाने का प्रस्ताव पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है।
विधानसभा में हंगामा और कार्यवाही बाधित
विधानसभा में विपक्षी सदस्यों ने पंचायत कर व्यवस्था पर तत्काल चर्चा की माँग की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के विधायकों ने इसे 'गरीब-विरोधी कदम' बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार पंचायतों के माध्यम से सीमित आय वाले ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालने की तैयारी में है। विरोध तीव्र होते ही विपक्षी सदस्य वेल में पहुँच गए और सरकार के विरुद्ध नारेबाज़ी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही।
अध्यक्ष प्रेम कुमार ने विपक्षी सदस्यों से बार-बार अपनी सीटों पर लौटने और सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि जब विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत होगा, तब प्रत्येक प्रावधान पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा और सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
विधान परिषद में राजद का विरोध
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान पार्षद डॉ. सुनील कुमार सिंह ने विधान परिषद में पंचायतों में होल्डिंग टैक्स वसूली के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी आज भी गाँवों में निवास करती है और अधिकांश ग्रामीण परिवार सीमित आय पर आश्रित हैं। उनके अनुसार, ऐसे समय में पंचायत स्तर पर नया कर लगाने का प्रयास आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के हित में नहीं होगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सफाई
विपक्ष के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधान परिषद में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार गरीबों पर कोई नया कर नहीं लगाने जा रही। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो बनाए गए नियमों में संशोधन किया जा सकता है, लेकिन गरीबों पर नया टैक्स थोपे जाने का दावा 'पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन' है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं और ग्रामीण मतदाताओं की भावनाएँ राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं।
आगे क्या होगा
सरकार के अनुसार, ग्राम पंचायत कर दर नियमावली 2026 से संबंधित विधेयक सदन में प्रस्तुत होने पर विस्तृत चर्चा होगी और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि पंचायत स्तर पर कर-संग्रह का मुद्दा राज्य में नया नहीं है — स्थानीय निकायों को वित्तीय स्वायत्तता देने की माँग और उसके सामाजिक प्रभाव के बीच यह बहस लंबे समय से जारी है। विपक्ष के तेवर बताते हैं कि यह विधेयक सदन में आने पर भी सत्ता पक्ष को कड़े सवालों का सामना करना पड़ेगा।