फरक्का जलसंधि विवाद: लालू प्रसाद यादव ने संजय झा को बताया 'नौसिखिया', बोले — पहले इतिहास-भूगोल पढ़ें
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने 22 अगस्त 2026 को जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा पर तीखा हमला बोला। फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण पर झा के हालिया बयान को निशाने पर लेते हुए लालू यादव ने बिना नाम लिए उन्हें 'नौसिखिया' करार दिया और कहा कि फरक्का बैराज के मुद्दे पर बोलने वालों को इसके इतिहास और भूगोल की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।
एक्स पर लालू का पलटवार
लालू यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट जारी कर कहा कि राजद ने संसद से लेकर राज्य सरकार तक हर मंच पर फरक्का बैराज का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी दूरदृष्टि ने बहुत पहले ही पहचान लिया था कि पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर बने इस बैराज से बिहार को गंभीर नुकसान हो सकता है।
लालू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज के मुद्दे पर कभी एक शब्द नहीं बोला और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में दीर्घकालिक हितों की बजाय तत्काल और क्षणिक लाभ वाली राजनीति को प्राथमिकता दी।
संजय झा का मूल बयान क्या था
जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने 20 अगस्त को प्रकाशित एक लेख में केंद्र सरकार से माँग की थी कि मौजूदा स्वरूप में फरक्का जलसंधि का नवीनीकरण न किया जाए। झा का तर्क था कि 1996 में समझौते के समय बिहार के हितों की अनदेखी हुई और पिछले तीन दशकों के आँकड़े इस नुकसान को साबित करते हैं। उन्होंने माँग की थी कि संधि की अवधि समाप्त होने के बाद गंगा बेसिन के सभी राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन कर नई व्यवस्था तैयार की जाए।
फरक्का संधि की पृष्ठभूमि
1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित फरक्का जलसंधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। यह संधि गंगा के जल बँटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच हुई थी, लेकिन बिहार लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि बैराज के कारण राज्य में बाढ़ और जल संकट की स्थिति बिगड़ी है। संधि के नवीनीकरण का सवाल अब बिहार की जल सुरक्षा को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।
लालू की सलाह — दस्तावेज़ पढ़ें, फिर बोलें
लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के राजनीतिक सहयोगियों को इस विषय पर बोलने से पहले बिहार के जल संसाधन विभाग जाकर गंगा में जल उपलब्धता की स्थिति, बांग्लादेश के साथ हुई अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रभाव और तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से जल संसाधन विभाग के दस्तावेज़ों और तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह के केंद्र सरकार के साथ हुए पत्राचार को पढ़ने की सलाह दी।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण को लेकर राजद और जदयू के बीच शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तीखी होने के संकेत दे रही है। दिसंबर 2026 की समयसीमा नज़दीक आने के साथ बिहार के जल हितों का यह मुद्दा राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।