22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फरक्का जलसंधि विवाद: लालू प्रसाद यादव ने संजय झा को बताया 'नौसिखिया', बोले — पहले इतिहास-भूगोल पढ़ें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फरक्का जलसंधि विवाद: लालू प्रसाद यादव ने संजय झा को बताया 'नौसिखिया', बोले — पहले इतिहास-भूगोल पढ़ें

सारांश

फरक्का जलसंधि की दिसंबर 2026 में समाप्त होती अवधि ने बिहार की राजनीति में नई आग लगा दी है। लालू प्रसाद यादव ने संजय झा के नवीनीकरण-विरोधी लेख को 'नौसिखियापन' बताकर खारिज किया और नीतीश कुमार पर संसद में चुप्पी साधने का आरोप लगाया — राजद बनाम जदयू की यह जल-राजनीति आने वाले महीनों में और गहरी होगी।

मुख्य बातें

लालू प्रसाद यादव ने 22 अगस्त 2026 को एक्स पर पोस्ट कर संजय कुमार झा को बिना नाम लिए 'नौसिखिया' बताया।
संजय झा ने 20 अगस्त को प्रकाशित लेख में केंद्र से माँग की थी कि फरक्का जलसंधि का मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण न हो।
1996 की भारत-बांग्लादेश फरक्का जलसंधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।
लालू यादव ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज पर कभी एक शब्द नहीं बोला।
लालू ने जदयू नेताओं को बिहार जल संसाधन विभाग के दस्तावेज़ और तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह के पत्राचार पढ़ने की सलाह दी।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने 22 अगस्त 2026 को जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा पर तीखा हमला बोला। फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण पर झा के हालिया बयान को निशाने पर लेते हुए लालू यादव ने बिना नाम लिए उन्हें 'नौसिखिया' करार दिया और कहा कि फरक्का बैराज के मुद्दे पर बोलने वालों को इसके इतिहास और भूगोल की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।

एक्स पर लालू का पलटवार

लालू यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट जारी कर कहा कि राजद ने संसद से लेकर राज्य सरकार तक हर मंच पर फरक्का बैराज का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी दूरदृष्टि ने बहुत पहले ही पहचान लिया था कि पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर बने इस बैराज से बिहार को गंभीर नुकसान हो सकता है।

लालू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज के मुद्दे पर कभी एक शब्द नहीं बोला और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में दीर्घकालिक हितों की बजाय तत्काल और क्षणिक लाभ वाली राजनीति को प्राथमिकता दी।

संजय झा का मूल बयान क्या था

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने 20 अगस्त को प्रकाशित एक लेख में केंद्र सरकार से माँग की थी कि मौजूदा स्वरूप में फरक्का जलसंधि का नवीनीकरण न किया जाए। झा का तर्क था कि 1996 में समझौते के समय बिहार के हितों की अनदेखी हुई और पिछले तीन दशकों के आँकड़े इस नुकसान को साबित करते हैं। उन्होंने माँग की थी कि संधि की अवधि समाप्त होने के बाद गंगा बेसिन के सभी राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन कर नई व्यवस्था तैयार की जाए।

फरक्का संधि की पृष्ठभूमि

1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित फरक्का जलसंधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। यह संधि गंगा के जल बँटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच हुई थी, लेकिन बिहार लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि बैराज के कारण राज्य में बाढ़ और जल संकट की स्थिति बिगड़ी है। संधि के नवीनीकरण का सवाल अब बिहार की जल सुरक्षा को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।

लालू की सलाह — दस्तावेज़ पढ़ें, फिर बोलें

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के राजनीतिक सहयोगियों को इस विषय पर बोलने से पहले बिहार के जल संसाधन विभाग जाकर गंगा में जल उपलब्धता की स्थिति, बांग्लादेश के साथ हुई अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रभाव और तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से जल संसाधन विभाग के दस्तावेज़ों और तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह के केंद्र सरकार के साथ हुए पत्राचार को पढ़ने की सलाह दी।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण को लेकर राजद और जदयू के बीच शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तीखी होने के संकेत दे रही है। दिसंबर 2026 की समयसीमा नज़दीक आने के साथ बिहार के जल हितों का यह मुद्दा राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संदर्भ अलग है — संधि की समयसीमा वास्तव में दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है, इसलिए यह बहस महज़ वाकयुद्ध नहीं है। विडंबना यह है कि राजद और जदयू दोनों बिहार के जल हितों की पैरवी का दावा करते हैं, लेकिन दोनों दलों ने केंद्र में सत्ता के साझेदार के रूप में अलग-अलग समय पर इस संधि के साथ समझौता किया। असली सवाल यह है कि संधि-नवीनीकरण वार्ता में बिहार की माँगों को कानूनी और कूटनीतिक बल कौन देगा — और यह जवाब अभी किसी के पास नहीं है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फरक्का जलसंधि क्या है और यह 2026 में क्यों चर्चा में है?
फरक्का जलसंधि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल बँटवारे को लेकर हुई थी। इस संधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है, जिससे इसके नवीनीकरण का सवाल बिहार की राजनीति और जल सुरक्षा के केंद्र में आ गया है।
लालू प्रसाद यादव ने संजय कुमार झा पर क्या आरोप लगाए?
लालू प्रसाद यादव ने संजय कुमार झा को बिना नाम लिए 'नौसिखिया' बताया और कहा कि फरक्का बैराज पर बोलने वालों को इसके इतिहास और भूगोल की जानकारी नहीं है। उन्होंने जदयू नेताओं को बिहार के जल संसाधन विभाग के दस्तावेज़ और तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह के पत्राचार पढ़ने की सलाह दी।
संजय कुमार झा ने फरक्का संधि पर क्या माँग रखी थी?
जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने 20 अगस्त को प्रकाशित लेख में केंद्र सरकार से माँग की थी कि फरक्का जलसंधि का मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण न किया जाए। उन्होंने कहा था कि गंगा बेसिन के सभी राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन कर नई व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
लालू यादव ने नीतीश कुमार पर क्या आरोप लगाया?
लालू प्रसाद यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज के मुद्दे पर कभी एक शब्द नहीं बोला। उनके अनुसार नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में दीर्घकालिक मुद्दों की बजाय तत्काल और क्षणिक लाभ वाली राजनीति को प्राथमिकता दी।
फरक्का बैराज से बिहार को क्या नुकसान होता है?
बिहार लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पश्चिम बंगाल में गंगा पर बने फरक्का बैराज के कारण राज्य में बाढ़ और जल संकट की स्थिति बिगड़ी है। संजय झा ने भी अपने लेख में कहा था कि पिछले तीन दशकों के आँकड़े बिहार को हुए नुकसान को साबित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले