फरक्का जल संधि पर जेडीयू का बड़ा अभियान: बिहार के 12 जिलों में 'नीतीश संवाद' कार्यक्रम, 5 सितंबर से बक्सर में शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) ने फरक्का जल संधि के मुद्दे पर बिहार में व्यापक जन-जागरूकता अभियान छेड़ने की घोषणा की है। 30 अगस्त 2026 को पार्टी ने बताया कि 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' नामक कार्यक्रम के तहत 12 जिलों में संवाद बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा सीधे जनता से संवाद करेंगे।
अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
जेडीयू का कहना है कि फरक्का बैराज के संचालन के चलते गंगा नदी में बड़े पैमाने पर गाद जमा हुई है, जिससे नदी का तल ऊँचा हो गया है। पार्टी के अनुसार, इसके दो विपरीत परिणाम सामने आए हैं — मानसून में उत्तर बिहार में बाढ़ की भीषणता और गर्मियों में कई क्षेत्रों में गंभीर जल संकट। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बाढ़ प्रबंधन पहले से ही एक पुरानी चुनौती रही है।
पार्टी ने यह भी दावा किया कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार को सिंचाई, पेयजल और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त जल आवंटन नहीं मिल पाता, जिससे राज्य के किसानों और आम नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ता है।
संधि नवीनीकरण का अहम मोड़
गौरतलब है कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। जेडीयू का तर्क है कि संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार के हितों और वर्ष 2050 तक की दीर्घकालिक जल आवश्यकताओं को केंद्र सरकार के समक्ष मज़बूती से रखा जाना चाहिए। पार्टी इस अभियान को उसी दिशा में एक राजनीतिक और सामाजिक दबाव के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
कार्यक्रम का चरणबद्ध कार्यक्रम
अभियान का पहला चरण 5 सितंबर को बक्सर से शुरू होगा। यह कार्यक्रम बगीचा उत्सव मैरिज लॉन, सेंट्रल जेल रोड, बक्सर में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 6 सितंबर को भोजपुर, 8 सितंबर और 9 सितंबर को खगड़िया में कार्यक्रम निर्धारित हैं। पार्टी ने बताया कि पहले चरण के बाद राज्य के शेष जिलों में भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आम जनता पर असर
जेडीयू नेताओं के अनुसार, इस अभियान में राज्य के किसानों, आम नागरिकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों को शामिल किया जाएगा तथा उनकी राय भी ली जाएगी। पार्टी का उद्देश्य फरक्का मुद्दे को व्यापक जनचर्चा का विषय बनाना है, ताकि संधि नवीनीकरण की प्रक्रिया में बिहार की आवाज़ अनसुनी न रहे। यह पहल राज्य के उन लाखों किसानों और परिवारों के लिए प्रासंगिक है जो गंगा के जल स्तर पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं।