फरक्का संधि नवीनीकरण न हो — JDU के संजय झा का विपक्ष पर तीखा प्रहार, बिहार के जल हितों की पैरवी
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने 26 अगस्त 2026 को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान फरक्का संधि के नवीनीकरण का कड़ा विरोध किया और विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो दल आज बिहार के जल हितों पर प्रवचन दे रहे हैं, उन्हीं की सरकारों ने दशकों पहले इस संधि पर हस्ताक्षर कर राज्य के हितों से समझौता किया था।
विपक्ष पर सीधा सवाल
झा ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि फरक्का संधि कब हुई, उस पर किसने हस्ताक्षर किए, और उस समय बिहार तथा केंद्र में किसकी सरकार थी। उन्होंने तर्क दिया कि जब संधि पर हस्ताक्षर हो रहे थे और बिहार के हितों से जुड़े अहम फैसले लिए जा रहे थे, तब उन्हें रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। उनके अनुसार, उस दौर में बिहार के हितों का सौदा कर दिया गया और अब भाषणबाजी से जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है।
संधि की अवधि और JDU की माँग
झा ने बताया कि फरक्का संधि की अवधि अब समाप्ति की ओर है और इसीलिए जनता दल (यूनाइटेड) लगातार माँग कर रहा है कि इसका नवीनीकरण न किया जाए। उन्होंने कहा कि यह समझौता 30 वर्षों के लिए किया गया था, जबकि इसे पाँच वर्ष की अवधि के लिए होना चाहिए था ताकि समय-समय पर समीक्षा कर बिहार के हितों के अनुसार आवश्यक बदलाव किए जा सकते। गौरतलब है कि फरक्का बाँध और उससे जुड़े जल बँटवारे के मुद्दे दशकों से बिहार में राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस का केंद्र रहे हैं।
नीतीश कुमार की भूमिका
झा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि वे शुरू से ही बिहार के जल हितों और गंगा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर रहे हैं। नीतीश कुमार ने इस विषय को समझने के लिए संबंधित विशेषज्ञ टीम को बुलाकर जानकारी ली थी और पूरे गंगा क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी कराया था। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में बाढ़ और जल प्रबंधन की समस्याएँ हर वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं।
संसद में उठाया मुद्दा
झा ने दावा किया कि उन्होंने फरक्का संधि और बिहार के जल हितों का मुद्दा संसद में उठाया, जिसके बाद इस पर व्यापक चर्चा शुरू हुई। उनके अनुसार, संसद में यह विषय उठाए जाने से पहले इस पर राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त बहस नहीं हो रही थी।
आगे की राह
झा ने भारत सरकार से स्पष्ट अपील की है कि फरक्का संधि का नवीनीकरण न किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कोई कूटनीतिक पहल या बातचीत होती है, तो उसमें बिहार की पानी की जरूरतों और राज्य के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बिहार के लिए पानी का सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है।